लखनऊ, 5 फरवरी 2026। माध्यमिक शिक्षकों के बाद अब बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े लगभग 12 लाख शिक्षकों और कार्मिकों के लिए बड़ी राहत आई है। शासन ने आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि यूपी में कैशलेस चिकित्सा का लाभ अब बेसिक शिक्षा परिषद के दायरे में आने वाले पात्र शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, विशेष शिक्षकों, केजीबीवी कर्मियों और प्रधानमंत्री पोषण योजना से जुड़े रसोइयों के आश्रित परिवार तक विस्तारित किया जाएगा। इस फैसले से लंबे समय से चल रही मांग को औपचारिक स्वीकृति मिल गई।
किन्हें मिलेगा लाभ, कैसे चलेगी व्यवस्था
आदेश के मुताबिक, परिषद से मान्यता प्राप्त अनुदानित और स्ववित्तपोषित विद्यालयों में कार्यरत कार्मिक इस दायरे में आएंगे। पात्र श्रेणियों में शिक्षक, शिक्षामित्र, विशेष शिक्षक, अनुदेशक, केजीबीवी की वार्डेन, पूर्णकालिक/अंशकालिक शिक्षक और प्रधानमंत्री पोषण योजना के रसोइयों के आश्रित शामिल हैं।
योजना का संचालन स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेन्सिव हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम (SACHIS) के माध्यम से होगा। हर वर्ष 30 जून तक लाभार्थियों का अद्यतन विवरण नामित नोडल अधिकारी द्वारा SACHIS के सीईओ को उपलब्ध कराया जाएगा।
3000 रुपये प्रीमियम: वेतन से नहीं कटेगा
आदेश जारी करने वाले पार्थ सारथी सेन शर्मा (अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा) ने स्पष्ट किया है कि प्रति कार्मिक ₹3000 वार्षिक प्रीमियम अनुमानित है। लेकिन शिक्षकों के बीच फैली इस आशंका को शासन ने खारिज किया कि यह राशि वेतन से काटी जाएगी। शासन के अनुसार, प्रीमियम की किश्त सरकार वहन करेगी—यानी शिक्षकों के लिए यह सुविधा पूरी तरह निःशुल्क रहेगी।
आगामी बजट में इसके लिए आवश्यक प्रावधान किए जाने की बात भी आदेश में कही गई है, ताकि व्ययभार का वहन नियमित रूप से हो सके।
डेटा, पात्रता और अलग आदेश
बेसिक शिक्षा विभाग के पास वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों का अधिकृत डेटा उपलब्ध नहीं है। ऐसे शिक्षकों के चिह्नांकन के लिए अलग से आदेश जारी किया जाएगा। इससे पहले पात्रता का सत्यापन और डेटाबेस तैयार किया जाएगा, ताकि लाभार्थियों की सूची पारदर्शी और अद्यतन रहे।
साथ ही, जो कार्मिक पहले से केंद्र या राज्य सरकार की किसी अन्य वित्तपोषित स्वास्थ्य योजना से आच्छादित हैं, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा—दोहरे लाभ से बचने के लिए यह शर्त जोड़ी गई है।
क्रियान्वयन के निर्देश
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बेसिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश ने महानिदेशक स्कूल शिक्षा को समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। जिलों से लेकर राज्य स्तर तक नोडल समन्वय तंत्र बनाया जाएगा, ताकि कार्ड जनरेशन, अस्पतालों में कैशलेस क्लेम और सत्यापन प्रक्रिया सुचारु रहे।
जमीनी असर: शिक्षकों के लिए बड़ी राहत
ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में कार्यरत बड़ी संख्या में शिक्षक निजी अस्पतालों के खर्च से अक्सर जूझते रहे हैं। कैशलेस सुविधा लागू होने के बाद आपात स्थिति में इलाज के लिए अग्रिम भुगतान की बाध्यता कम होगी। आश्रित परिवार के सदस्यों को शामिल किए जाने से योजना का सामाजिक असर भी व्यापक होगा।










