लखनऊ|06 जून 2026: उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत टीईटी प्रभावित शिक्षकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐसे शिक्षकों की सेवा सुरक्षा को लेकर सकारात्मक संकेत देते हुए आश्वस्त किया है कि राज्य सरकार उनके हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री के इस आश्वासन के बाद लंबे समय से असमंजस और चिंता का सामना कर रहे शिक्षकों में नई उम्मीद जगी है।
शनिवार को मुख्यमंत्री आवास, कालीदास मार्ग पर हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में शिक्षक प्रतिनिधिमंडल ने टीईटी अनिवार्यता के कारण प्रभावित शिक्षकों की समस्याओं को विस्तार से रखा। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्षों से विद्यालयों में सेवाएं दे रहे शिक्षकों के अनुभव और योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सरकार उनके हितों के प्रति संवेदनशील है और उचित समाधान निकालने के लिए गंभीरता से कार्य कर रही है।
शिक्षक प्रतिनिधिमंडल ने रखा सेवा सुरक्षा का मुद्दा
विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) देवेंद्र प्रताप सिंह और राज बहादुर सिंह चंदेल के नेतृत्व में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनय तिवारी और संयुक्त महामंत्री अमित सिंह ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने सबसे पहले शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और मध्याह्न भोजन योजना से जुड़े रसोइयों के लिए लागू की गई कैशलेस चिकित्सा योजना के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।
इसके बाद टीईटी प्रभावित शिक्षकों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। प्रतिनिधियों ने बताया कि वर्षों से विद्यालयों में पढ़ा रहे कई शिक्षकों की सेवाएं सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद संकट में पड़ गई हैं। ऐसे में उनके अनुभव को आधार मानते हुए सेवा अवधि के अनुसार वेटेज प्रदान किया जाए तथा विशेष विभागीय टीईटी परीक्षा आयोजित कर उनकी सेवाओं को सुरक्षित किया जाए।
पुनर्विचार याचिका का भी दिया गया उल्लेख
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षकों की समस्याओं को गंभीरता से समझती है। उन्होंने बताया कि लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए ही सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के 1 सितंबर 2025 के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य किसी भी शिक्षक के साथ अन्याय होने देना नहीं है। शिक्षकों का अनुभव शिक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण पूंजी है और सरकार उनके अधिकारों तथा भविष्य की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
तदर्थ शिक्षकों का मुद्दा भी उठा
बैठक में वर्ष 2000 के बाद अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों में नियुक्त तदर्थ शिक्षकों का विषय भी चर्चा में रहा। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री का ध्यान सर्वोच्च न्यायालय के एक अंतरिम आदेश की ओर दिलाया, जिसमें कहा गया था कि इन शिक्षकों को सेवा से बाहर करने की मंशा नहीं है।
साथ ही 9 नवंबर 2023 के शासनादेश में संशोधन या उसे निरस्त कर राजकोष से वेतन प्राप्त कर रहे तदर्थ शिक्षकों को उनके वर्तमान पदों पर समायोजित करने का सुझाव भी रखा गया। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इससे हजारों शिक्षकों को राहत मिल सकती है।
सकारात्मक रही वार्ता, शिक्षकों से धैर्य बनाए रखने की अपील
बैठक के बाद एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ हुई बातचीत बेहद सकारात्मक रही। उन्होंने शिक्षकों से किसी प्रकार के भ्रम में न पड़ने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षकों के अनुभव और वर्षों की सेवा का सम्मान करती है। इसी भावना के साथ सरकार सभी पक्षों पर विचार कर रही है और ऐसा समाधान तलाशने का प्रयास कर रही है जिससे शिक्षकों के हित सुरक्षित रह सकें।
शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि मुख्यमंत्री के इस आश्वासन से टीईटी प्रभावित शिक्षकों के बीच विश्वास बढ़ा है और आने वाले समय में सरकार की ओर से इस संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय सामने आ सकते हैं।











