लखनऊ | 20 फरवरी 2026 (शुक्रवार): होली से ठीक पहले उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बेसिक शिक्षा व्यवस्था से जुड़े लाखों शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को बड़ी राहत दी है। बजट सत्र के समापन के मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐलान किया कि अप्रैल 2026 से शिक्षामित्र मानदेय 18000 रुपये प्रतिमाह किया जाएगा। अब तक शिक्षामित्रों को 10,000 रुपये मासिक मानदेय मिलता था।
सरकार के इस फैसले को लंबे समय से आर्थिक दबाव झेल रहे शिक्षामित्रों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत करीब 1.50 लाख शिक्षामित्रों को इस निर्णय से सीधा लाभ मिलेगा। वहीं, लगभग 25 हजार अनुदेशकों का मानदेय भी बढ़ाकर 17,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है, जो पहले 9,000 रुपये था।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान कहा कि राज्य सरकार ने चरणबद्ध तरीके से शिक्षामित्रों के मानदेय में वृद्धि की है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में जब उनकी सरकार बनी थी, तब शिक्षामित्रों को मात्र 3,000 रुपये दिए जाते थे, जिसे पहले बढ़ाकर 10,000 रुपये किया गया और अब इसे बढ़ाकर 18,000 रुपये प्रतिमाह किया जा रहा है।
कैशलेस इलाज की भी मिलेगी सुविधा
मानदेय वृद्धि के साथ-साथ सरकार ने शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को 5 लाख रुपये तक की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा देने का भी निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य शिक्षा से जुड़े इन कर्मियों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना और चिकित्सा खर्च के बोझ से राहत देना है।
शिक्षा क्षेत्र के लिए बजटीय प्रावधान
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के लिए 580 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं, सीएम कंपोजिट विद्यालय योजना के अंतर्गत 2382 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है, ताकि न्याय पंचायत स्तर तक आधुनिक शिक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। सरकार का लक्ष्य है कि एक ही परिसर में कक्षा 12वीं तक की पढ़ाई के साथ कौशल विकास प्रशिक्षण भी सुनिश्चित हो।
उन्होंने कहा कि पहले प्रदेश में कई कमिश्नरी — जैसे अलीगढ़, मिर्जापुर, देवीपाटन, सहारनपुर और आजमगढ़ — में विश्वविद्यालयों का अभाव था, लेकिन वर्तमान सरकार ने इन क्षेत्रों में उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना की दिशा में काम किया है।
ड्रॉप आउट रेट में आई गिरावट
राज्य सरकार के अनुसार, पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में स्कूलों में ड्रॉप आउट रेट लगभग 6 प्रतिशत था, जिसे अब घटाकर 0 से 3 प्रतिशत के बीच लाने में सफलता मिली है। स्कूलों में शौचालय और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता ने विशेष रूप से बालिका शिक्षा को बढ़ावा दिया है।
छात्राओं के लिए विशेष योजनाएं
बजट में बालिका छात्राओं के लिए सैनिटरी नैपकिन वितरण हेतु 300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, रानी लक्ष्मीबाई योजना के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत छात्राओं को स्कूटी उपलब्ध कराने के लिए 400 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है।
लंबे समय से थी मानदेय बढ़ाने की मांग
शिक्षामित्र और अनुदेशक संगठन लंबे समय से मानदेय बढ़ोतरी की मांग कर रहे थे। प्रदेश के विभिन्न जिलों में धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन के माध्यम से यह मुद्दा उठाया गया था। ऐसे में शिक्षामित्र मानदेय 18000 रुपये किए जाने की घोषणा को इन वर्गों के लिए होली से पहले एक बड़ी सौगात के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार का मानना है कि इस फैसले से शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ जमीनी स्तर पर कार्यरत कर्मियों का मनोबल भी बढ़ेगा।








