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Urban Cooperative Banks Expansion: दो लाख से ज्यादा आबादी वाले कस्बों में खुलेंगे सहकारी बैंक, अमित शाह ने लॉन्च किया ‘सहकार डिजी-पे’

On: November 10, 2025
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Urban Cooperative Banks Expansion: दो लाख से ज्यादा आबादी वाले कस्बों में खुलेंगे सहकारी बैंक
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नई दिल्ली, 10 नवंबर 2025 — भारत की सहकारिता (Cooperation) प्रणाली अब गांवों की सीमाओं से निकलकर शहरों के आर्थिक ढांचे में नई ऊर्जा भरने जा रही है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को राजधानी दिल्ली में आयोजित ‘को-ऑप कुंभ’ (Co-op Kumbh) के उद्घाटन के दौरान देशभर के दो लाख से अधिक आबादी वाले सभी कस्बों में Urban Cooperative Banks खोलने की घोषणा की।
उनके मुताबिक, आने वाले पांच वर्षों में हर बड़े शहर में कम से कम एक सहकारी बैंक स्थापित होगा, जो स्थानीय व्यापार, युवाओं और छोटे उद्यमियों को नई आर्थिक दिशा देगा।

🌆 “सहकारिता कोई सरकारी योजना नहीं, समाज की आत्मा है”

अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि “सहकारिता सिर्फ एक व्यवस्था नहीं, बल्कि समाज की आत्मा (soul of society) है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल आर्थिक सुधार का प्रयास नहीं बल्कि एक सामाजिक आंदोलन है — जो पारदर्शिता, अनुशासन और तकनीक से मिलकर नया विकास मॉडल तैयार करेगा।
शाह ने कहा, “जब सहकारिता तकनीकी रूप से सक्षम और वित्तीय रूप से पारदर्शी होगी, तब ही यह आत्मनिर्भर भारत के विजन को मजबूत करेगी।”

💳 डिजिटल पेमेंट की दिशा में बड़ा कदम

इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में अमित शाह ने दो नए मोबाइल ऐप — ‘सहकार डिजी-पे’ (Sahkar Digi-Pay) और ‘सहकार डिजी-लोन’ (Sahkar Digi-Loan) — को लॉन्च किया।
उन्होंने कहा कि कैशलेस अर्थव्यवस्था (Cashless Economy) की ओर बढ़ते भारत के लिए डिजिटल भुगतान अब विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता है।
शाह के अनुसार, अगले दो वर्षों में 1,500 Urban Cooperative Banks को इन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार सहकारी बैंकों की तकनीकी सुदृढ़ता और वित्तीय अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।
बीते दो वर्षों में इन बैंकों की वित्तीय स्थिति में सुधार आया है — जहां पहले NPA (Non-Performing Assets) 2.8 प्रतिशत थी, वहीं अब यह घटकर सिर्फ 0.6 प्रतिशत रह गई है।
यह सुधार बताता है कि सहकारिता अब भरोसे की नई अर्थव्यवस्था बन रही है।

🏦 “NEFSCUB को क्षेत्रीय असमानता घटाने की जिम्मेदारी”

अमित शाह ने राष्ट्रीय शहरी सहकारी बैंक एवं ऋण समितियों महासंघ (NEFSCUB) से कहा कि वह छोटे शहरों तक बैंकिंग सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और क्षेत्रीय असमानताओं को खत्म करने पर ध्यान केंद्रित करे।
उन्होंने बताया कि सहकारिता राज्यों का विषय होने के बावजूद, केंद्र सरकार ने नीतिगत मार्गदर्शन देकर इसे एकरूप बनाने का काम किया है।
अब प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) के मॉडल लगभग सभी राज्यों में लागू हो चुके हैं, जिससे उनके कंप्यूटरीकरण और सेवाओं के डिजिटलीकरण का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

🐄 अमूल और इफको: भारत की सहकारिता की पहचान

अपने भाषण में शाह ने भारत की दो प्रमुख सहकारी संस्थाओं — अमूल (Amul) और इफको (IFFCO) — की वैश्विक उपलब्धियों का विशेष उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहकारी संघ (ICA) ने अमूल को विश्व की नंबर-1 और इफको को नंबर-2 सहकारी संस्था का दर्जा दिया है।
यह इस बात का प्रमाण है कि भारत का सहकारी मॉडल (Cooperative Model) आज भी विश्व स्तर पर प्रासंगिक (Relevant) और प्रभावशाली (Impactful) है।

अमूल वर्तमान में 36 लाख किसानों से जुड़कर रोजाना 3 करोड़ लीटर दूध एकत्र करती है और उसका वार्षिक टर्नओवर 90,000 करोड़ रुपये से अधिक है।
वहीं इफको (Indian Farmers Fertiliser Cooperative) ने 93 लाख टन यूरिया और डीएपी (DAP) का उत्पादन किया है और अब अपने नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का निर्यात अमेरिका, ब्राज़ील, ओमान और जॉर्डन समेत 40 देशों में कर रही है।

🌱 युवाओं को सहकारिता आंदोलन से जोड़ना अगला लक्ष्य

अमित शाह ने स्पष्ट कहा कि सरकार का अगला लक्ष्य युवाओं को सहकारिता आंदोलन (Cooperative Movement) से जोड़ना है।
उनके अनुसार, “जब युवा इस क्षेत्र में आएंगे तो नई सोच, तकनीकी नवाचार और डिजिटल पारदर्शिता सहकारिता के ढांचे को भविष्य की अर्थव्यवस्था में बदल देगी।”

🔚 निष्कर्ष (Conclusion):

‘को-ऑप कुंभ’ से निकला संदेश साफ है — भारत अब सहकारिता को गांव की सीमा से निकालकर Urban Cooperative Banks के ज़रिए शहरों के विकास मॉडल में शामिल करने जा रहा है।
यह कदम न केवल वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) की दिशा में अहम साबित होगा, बल्कि स्थानीय उद्यमों और युवाओं के लिए आत्मनिर्भरता का नया अध्याय भी खोलेगा।

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