नई दिल्ली/21 सितंबर 2026। देश में डिजिटल भुगतान की तस्वीर बदलने वाले UPI शुल्क को लेकर अब नई बहस शुरू हो गई है। 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) भुगतान पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होना है। हालांकि, यह शुल्क ग्राहकों से सीधे नहीं लिया जाएगा और व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) भुगतान पहले की तरह मुफ्त रहेगा।
इसी बीच नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने सरकार से कुछ और वर्षों तक UPI पर जीरो फीस व्यवस्था जारी रखने की बात कही है। PTI से बातचीत में उन्होंने कहा कि UPI को सार्वजनिक सुविधा के रूप में देखा जाना चाहिए और फिलहाल व्यापारियों से किसी भी मूल्य के लेनदेन पर शुल्क लगाने से बचना चाहिए।
UPI शुल्क अभी नहीं लगाने के पक्ष में क्या तर्क है?
राजीव कुमार के मुताबिक, UPI के व्यापक आर्थिक फायदे उसके डिजिटल भुगतान ढांचे को बनाए रखने पर आने वाली अनुमानित लागत से काफी अधिक हैं। उन्होंने करीब 20,000 करोड़ रुपये की सरकारी लागत का उल्लेख करते हुए कहा कि कम से कम कुछ वर्षों तक जीरो फीस व्यवस्था जारी रखी जा सकती है।
उनका सुझाव है कि आगे चलकर मुद्रा-जीडीपी अनुपात में गिरावट की स्पष्ट और टिकाऊ प्रवृत्ति दिखाई दे, तब शुल्क व्यवस्था की समीक्षा की जा सकती है। यानी उनके तर्क का केंद्र यह है कि डिजिटल भुगतान को अभी और मजबूत आधार मिलने दिया जाए।
2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर क्यों है चिंता?
राजीव कुमार ने UPI के लेनदेन की संख्या और कुल मूल्य के बीच अंतर की ओर ध्यान दिलाया है। उनके अनुसार, करीब 96 प्रतिशत UPI लेनदेन संख्या के लिहाज से 2,000 रुपये से कम हैं, जबकि करीब 66 प्रतिशत लेनदेन का कुल मूल्य 2,000 रुपये से अधिक वाले भुगतान से आता है।
ऐसे में उनका मानना है कि बड़े व्यापारी भुगतानों पर छोटा-सा शुल्क भी कुछ कारोबारियों या ग्राहकों को नकद भुगतान की ओर वापस जाने के लिए प्रेरित कर सकता है। यह उनका आर्थिक आकलन है; वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि व्यापारी इस लागत को किस तरह संभालते हैं और उपभोक्ताओं के भुगतान व्यवहार में कितना बदलाव आता है।
15 अक्टूबर से UPI पर क्या बदलेगा?
सरकार के नए ढांचे के तहत 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के निर्दिष्ट P2M UPI लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। 75,000 रुपये या उससे अधिक के लेनदेन के लिए MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन रखी गई है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि यह ग्राहक से लिया जाने वाला UPI ट्रांजैक्शन चार्ज नहीं है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, MDR भुगतान व्यवस्था से जुड़े बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं और UPI ऐप प्रदाताओं के बीच वितरित किया जाएगा। बैंकों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि व्यापारी यह शुल्क ग्राहक से न वसूलें।
P2P भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेगा, चाहे राशि कितनी भी हो। वहीं 2,000 रुपये तक के व्यापारी भुगतान भी MDR से बाहर रहेंगे। छोटे व्यापारी, जो निर्धारित P2PM श्रेणी में UPI QR के जरिए महीने में 1 लाख रुपये तक प्राप्त करते हैं, उनके लिए भी जीरो MDR व्यवस्था जारी रहेगी।
सरकार के मुताबिक, करीब 96 प्रतिशत P2M लेनदेन इस नए MDR से प्रभावित नहीं होंगे।
रेलवे, ईंधन और अन्य जरूरी सेवाओं के लिए अलग नियम
नए ढांचे में कम मार्जिन वाले कुछ जरूरी क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था की गई है। रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि संबंधी इनपुट जैसे क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान पर 5 रुपये का फ्लैट MDR लागू होगा। वहीं पूंजी बाजार से जुड़े कुछ UPI भुगतानों पर 0.02 प्रतिशत MDR, अधिकतम 300 रुपये तक, निर्धारित किया गया है।
सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य UPI के संचालन और विस्तार के लिए भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र को टिकाऊ बनाना है, जबकि आम लोगों और छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ सीमित रखा जाए। नए ढांचे में MDR संग्रह का 5 प्रतिशत छोटे व्यापारियों के बीच UPI के इस्तेमाल को बढ़ावा देने वाले फंड में देने का भी प्रावधान है।
UPI शुल्क पर सरकार और राजीव कुमार के तर्क में क्या अंतर है?
यहां मूल अंतर शुल्क लगाने के समय और उसके संभावित प्रभाव को लेकर है। सरकार का कहना है कि बड़े व्यापारी भुगतानों पर सीमित MDR से UPI के बुनियादी ढांचे और भुगतान तंत्र की दीर्घकालिक स्थिरता को समर्थन मिलेगा। दूसरी ओर, राजीव कुमार का तर्क है कि UPI से होने वाले व्यापक आर्थिक लाभ को देखते हुए कुछ और वर्षों तक इसे पूरी तरह जीरो फीस व्यवस्था में रखना चाहिए।
इस बहस का एक अहम पहलू यह भी है कि UPI पूरी तरह शुल्कयुक्त नहीं हो रहा है। आम व्यक्ति का दूसरे व्यक्ति को पैसा भेजना मुफ्त रहेगा और 2,000 रुपये तक के व्यापारी भुगतान भी शुल्क से बाहर हैं। बदलाव मुख्य रूप से निर्धारित बड़े P2M लेनदेन से संबंधित है।
क्या ग्राहक को UPI भुगतान पर पैसा देना होगा?
मौजूदा सरकारी ढांचे के अनुसार ग्राहक से MDR नहीं लिया जाना है। 2,000 रुपये से अधिक के पात्र व्यापारी भुगतान पर लागू 0.4 प्रतिशत MDR भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के भीतर व्यापारी पक्ष पर लागू होगा। बैंकों को इसे ग्राहकों पर डालने से रोकने के निर्देश दिए गए हैं।













