लखनऊ/21 अगस्त 2026। उत्तर प्रदेश और जापान के बीच औद्योगिक, तकनीकी और सांस्कृतिक सहयोग को नई दिशा देने की तैयारी है। शुक्रवार को भारत में जापान के राजदूत ओनो केइची ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार भेंट की। मुलाकात में सेमीकंडक्टर, उन्नत तकनीक, निवेश, पर्यटन और कौशल विकास समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। खास बात यह रही कि दोनों पक्षों ने यूपी के युवाओं को जापानी उद्योगों की जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षित कर उन्हें अंतरराष्ट्रीय रोजगार के अवसरों से जोड़ने पर जोर दिया।
जापान के साथ सहयोग से युवाओं को मिलेगा ग्लोबल एक्सपोजर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश के पास बड़ी युवा आबादी है। यदि युवाओं को तकनीकी दक्षता के साथ जापानी भाषा और कार्य संस्कृति का प्रशिक्षण दिया जाए, तो उनके लिए जापान में रोजगार के नए रास्ते खुल सकते हैं।
इसी उद्देश्य से यूपी में विशेष स्किल डेवलपमेंट सेंटर विकसित करने की योजना पर चर्चा हुई। इन केंद्रों में जापानी उद्योगों की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण देने पर जोर रहेगा। कृषि, मैन्युफैक्चरिंग और नर्सिंग केयर जैसे क्षेत्रों को इसमें प्रमुखता दी जा सकती है।
इस पहल का सीधा लाभ उन युवाओं को मिल सकता है जो भारत में प्रशिक्षण लेकर विदेश में बेहतर रोजगार तलाश रहे हैं। यानी कौशल विकास को केवल स्थानीय नौकरी तक सीमित रखने के बजाय उसे वैश्विक रोजगार से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
सेमीकंडक्टर और ‘जापान सिटी’ पर खास नजर
बैठक में सेमीकंडक्टर सेक्टर संभावित सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में रहा। जापानी पक्ष ने बताया कि सेमीकंडक्टर को भारत-जापान आर्थिक सुरक्षा सहयोग के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में शामिल किया गया है। जापानी दल उत्तर प्रदेश में इस क्षेत्र की संभावनाओं का अध्ययन करने के लिए दौरा करेगा।
मुख्यमंत्री ने नोएडा स्थित ‘जापान सिटी’ को दोनों देशों के औद्योगिक रिश्तों का महत्वपूर्ण आधार बताया। प्रदेश में जापानी कंपनियों की मौजूदगी भी इस साझेदारी को मजबूती देती है। यामाहा, डेंसो, पैनासोनिक और कुबोटा जैसी कंपनियां उत्तर प्रदेश में पहले से कारोबार कर रही हैं।
ऐसे में सेमीकंडक्टर और उन्नत तकनीक के क्षेत्र में नए निवेश आने पर स्थानीय स्तर पर रोजगार और तकनीकी प्रशिक्षण की मांग भी बढ़ सकती है।
पर्यटन और सांस्कृतिक रिश्तों को भी मिलेगा बढ़ावा
भारत और जापान के रिश्ते केवल कारोबार तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों की साझा बौद्ध विरासत भी इस संबंध की एक अहम कड़ी है। उत्तर प्रदेश में सारनाथ और जापान के नारा जैसे स्थल इस सांस्कृतिक जुड़ाव को खास बनाते हैं।
जापानी पक्ष ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ‘टूरिज्म एक्सपो जापान 2026’ में सहभागिता का निमंत्रण दिया, जिसे मुख्यमंत्री ने स्वीकार कर लिया। इससे उत्तर प्रदेश के पर्यटन स्थलों को जापानी पर्यटकों के बीच प्रचारित करने और दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2025 में 2.19 लाख जापानी नागरिक भारत आए थे। वहीं, वर्ष 2027 में भारत-जापान राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने वाले हैं। इस अवसर को पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों के विस्तार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
10 हजार युवाओं के लिए रोजगार के अवसर की उम्मीद
उत्तर प्रदेश में जापानी निवेश को लेकर गतिविधियां पहले से तेज हैं। इस समय जापानी उद्योग जगत के 200 से अधिक प्रतिनिधियों का उच्चस्तरीय दल प्रदेश के दौरे पर है। अलग-अलग औद्योगिक क्षेत्रों में बातचीत और समझौतों (MoUs) के जरिए राज्य में करीब 10,000 नए रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना जताई गई है।
यह पहल केवल निवेश जुटाने तक सीमित नहीं है। इसके साथ यदि प्रस्तावित स्किल सेंटर प्रभावी तरीके से विकसित होते हैं, तो यूपी के युवाओं को जापानी कंपनियों की जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षण मिलने की उम्मीद है। इससे रोजगार की तैयारी और उद्योग की जरूरत के बीच मौजूद अंतर को कम करने में मदद मिल सकती है।
उत्तर प्रदेश सरकार के लिए यह पहल राज्य को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के साथ-साथ युवाओं को वैश्विक रोजगार बाजार से जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।








