लखनऊ, 28 फरवरी 2026। होली जैसे बड़े त्योहार से ठीक पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने कानून-व्यवस्था को लेकर स्पष्ट संदेश दे दिया है—यूपी में अवैध शराब पर पूर्ण प्रतिबंध हर हाल में लागू कराया जाएगा। शनिवार को मुख्य सचिव एसपी गोयल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आबकारी और खनन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि राज्य में अवैध व जहरीली शराब के उत्पादन और बिक्री पर पूरी तरह रोक सुनिश्चित की जाए।
बैठक में आबकारी विभाग की अपर मुख्य सचिव वीना कुमारी मीना सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासनिक भाषा में यह एक सामान्य समीक्षा बैठक लग सकती है, लेकिन इसके संकेत साफ हैं—इस बार लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी।
यूपी में अवैध शराब पर पूर्ण प्रतिबंध: त्योहार से पहले सख्त निगरानी
होली का पर्व उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक मेलजोल और आर्थिक गतिविधियों का भी बड़ा अवसर होता है। ऐसे समय में शराब की खपत बढ़ने की आशंका रहती है। इसी पृष्ठभूमि में यूपी में अवैध शराब पर पूर्ण प्रतिबंध को लेकर जमीनी स्तर पर प्रभावी प्रवर्तन (Enforcement) की रणनीति बनाने को कहा गया है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान यह भी निर्देश दिया गया कि अंतर्विभागीय समन्वय—यानी आबकारी, पुलिस, प्रशासन और खनन विभाग—एक साझा कार्ययोजना के तहत कार्रवाई करें। अक्सर देखा गया है कि विभागों के बीच तालमेल की कमी से अवैध कारोबार पनपता है; इस बार इस कमजोरी को दूर करने की कोशिश की जा रही है।
औचक निरीक्षण और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि शराब की दुकानों, ढाबों और संभावित संवेदनशील स्थानों पर औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) किए जाएं। अधिक दर पर बिक्री की शिकायत मिलने पर तत्काल सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने अंतरराज्यीय सीमाओं पर सघन चेकिंग अभियान चलाने के भी निर्देश दिए। पड़ोसी राज्यों से अवैध शराब की खेप की तस्करी की आशंका को देखते हुए पुलिस और आबकारी टीमों को सक्रिय रहने को कहा गया है।
एक महत्वपूर्ण निर्देश यह भी रहा कि भांग की अधिकृत दुकानों पर गांजा की बिक्री तत्काल प्रभाव से रोकी जाए। इसके लिए विशेष निगरानी तंत्र विकसित करने को कहा गया है। प्रशासन का मानना है कि त्योहार के समय नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री तेजी पकड़ती है, जिसे रोकना कानून-व्यवस्था के लिए अनिवार्य है।
दुकानों को अनावश्यक रूप से बंद न रखने की हिदायत
दिलचस्प बात यह है कि जहां एक ओर सख्ती के निर्देश दिए गए, वहीं मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि शराब की लाइसेंसी दुकानों को अनावश्यक रूप से लंबे समय तक बंद न रखा जाए।
उनका तर्क था कि यदि वैध दुकानें बंद रहती हैं तो अवैध कारोबार को बढ़ावा मिल सकता है। इसलिए स्थानीय परिस्थितियों का आकलन करते हुए ही दुकानों को बंद करने का निर्णय लिया जाए। यह संतुलित दृष्टिकोण बताता है कि प्रशासन केवल प्रतिबंधात्मक कार्रवाई ही नहीं, बल्कि व्यवहारिक समाधान भी चाहता है।
खनन विभाग की समीक्षा: राजस्व और अवैध गतिविधियों पर फोकस
बैठक में खनन विभाग की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने राजस्व लक्ष्य की शत-प्रतिशत पूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही ओवरलोडिंग और अवैध खनन पर स्रोत स्तर से निगरानी बढ़ाने को कहा।
अवैध खनन में संलिप्त आरोपितों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने का स्पष्ट संदेश दिया गया। प्रशासन का मानना है कि अवैध खनन और अवैध शराब जैसे अपराध अक्सर संगठित नेटवर्क के माध्यम से संचालित होते हैं, जिन पर संयुक्त कार्रवाई जरूरी है।
प्रशासनिक संदेश साफ: शून्य सहनशीलता
इस पूरी समीक्षा बैठक का मूल संदेश यही है कि यूपी में अवैध शराब पर पूर्ण प्रतिबंध केवल एक घोषणा नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत बनाया जाएगा। जहरीली शराब की घटनाएं अतीत में कई परिवारों को तबाह कर चुकी हैं; ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकना सरकार की प्राथमिकता है।
त्योहारों के समय प्रशासनिक सतर्कता की परीक्षा होती है। होली के रंगों में किसी भी तरह की कड़वाहट न घुले, इसके लिए शासन स्तर से लेकर जिलों तक निगरानी बढ़ा दी गई है।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि ये निर्देश जमीनी स्तर पर किस तरह लागू होते हैं। फिलहाल इतना तय है कि राज्य सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है और अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दे दी है—कानून से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।









