लखनऊ | 20 फरवरी 2026 (शुक्रवार): उत्तर प्रदेश को डिजिटल गवर्नेंस के अगले चरण में ले जाने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक अहम घोषणा की है। बजट 2026-27 पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने सदन में राज्य में डाटा सेंटर क्लस्टर विकसित करने और स्टेट डाटा सेंटर अथॉरिटी के गठन की घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में शासन की कार्यप्रणाली पारंपरिक ‘रिएक्टिव’ मॉडल से आगे बढ़कर पूरी तरह डेटा-आधारित ‘प्रोएक्टिव’ मॉडल पर आधारित होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में डेटा अब नई अर्थव्यवस्था की आधारशिला बन चुका है। जिस तरह एक समय तेल (Oil Economy) वैश्विक शक्ति का केंद्र हुआ करता था, उसी प्रकार आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर भविष्य की विकास यात्रा तय करेंगे। उन्होंने AI को आने वाले समय का ‘न्यू ऑयल’ बताते हुए कहा कि इसके प्रभावी उपयोग के लिए मजबूत और एकीकृत डेटा प्रबंधन प्रणाली आवश्यक है।
2017 से पहले नहीं था कोई डाटा सेंटर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में एक भी डाटा सेंटर मौजूद नहीं था। लेकिन बीते वर्षों में सरकार ने इस दिशा में ठोस पहल करते हुए कई डेटा सेंटर स्थापित किए हैं, जबकि कुछ प्रस्तावित चरण में हैं। अब इन सभी इकाइयों को एकीकृत करते हुए डाटा सेंटर क्लस्टर के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे डिजिटल डेटा का सुरक्षित भंडारण, प्रोसेसिंग और विश्लेषण अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सके।
नीति निर्माण में डेटा विश्लेषण की भूमिका
मुख्यमंत्री ने सदन में स्वीकार किया कि पहले कई बार अलग-अलग विभाग एक ही विषय पर अलग-अलग आंकड़े प्रस्तुत करते थे, जिससे नीति निर्माण में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती थी। एकीकृत डेटा प्रणाली के अभाव में योजनाओं की प्रभावशीलता प्रभावित होती थी। ऐसे में सरकार अब समस्या उत्पन्न होने के बाद समाधान खोजने के बजाय, डेटा विश्लेषण के आधार पर संभावित चुनौतियों का पूर्वानुमान लगाने की दिशा में काम करेगी।
उन्होंने कहा कि शासन की यह नई रणनीति ‘इंडिविजुअल अप्रोच’ से आगे बढ़कर ‘यूनिवर्सल अप्रोच’ पर आधारित होगी, ताकि योजनाओं का लाभ समाज के सभी वर्गों तक समान रूप से पहुंचे।
स्टेट डाटा सेंटर अथॉरिटी बनेगी सुप्रीम रेगुलेटर
प्रस्तावित स्टेट डाटा सेंटर अथॉरिटी को प्रदेश के डिजिटल डेटा आर्किटेक्चर का शीर्ष नियामक बनाया जाएगा। यह संस्था विभिन्न विभागों से डेटा एकत्र कर उसका विश्लेषण करेगी और उसी आधार पर भविष्य की नीतियों के निर्माण में सहयोग देगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि डेटा को जोड़ने और उसके सार्थक उपयोग में ‘क्रिटिकल थिंकिंग’ वास्तविक गेम चेंजर साबित होगी।
इंसेफेलाइटिस उन्मूलन बना डेटा आधारित नीति का उदाहरण
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 के बाद पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस के खिलाफ चलाए गए अभियान का उल्लेख करते हुए इसे डेटा आधारित प्रोएक्टिव शासन का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि पहले हर वर्ष 1200 से 1500 बच्चों की मौत इस बीमारी से होती थी। सरकार ने विभिन्न विभागों के डेटा का समन्वित विश्लेषण कर पाया कि जिन क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल और शौचालय सुविधाओं का अभाव था, वहां यह बीमारी अधिक प्रभावी थी।
इसके बाद उपचार व्यवस्था के साथ-साथ शुद्ध पेयजल आपूर्ति और शौचालय निर्माण पर विशेष ध्यान दिया गया। मुख्यमंत्री के अनुसार, वर्ष 2019 के बाद प्रदेश में इंसेफेलाइटिस के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई और वर्तमान में यह बीमारी प्रभावी रूप से नियंत्रण में है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन का उद्देश्य अब केवल प्रतिक्रिया देना नहीं, बल्कि डेटा आधारित पूर्वानुमान के माध्यम से समस्याओं को उत्पन्न होने से पहले ही नियंत्रित करना है। डाटा सेंटर क्लस्टर और स्टेट डाटा सेंटर अथॉरिटी का गठन इसी दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है, जो उत्तर प्रदेश को AI आधारित अर्थव्यवस्था और डिजिटल नीति निर्माण की राह पर आगे बढ़ाएगा।








