लखनऊ|01 जून 2026: उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्णकालिक डीजीपी का पद संभालने के बाद आईपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण ने अपराधियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि प्रदेश में अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पहले की तरह जारी रहेगी। उन्होंने दो टूक कहा कि यदि कोई अपराधी पुलिस पर गोली चलाता है तो कानून के दायरे में उसका एनकाउंटर होना तय है। साथ ही उन्होंने यह भी जोर दिया कि राज्य के हर नागरिक को सुरक्षा का भरोसा मिलना चाहिए।
DGP राजीव कृष्ण ने अपराधियों को दिया कड़ा संदेश
सोमवार को पुलिस मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाना है। महिलाओं, व्यापारियों और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर विशेष रणनीति तैयार की जा रही है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश के सभी थानों में स्थापित मिशन शक्ति केंद्रों और महिला सहायता तंत्र के कारण महिला अपराधों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। पुलिस का प्रयास है कि पीड़ित महिलाओं को तेजी से न्याय मिले और शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
साइबर अपराध से निपटने के लिए AI का सहारा
डीजीपी ने माना कि बीते कुछ वर्षों में साइबर अपराध तेजी से बढ़ा है और यह पुलिस के सामने नई चुनौती बनकर उभरा है। इसे देखते हुए प्रदेश में करीब 62 हजार पुलिसकर्मियों को साइबर अपराध जांच और रोकथाम का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि हाल के समय में साइबर ठगी से जुड़े मामलों में 400.66 करोड़ रुपये की राशि फ्रीज की गई है। आने वाले समय में पुलिस साइबर अपराधियों की पहचान, वित्तीय ट्रैकिंग और डिजिटल जांच को मजबूत करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीकों का उपयोग करेगी।
नई आपराधिक कानून व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर
राजीव कृष्ण ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
उन्होंने बताया कि आपराधिक मामलों की विवेचना को तेज और वैज्ञानिक बनाने के लिए जांच पूरी करने की समयसीमा 60 से 90 दिन निर्धारित की गई है। पुलिस का लक्ष्य केवल आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं बल्कि मजबूत साक्ष्यों के आधार पर अदालत में दोषसिद्धि सुनिश्चित करना है।
डिजिटल साक्ष्य प्रणाली को बनाया जा रहा मजबूत
डीजीपी के अनुसार प्रदेश में डिजिटल और वैज्ञानिक जांच व्यवस्था को लगातार सशक्त किया जा रहा है। ई-साक्ष्य प्रणाली के माध्यम से डिजिटल साक्ष्यों के संग्रह, संरक्षण, प्रमाणीकरण और न्यायालय में प्रस्तुतीकरण की प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय बनाया गया है।
मार्च 2026 तक दर्ज 10.93 लाख एफआईआर के मुकाबले 10.65 लाख डिजिटल साक्ष्य आईडी तैयार की जा चुकी हैं। इनमें से 6.07 लाख एफआईआर को डिजिटल साक्ष्य प्रणाली से सफलतापूर्वक जोड़ा गया है।
इसके अलावा 1 दिसंबर 2024 से 22 मई 2026 तक पुलिस द्वारा 4.96 लाख से अधिक ई-समन जारी किए जा चुके हैं, जिससे न्यायिक प्रक्रिया को गति मिली है।
माफिया, हवाला नेटवर्क और बेनामी संपत्तियों पर रहेगा फोकस
राजीव कृष्ण ने कहा कि सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को और प्रभावी बनाते हुए संगठित अपराध, माफिया गिरोहों और उनसे जुड़े सफेदपोश अपराधियों पर विशेष कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने बताया कि अपराध से अर्जित अवैध संपत्तियों, बेनामी निवेश, शेल कंपनियों, हवाला नेटवर्क और फर्जी वित्तीय लेन-देन की गहन जांच की जाएगी। इसके लिए आर्थिक अपराध शाखा, साइबर क्राइम इकाइयों और अन्य विशेष एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाया जाएगा।
डीजीपी ने कहा कि पुलिस का उद्देश्य केवल अपराधियों को गिरफ्तार करना नहीं है, बल्कि उनके आर्थिक साम्राज्य, संरक्षण तंत्र और सहयोगी नेटवर्क को भी पूरी तरह ध्वस्त करना है।
गाजीपुर हत्याकांड पर भी सख्त रुख
गाजीपुर में होटल व्यवसायी के बेटे की हत्या के मामले को गंभीर बताते हुए डीजीपी ने कहा कि पुलिस इस प्रकरण में कड़ी कार्रवाई कर रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि दोषियों को कानून के अनुसार सख्त सजा दिलाने के लिए हर आवश्यक कदम उठाया जाएगा।
DGP राजीव कृष्ण ने गिनाईं प्रमुख उपलब्धियां
पुलिस मुख्यालय में बातचीत के दौरान डीजीपी ने पिछले कार्यकाल की कई उपलब्धियां भी साझा कीं।
- ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत 93 प्रतिशत से अधिक दोषसिद्धि दर हासिल की गई। 32,071 मामलों में फैसला आया, जिनमें 29,911 मामलों में दोष सिद्ध हुए और 42,681 अभियुक्तों को सजा मिली।
- गैंगस्टर एक्ट के तहत 5,684 अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की गई तथा करीब 788.38 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की गईं।
- लूट के मामलों में 27.8 प्रतिशत, चोरी में 14.4 प्रतिशत और डकैती में 11.1 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
- प्रदेश के 1,647 थानों में महिला हेल्प डेस्क और मिशन शक्ति केंद्र स्थापित किए गए, जहां 13,500 कर्मियों की तैनाती की गई है।
- दुष्कर्म के मामलों में 33.92 प्रतिशत, महिलाओं और बच्चियों के अपहरण में 17.03 प्रतिशत, दहेज हत्या में 12.96 प्रतिशत और घरेलू हिंसा के मामलों में 9.54 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
- सड़क सुरक्षा अभियान के तहत 487 दुर्घटना-प्रवण थाना क्षेत्रों की पहचान कर 573 क्रैश कंट्रोल टीमें तैनात की गईं, जिसके परिणामस्वरूप सड़क दुर्घटनाओं में 7.43 प्रतिशत और दुर्घटना से होने वाली मौतों में 11.55 प्रतिशत की कमी दर्ज हुई।
निष्कर्ष
पूर्णकालिक डीजीपी का कार्यभार संभालने के साथ ही राजीव कृष्ण ने साफ कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का सिलसिला जारी रहेगा। साइबर अपराध से लेकर संगठित अपराध, महिला सुरक्षा से लेकर डिजिटल पुलिसिंग तक, उनकी प्राथमिकताओं में तकनीक आधारित कानून व्यवस्था और तेज न्यायिक प्रक्रिया प्रमुख रूप से शामिल हैं। इससे आने वाले समय में प्रदेश की पुलिसिंग व्यवस्था और अधिक जवाबदेह तथा परिणाम-केंद्रित दिखाई दे सकती है।











