लखनऊ (Thu, 30 Oct 2025)। UP Weather Update: उत्तर प्रदेश में फिलहाल मौसम स्थिर रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले तीन दिनों तक राज्य में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है, हालांकि पिछले दिनों हुई बारिश ने फसलों पर असर डाला है।
धान की कटाई के बाद अब किसान रबी सीजन की मुख्य फसल गेहूं की बोआई की तैयारी में जुटे हैं, लेकिन बारिश के चलते बोआई में देरी देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि देर से बोआई करने पर गेहूं की फसल में रोग और कीट प्रकोप का खतरा बढ़ जाता है।
कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे 5 से 10 नवंबर के बीच हर हाल में गेहूं की बोआई पूरी कर लें, ताकि उत्पादन प्रभावित न हो।
🌾 धान कटाई के बाद खेत की तैयारी पर जोर
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के बाद कई खेतों में पानी भर गया है, जिससे धान की फसल सड़ने का खतरा बढ़ गया है।
कृषि विभाग के गंगा सेल के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. सी.पी. श्रीवास्तव ने बताया —
“असमय हुई यह बारिश धान की कटाई पर सबसे ज्यादा असर डाल रही है। खेतों में भरा पानी निकालना बेहद जरूरी है ताकि मिट्टी की नमी नियंत्रित रहे और नई फसल की तैयारी ठीक से हो सके।”
उन्होंने कहा कि किसान धान की पराली जलाने के बजाय उसे खेत में जोतकर खाद के रूप में उपयोग करें। यह न केवल मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है बल्कि पर्यावरण को भी बचाता है।
🌱 बीज चयन में बरतें सावधानी
डॉ. श्रीवास्तव ने किसानों से अपील की कि वे समय के अनुरूप शोधित और प्रमाणित बीजों का ही चयन करें।
अगर किसी कारणवश बोआई 15 नवंबर के बाद करनी पड़े, तो लेट प्रजाति का बीज इस्तेमाल करें, ताकि फसल पर मौसम का प्रतिकूल असर कम पड़े।
उन्होंने कहा कि गेहूं के खेतों में पिछले वर्ष के खतपतवार (मामा) के बीज गिर गए होंगे, जो दोबारा उग सकते हैं। ऐसे में किसान खेत बदलकर सरसों या दलहन की फसल लें तो बेहतर रहेगा।
🥔 आलू और दलहन फसल के लिए जरूरी सावधानियाँ
बारिश के चलते कई खेतों में आलू, दलहन और तिलहन फसलों की बोआई के बाद पानी भर गया है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि किसान खेतों से पानी तुरंत निकालें, ताकि बीज सड़ने से बच सके।
बारिश की वजह से आलू की देर से बोआई पर रोग का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए नमी नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है।
🥬 इस समय इन सब्जियों की खेती लाभकारी
मौजूदा मौसम में किसान कद्दू, लौकी, बैंगन, पत्ता गोभी, फूल गोभी, टमाटर, मिर्च, गाजर और चुकंदर की खेती कर सकते हैं।
जो किसान पहले से नर्सरी तैयार कर चुके हैं, वे अब रोपाई का कार्य शुरू कर सकते हैं।
🌿 पराली न जलाएं, खाद बनाएं
विशेषज्ञों ने किसानों को चेतावनी दी है कि पराली जलाना न केवल पर्यावरण के लिए नुकसानदेह है, बल्कि मिट्टी की उपजाऊ क्षमता भी घटाता है।
बारिश की स्थिति में पराली खुद सड़कर प्राकृतिक खाद (ऑर्गैनिक मैन्योर) में बदल जाती है।
डॉ. श्रीवास्तव के अनुसार,
“अगर किसान लगातार तीन साल तक खेत में गोबर और जैविक खाद का प्रयोग करें, तो जीरो लागत में भी भरपूर उत्पादन संभव है। इसके लिए कम से कम एक देसी गाय का होना लाभकारी है।”
🌤️ संक्षेप में मौसम की स्थिति
- अगले तीन दिनों तक मौसम में कोई बड़ा बदलाव नहीं
- बारिश की संभावना बहुत कम
- दिन का तापमान सामान्य, रातें हल्की ठंडी
- खेतों में पानी भराव की समस्या कुछ जिलों में बनी हुई










