लखनऊ/09 जून 2026: उत्तर प्रदेश में युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास को लेकर सरकार ने बड़ा खाका तैयार किया है। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी सरदार वल्लभभाई पटेल रोजगार एवं औद्योगिक क्षेत्र परियोजना के जरिए हर साल 10 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को परियोजना की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को इसके निर्माण और क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश दिए।
सरकार का उद्देश्य केवल युवाओं को प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि उन्हें सीधे उद्योगों, रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ना है, ताकि प्रशिक्षण के बाद नौकरी की तलाश में भटकना न पड़े।
यूपी में रोजगार बढ़ाने के लिए बनेगा नया कौशल विकास मॉडल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समीक्षा बैठक में कहा कि प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे निवेश और औद्योगिक विस्तार को देखते हुए कुशल मानव संसाधन तैयार करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने निर्देश दिया कि कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरी तरह उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तैयार किए जाएं।
सीएम ने स्पष्ट किया कि यह परियोजना सिर्फ एक प्रशिक्षण केंद्र नहीं होगी, बल्कि रोजगार, उद्योग, नवाचार और उद्यमिता का एकीकृत केंद्र बनेगी। इससे युवाओं को प्रशिक्षण के साथ-साथ करियर मार्गदर्शन और रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
नौ क्षेत्रीय जोन में विकसित होगा पूरा मॉडल
परियोजना के तहत उत्तर प्रदेश को नौ क्षेत्रीय जोन में विकसित किया जाएगा। प्रत्येक जोन में एक अत्याधुनिक उत्कृष्टता केंद्र (हब) स्थापित होगा, जबकि उससे जुड़े कई कौशल विकास केंद्र (स्पोक) संचालित किए जाएंगे।
हब केंद्रों में आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण, अनुसंधान, नवाचार, प्रशिक्षक प्रशिक्षण, प्लेसमेंट सहायता और करियर सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। वहीं स्पोक केंद्र स्थानीय उद्योगों और क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुसार युवाओं को प्रशिक्षण देंगे।
सरकार का लक्ष्य हर वर्ष 10 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र प्रदान करना है। इसके साथ ही 10 लाख से अधिक रोजगार मिलान (जॉब मैचिंग) किए जाएंगे और प्रशिक्षित युवाओं के लिए 80 प्रतिशत तक प्लेसमेंट सुनिश्चित करने की योजना बनाई गई है।
छह जिलों में मिल चुकी है 369 एकड़ जमीन
अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि परियोजना के पहले चरण के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। फिलहाल मऊ, कानपुर देहात, कन्नौज, रायबरेली, प्रतापगढ़ और कानपुर नगर में कुल 369 एकड़ भूमि उपलब्ध हो चुकी है।
अन्य जिलों में भी भूमि चिन्हांकन और उपलब्धता की प्रक्रिया जारी है। सरकार चाहती है कि परियोजना का आधारभूत ढांचा जल्द तैयार हो ताकि प्रशिक्षण गतिविधियां समय पर शुरू की जा सकें।
एमएसएमई और गिग वर्कर्स को भी मिलेगा फायदा
परियोजना का लाभ केवल नौकरी तलाश रहे युवाओं तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार हर वर्ष दो लाख से अधिक नए एमएसएमई उद्यमों को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम करेगी।
इसके अलावा लगभग 50 हजार गिग वर्कर्स को औपचारिक आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इससे स्वरोजगार, डिजिटल सेवाओं और छोटे उद्यमों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
सिंगापुर मॉडल से मिलेगा तकनीकी सहयोग
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि परियोजना के संचालन में सिंगापुर के प्रतिष्ठित तकनीकी शिक्षा संस्थान Institute of Technical Education और उसकी नॉलेज पार्टनर संस्था के अनुभवों का उपयोग किया जाएगा।
यह संस्थाएं पाठ्यक्रम विकास, गुणवत्ता नियंत्रण, मूल्यांकन प्रणाली, नेतृत्व विकास, क्षमता निर्माण और आधुनिक प्रशिक्षण पद्धतियों में सहयोग देंगी। सरकार को उम्मीद है कि अंतरराष्ट्रीय अनुभवों के समावेश से युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुरूप बेहतर प्रशिक्षण मिल सकेगा।
निवेश बढ़ने के साथ बढ़ेगी रोजगार की संभावनाएं
सरकार के अनुसार वर्ष 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों में लगातार वृद्धि हुई है। आने वाले वर्षों में नए उद्योगों और विनिर्माण इकाइयों के विस्तार के साथ कुशल युवाओं की मांग और बढ़ेगी।
ऐसे में यूपी में रोजगार को बढ़ावा देने वाली यह परियोजना राज्य के लाखों युवाओं के लिए अवसरों का नया द्वार खोल सकती है। सरकार का दावा है कि प्रशिक्षण, प्लेसमेंट और उद्यमिता को एक मंच पर लाकर यह योजना रोजगार सृजन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।










