नई दिल्ली/24 सितंबर 2026: यूपीआई भुगतान को लेकर कारोबारियों और ग्राहकों के बीच चल रही चर्चाओं के बीच सरकार ने स्थिति साफ करने की पहल की है। UPI MDR को लेकर वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी जल्द ही खुदरा कारोबारी संगठनों के साथ बैठक कर सकते हैं। सरकार का जोर इस बात पर है कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का बोझ सीधे ग्राहकों पर न डाला जाए।
15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI भुगतान, जिनकी राशि 2,000 रुपये से अधिक है, पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। हालांकि, यह शुल्क ग्राहक से वसूलने के लिए नहीं है। 75,000 रुपये या उससे अधिक के ऐसे लेनदेन पर MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन रखी गई है।
UPI MDR को लेकर कारोबारियों से होगी बैठक
सरकारी सूत्रों के अनुसार वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी अगले कुछ दिनों में कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) सहित अन्य कारोबारी संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर सकते हैं। मकसद कारोबारियों की आशंकाओं को दूर करना और यह सुनिश्चित करना है कि MDR को ग्राहकों पर अलग से शुल्क के रूप में न डाला जाए।
यह मुद्दा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि कुछ कारोबारी संगठनों ने 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर आने वाले खर्च को ग्राहकों से वसूलने की बात कही है। दूसरी ओर, वित्त मंत्रालय और भुगतान व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि ग्राहक से MDR वसूलने की अनुमति नहीं होगी।
IBA चलाएगा जागरूकता अभियान
MDR को लेकर बाजार में भ्रम की स्थिति को देखते हुए इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) के स्तर पर भी जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी है। इसका उद्देश्य दुकानदारों और ग्राहकों को नए नियमों की सही जानकारी देना है।
कुछ जगहों से ऐसे मामले सामने आए हैं जहां कारोबारियों ने MDR का हवाला देते हुए UPI भुगतान स्वीकार करने से इनकार किया है। ऐसे मामलों ने रोजमर्रा के डिजिटल भुगतान को लेकर ग्राहकों की चिंता बढ़ाई है।
UPI पर टैक्स, सेस या सरचार्ज नहीं
वित्त मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार MDR को सरकार द्वारा लगाया गया टैक्स, सेस या सरचार्ज नहीं माना जाना चाहिए। यह भुगतान प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न हिस्सेदारों के बीच वितरित होने वाला शुल्क है। सरकार को इस 0.4 प्रतिशत MDR से कोई हिस्सा नहीं मिलने की बात भी सामने आई है।
MDR का उद्देश्य भुगतान स्वीकार करने वाले कारोबारी और भुगतान व्यवस्था में शामिल संस्थाओं के बीच लागत का बंटवारा करना है। इसलिए इसे सीधे सरकारी कर के रूप में देखना सही नहीं होगा।
0.4 प्रतिशत MDR का पैसा कहां जाएगा?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार 2,000 रुपये से अधिक के पात्र P2M UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। यह राशि भुगतान व्यवस्था में शामिल अलग-अलग संस्थाओं के बीच बांटी जाएगी। इसमें बैंक, मर्चेंट बैंक/पेमेंट गेटवे, UPI ऐप और स्पॉन्सर बैंक जैसे हिस्सेदार शामिल हैं।
उदाहरण के तौर पर 10,000 रुपये के पात्र UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR की गणना करने पर शुल्क 40 रुपये बनता है। हालांकि, यह शुल्क ग्राहक द्वारा अलग से भुगतान किए जाने वाला UPI चार्ज नहीं है।
MDR पर 18 प्रतिशत GST का क्या होगा?
MDR पर 18 प्रतिशत GST को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार GST MDR की राशि पर लागू होगा, न कि पूरे UPI भुगतान पर। मसलन, 10,000 रुपये के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR यानी 40 रुपये बनता है तो 18 प्रतिशत GST 40 रुपये की MDR राशि पर लगेगा, पूरे 10,000 रुपये पर नहीं।
GST-पंजीकृत कारोबारी लागू नियमों के तहत इस GST का इनपुट टैक्स क्रेडिट ले सकते हैं। वहीं छोटे या अपंजीकृत कारोबारियों से जुड़े कुछ मामलों को लेकर आगे स्पष्टीकरण की जरूरत पड़ सकती है। इस तरह के मुद्दों पर GST काउंसिल विचार कर सकती है।
किन UPI भुगतानों पर MDR नहीं लगेगा?
नए ढांचे में हर UPI भुगतान पर शुल्क नहीं लगाया जा रहा है। खास तौर पर P2P यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले UPI भुगतान पर राशि कितनी भी हो, MDR लागू नहीं होगा। 2,000 रुपये तक के पात्र P2M भुगतान भी MDR से बाहर रहेंगे।
इसके अलावा छोटे कारोबारियों के लिए भी अलग प्रावधान हैं। इसलिए 15 अक्टूबर से UPI के हर भुगतान पर शुल्क लगने की धारणा सही नहीं है।
पेट्रोल पंपों पर भी दिख रहा असर
UPI MDR को लेकर पेट्रोल पंप संचालकों की ओर से भी चिंता जताई गई है। कुछ स्थानों पर UPI भुगतान स्वीकार न करने की खबरें सामने आई हैं। सरकारी सूत्रों के मुताबिक पेट्रोल पंपों का अपना मार्जिन संबंधी मुद्दा पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियों और डीलरों के बीच का विषय है।
सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि MDR को इस मुद्दे से जोड़कर देखने के बजाय दोनों विषयों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
ग्राहकों को कितना भुगतान करना होगा?
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा 2,000 रुपये से अधिक के P2M UPI भुगतान पर MDR लागू होने के बावजूद ग्राहक से यह शुल्क सीधे नहीं लिया जाना है। MDR की जिम्मेदारी संबंधित मर्चेंट/भुगतान व्यवस्था पर है। बैंकों को भी यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है कि इसका बोझ ग्राहकों पर न डाला जाए।
यानी बाजार में UPI को लेकर जो यह चर्चा है कि हर बड़े भुगतान पर ग्राहक से अलग से UPI टैक्स या सरचार्ज लिया जाएगा, मौजूदा नियम उस धारणा की पुष्टि नहीं करते। हालांकि MDR पर GST और कुछ विशेष श्रेणियों के लेनदेन के नियमों को लेकर आगे आने वाली आधिकारिक स्पष्टताओं पर नजर रखना जरूरी होगा।












