लखनऊ, 28 फरवरी 2026 (शनिवार)। उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में शनिवार को एक अहम घोषणा ने नई चर्चा छेड़ दी। यूपी सरकार की गारंटी से विदेश में रोजगार दिलाने की योजना को आगे बढ़ाने का ऐलान करते हुए युवाओं के भविष्य को लेकर बड़ा संदेश दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ शब्दों में कहा कि राज्य सरकार एक ऐसा संस्थागत लिंक (Institutional Linkage) विकसित कर रही है, जिसके जरिए प्रशिक्षित और योग्य युवाओं को सरकार की गारंटी के साथ विदेशों में रोजगार दिलाया जाएगा।
उन्होंने कहा—“यदि यहां कोई युवा 20 हजार रुपये प्रतिमाह कमा रहा है और विदेश जाकर वही युवा 2 से 2.5 लाख रुपये तक कमाने लगे, तो यह सिर्फ उसकी आय नहीं, बल्कि उसके परिवार के सम्मान और जीवनस्तर में बदलाव का रास्ता है।”
सरकार की गारंटी से विदेश में रोजगार: क्या है योजना का ढांचा?
मुख्यमंत्री ने अपने हालिया विदेश दौरों और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के जर्मनी दौरे का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश अब वैश्विक निवेश और कौशल आधारित रोजगार का केंद्र बन रहा है।
सरकार का फोकस दो स्तरों पर है—
- विदेशी निवेश को प्रदेश में लाना
- प्रदेश के युवाओं को विदेशी बाजारों से जोड़ना
उन्होंने बताया कि एक औपचारिक तंत्र विकसित किया जा रहा है, जिसके तहत स्किल ट्रेनिंग (Skill Training), दस्तावेज़ीकरण, वीज़ा प्रक्रिया और नियोक्ता से सीधा संपर्क—सभी प्रक्रियाएं सरकार की निगरानी में होंगी। इससे युवाओं को निजी एजेंसियों की अनिश्चितताओं से मुक्ति मिलेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घोषणा सिर्फ रोजगार की बात नहीं, बल्कि “विश्वसनीयता की गारंटी” देने का प्रयास है—जो आमतौर पर विदेश भेजने के मामलों में सबसे बड़ी चिंता रहती है।
निवेश से रोजगार तक: बदलता उत्तर प्रदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले निवेश का माहौल अलग था। आज स्थिति बदली है। जर्मनी, जापान और सिंगापुर जैसे देशों से निवेश प्रस्ताव आ रहे हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह निवेश किसी व्यक्ति विशेष या परिवार के लिए नहीं, बल्कि प्रदेश के युवाओं और औद्योगिक ढांचे को मजबूत करने के लिए है।
“अवसर खुद नहीं आते, उन्हें सुबह से शाम तक लगातार मेहनत से अर्जित करना पड़ता है,” उन्होंने कहा।
कार्यक्रम में यह संदेश भी दिया गया कि उत्तर प्रदेश अब सिर्फ कृषि या पारंपरिक उद्योगों का प्रदेश नहीं, बल्कि वैश्विक रोजगार बाजार में हिस्सेदारी लेने वाला राज्य बनने की ओर बढ़ रहा है।
उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को 1500 करोड़ की राहत
लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत 1.86 करोड़ लाभार्थी महिलाओं को एलपीजी सिलेंडर रीफिल के लिए अनुदान राशि जारी की।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार साल में नौ सिलेंडर पर सब्सिडी देती है, जबकि प्रदेश सरकार दीपावली और होली पर अतिरिक्त सब्सिडी उपलब्ध कराती है।
शनिवार को कुल 1500 करोड़ रुपये की सब्सिडी जारी की गई। मंच से 10 लाभार्थी महिलाओं—निकिता गुप्ता, उमा शर्मा, लक्ष्मी देवी, तैय्यबा राशिद, शाह नूर, अर्चना, पल्लवी मिश्रा, मनीषा रावत, ज्योति पाल और सविता—को प्रतीकात्मक चेक भी सौंपे गए।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस कथन का उल्लेख किया, जिसमें वे देश की चार प्राथमिक श्रेणियों—महिला, गरीब, किसान और युवा—की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि “डबल इंजन सरकार” इन वर्गों को केंद्र में रखकर काम कर रही है।
महिलाओं और बालिकाओं पर विशेष फोकस
उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक द्वारा 14 वर्ष तक की बालिकाओं के लिए सर्वाइकल कैंसर रोकथाम टीकाकरण अभियान की शुरुआत का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि “यदि हमारी बेटी सुरक्षित है तो हमारा परिवार सुरक्षित है।”
बजट में ‘लखपति दीदी’, ‘शी-मार्ट’, मुख्यमंत्री उत्पाद विपणन योजना और महिला उद्यमी क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाओं का भी उल्लेख किया गया।
साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और आशा वर्कर के मानदेय बढ़ाने का निर्णय भी दोहराया गया।
विपक्ष पर प्रहार और राजनीतिक संदेश
मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले संसाधनों का दुरुपयोग होता था और प्रदेश को परिवार की तरह नहीं देखा जाता था। “आज 25 करोड़ जनता ही हमारा परिवार है,” उन्होंने कहा।
कार्यक्रम में महापौर सुषमा खर्कवाल, विधान परिषद सदस्य अवनीश कुमार सिंह व लालजी प्रसाद निर्मल, विधायक डॉ. नीरज बोरा और जय देवी भी उपस्थित रहीं।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अपने संबोधन में कहा—“माताएं-बहनें हर बार कमल का बटन दबाती हैं, आप हमारी स्टार प्रचारक हैं।” यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
विश्लेषण: क्या बदलेगा युवाओं का भविष्य?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार की गारंटी से विदेश में रोजगार की योजना पारदर्शी और कौशल आधारित होगी, तो यह यूपी के लाखों युवाओं के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है।
हालांकि, चुनौती भी कम नहीं है—
- अंतरराष्ट्रीय श्रम बाजार की मांग
- भाषा और तकनीकी दक्षता
- अनुबंधों की वैधानिक सुरक्षा
- और श्रमिकों के अधिकारों की निगरानी
इन पहलुओं पर ठोस ढांचा बनाना आवश्यक होगा।
फिलहाल, मुख्यमंत्री की घोषणा ने यह संकेत दे दिया है कि उत्तर प्रदेश रोजगार के मुद्दे को स्थानीय सीमा से बाहर ले जाकर वैश्विक मंच पर स्थापित करना चाहता है।









