लखनऊ|23 मई 2026: लखनऊउत्तर प्रदेश सरकार ने श्रमिक कल्याण, कौशल विकास और रोजगार सृजन को अगले चरण में ले जाने की तैयारी तेज कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को श्रम एवं सेवायोजन विभाग की योजनाओं की समीक्षा करते हुए साफ कहा कि राज्य की आर्थिक मजबूती का सबसे बड़ा आधार उसके श्रमिक और युवा हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि रोजगार कार्यक्रमों को केवल सरकारी योजना तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें वैश्विक अवसरों और उद्योगों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ा जाए।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बाल श्रमिक विद्या योजना के विस्तार से लेकर सेवामित्र व्यवस्था को मजबूत बनाने, औद्योगिक श्रमिकों के लिए आधुनिक सुविधा केंद्र विकसित करने और यूपी रोजगार मिशन को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने पर जोर दिया।
यूपी रोजगार मिशन को मिलेगा वैश्विक विस्तार, युवाओं को विदेशों में भी अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलती अर्थव्यवस्था में रोजगार की परिभाषा तेजी से बदल रही है और उत्तर प्रदेश के युवाओं को अब केवल स्थानीय अवसरों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि रोजगार मिशन को इस तरह तैयार किया जाए जिससे प्रदेश के युवाओं को देश के साथ-साथ विदेशों में भी बेहतर अवसर मिल सकें।
बैठक में जानकारी दी गई कि जुलाई 2025 में गठित उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। मिशन को विदेश मंत्रालय से भर्ती एजेंसी का लाइसेंस भी मिल चुका है। लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी और कानपुर में आयोजित रोजगार कार्यक्रमों के जरिए अब तक 27,555 युवाओं का चयन हुआ है, जिनमें 2,300 युवाओं को विदेशी रोजगार अवसरों के लिए चुना गया।
जर्मनी, जापान और स्लोवाक गणराज्य जैसे देशों में रोजगार की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है। इसके लिए जापानी, जर्मन और अंग्रेजी भाषा प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
बाल श्रमिक विद्या योजना अब सभी 75 जिलों तक पहुंचेगी
मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक परिस्थितियां किसी बच्चे की शिक्षा में बाधा नहीं बननी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाल श्रम प्रभावित क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर बच्चों को स्कूलों से जोड़ा जाए और पुनर्वास की प्रक्रिया को मजबूत बनाया जाए।
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2020 में शुरू की गई बाल श्रमिक विद्या योजना फिलहाल 20 जिलों में संचालित है। इस योजना के तहत 8 से 18 वर्ष आयु वर्ग के कामकाजी बच्चों को विद्यालयों में प्रवेश दिलाने के साथ आर्थिक सहायता भी दी जाती है। अब इसे संशोधित प्रावधानों के साथ प्रदेश के सभी 75 जिलों तक विस्तारित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने निजी क्षेत्र को भी इस अभियान से जोड़ने और बच्चों के कौशल विकास के लिए अलग कार्ययोजना तैयार करने को कहा।
सेवामित्र व्यवस्था को मिलेगा नया विस्तार, तकनीक से रोजगार बढ़ाने पर जोर
समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने ‘सेवामित्र व्यवस्था’ को रोजगार और जनसुविधा का एक अभिनव मॉडल बताया। उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित सेवाएं युवाओं और प्रशिक्षित कामगारों के लिए नए अवसर तैयार कर रही हैं।
वर्ष 2021 से संचालित इस व्यवस्था के अंतर्गत नागरिक मोबाइल ऐप, वेब पोर्टल और कॉल सेंटर के माध्यम से घरेलू सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान में इस प्लेटफॉर्म पर 1,097 सेवा प्रदाता, 5,049 सेवामित्र और 54,747 कुशल कामगार पंजीकृत हैं।
मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि सरकारी विभाग भी आवश्यकता के अनुसार इस व्यवस्था का उपयोग करें ताकि पारदर्शिता बढ़े और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर बन सकें।
औद्योगिक शहरों में बनेंगे आधुनिक श्रमिक सुविधा केंद्र
निर्माण श्रमिकों के लिए प्रस्तावित श्रमिक सुविधा केंद्रों को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि इन्हें केवल श्रमिकों के जुटान स्थल के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इन केंद्रों को श्रमिक सहायता, आवास, सुविधाओं और सेवा समन्वय के केंद्र के रूप में विकसित किया जाए।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के बड़े औद्योगिक शहरों में बाहर से आने वाले श्रमिकों के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित आवास व्यवस्था भी समय की आवश्यकता है।
कौशल विकास और रोजगार मेलों को उद्योगों की मांग से जोड़ने के निर्देश
कानपुर में प्रस्तावित औद्योगिक श्रमिक प्रशिक्षण संस्थान और छात्रावास योजना की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने इसे भविष्य की जरूरतों के अनुरूप पहल बताया। प्रस्ताव के अनुसार यहां 200 प्रशिक्षुओं की क्षमता वाला प्रशिक्षण संस्थान बनाया जाएगा, जहां कारपेंटरी, इलेक्ट्रिशियन, फिटर, प्लंबर, पेंटर और बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन जैसे ट्रेडों में प्रशिक्षण दिया जाएगा।
बैठक में यह भी बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान प्रदेश में 3,030 रोजगार मेलों और कैंपस प्लेसमेंट कार्यक्रमों के माध्यम से 3,74,776 अभ्यर्थियों को रोजगार अवसर मिले। वहीं 4,873 करियर काउंसलिंग कार्यक्रमों में 6,80,469 युवाओं ने भाग लिया।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि रोजगार मेलों को औपचारिक आयोजन बनने से रोकना होगा और उन्हें उद्योगों की वास्तविक मांग तथा युवाओं की क्षमता के साथ जोड़ा जाना चाहिए। साथ ही इन्हें सरदार वल्लभभाई पटेल इंडस्ट्रियल एंड एम्प्लॉयमेंट ज़ोन से भी जोड़ने के निर्देश दिए गए।








