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यूपी में लाखों दिव्यांगों की संबल बनी दिव्यांग भरण-पोषण अनुदान योजना, हर महीने मिल रही आर्थिक सुरक्षा

On: June 7, 2026
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यूपी में लाखों दिव्यांगों की संबल बनी दिव्यांग भरण-पोषण अनुदान योजना
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लखनऊ/07 जून 2026: उत्तर प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के प्रयासों के बीच दिव्यांग भरण-पोषण अनुदान योजना लाखों जरूरतमंद परिवारों के लिए राहत का बड़ा माध्यम बनकर उभरी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित यह योजना न केवल आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है, बल्कि दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर भी दे रही है।

प्रदेश सरकार की ओर से पात्र दिव्यांग लाभार्थियों को हर महीने 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जा रही है। इसका असर उन परिवारों पर साफ दिखाई दे रहा है, जिनके सामने रोजमर्रा के खर्चों का प्रबंधन एक बड़ी चुनौती हुआ करता था।

दिव्यांग भरण-पोषण अनुदान योजना ने बढ़ाया आत्मविश्वास, आसान हुआ जीवन

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 12 लाख से अधिक दिव्यांगजन इस योजना से लाभान्वित हो चुके हैं। नियमित आर्थिक सहायता मिलने से लाभार्थियों की दवाइयों, भोजन, घरेलू जरूरतों और अन्य आवश्यक खर्चों को पूरा करने में मदद मिल रही है।

योजना की खास बात यह है कि पूरी राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाती है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और बीच के स्तर पर होने वाली अनियमितताओं पर भी प्रभावी रोक लगी है।

बाराबंकी की आशा के परिवार को मिला सहारा

बाराबंकी निवासी आशा, जो एक हाथ से दिव्यांग हैं, उनके परिवार के लिए यह योजना किसी संजीवनी से कम नहीं साबित हुई है। उनके पति हरिलाल लंबे समय से गंभीर श्वास संबंधी बीमारी से जूझ रहे हैं, जिसके कारण नियमित रोजगार कर पाना उनके लिए संभव नहीं है।

चार बेटियों वाले इस परिवार के सामने आर्थिक संकट लगातार बना रहता था। हरिलाल बताते हैं कि पेंशन की नियमित राशि मिलने से घर के जरूरी खर्चों को संभालने में मदद मिली है और अब उन्हें आर्थिक सहायता के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ता।

दवाइयों और दैनिक जरूरतों में मिल रही राहत

लखनऊ के गोसाईगंज निवासी 35 वर्षीय कौशल, जो बाएं पैर से दिव्यांग हैं, कहते हैं कि उन्हें नियमित रूप से योजना का लाभ मिल रहा है। प्रत्येक तीन महीने पर उनके खाते में 3,000 रुपये की सहायता राशि जमा होती है।

कौशल के अनुसार, इस धनराशि से दवाइयों और अन्य आवश्यक खर्चों का बोझ काफी हद तक कम हुआ है। उनका मानना है कि नियमित सहायता मिलने से आर्थिक चिंता में कमी आई है और जीवन को बेहतर ढंग से संचालित करने में मदद मिल रही है।

खेती करने वाले परिवारों के लिए भी बनी सहायक

लखनऊ के किसान रजनीश भी इस योजना के लाभार्थियों में शामिल हैं। खेती-किसानी से जुड़े होने के बावजूद शारीरिक चुनौतियां उनके काम को प्रभावित करती हैं। ऐसे में सरकार से मिलने वाली सहायता राशि उनके परिवार के लिए अतिरिक्त आर्थिक सहयोग का काम कर रही है।

रजनीश का कहना है कि खेती से होने वाली आय के साथ यह सहायता राशि जुड़ने से परिवार की वित्तीय स्थिति को मजबूती मिली है और आकस्मिक जरूरतों को पूरा करना पहले की तुलना में आसान हुआ है।

आंकड़ों में दिव्यांग भरण-पोषण अनुदान योजना

  • वित्तीय वर्ष 2025-26 में 12 लाख से अधिक दिव्यांगजन योजना से जुड़े।
  • प्रत्येक पात्र लाभार्थी को 1,000 रुपये प्रतिमाह की सहायता।
  • तीन माह की राशि एक साथ लाभार्थियों के खातों में भेजी जाती है।
  • डीबीटी प्रणाली के माध्यम से सीधे बैंक खाते में भुगतान।
  • पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाने पर विशेष जोर।

उत्तर प्रदेश में संचालित दिव्यांग भरण-पोषण अनुदान योजना आज केवल आर्थिक सहायता कार्यक्रम नहीं रह गई है, बल्कि यह उन लाखों परिवारों के लिए भरोसे का आधार बन चुकी है जो सीमित संसाधनों के बीच सम्मानजनक जीवन की उम्मीद बनाए हुए हैं। सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में यह पहल राज्य के कल्याणकारी दृष्टिकोण को भी मजबूती प्रदान कर रही है।

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