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घरौनी: यूपी में 1 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण परिवारों को मिला संपत्ति पर मालिकाना हक

On: January 30, 2026
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घरौनी - यूपी में 1 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण परिवारों को
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लखनऊ, 30 जनवरी 2026। गांवों में पीढ़ियों से खड़ी झोपड़ियाँ, पक्के मकान और आँगन अब सिर्फ रहने की जगह नहीं रहे—वे कानूनी पहचान पा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लागू स्वामित्व योजना के तहत अब तक एक करोड़ से अधिक ‘घरौनी’ ग्रामीण परिवारों को वितरित की जा चुकी हैं। यह दस्तावेज ग्रामीणों के लिए उनकी संपत्ति का वैधानिक प्रमाण बनकर उभरा है—एक ऐसा कागज़, जो दशकों पुराने विवादों को सुलझाने और आर्थिक आत्मनिर्भरता की राह खोलने में मदद कर रहा है।

सरकार के अनुसार, इस पहल ने न केवल स्वामित्व का भरोसा दिया है, बल्कि बैंकिंग, ऋण और सरकारी योजनाओं तक पहुंच भी आसान की है। गांवों में अब “मेरा घर” एक भावनात्मक कथन भर नहीं, बल्कि कानूनी रूप से मान्य सत्य बन रहा है।

घरौनी से मिला कानूनी स्वामित्व का आधार

स्वामित्व योजना के अंतर्गत आबादी भूमि पर बसे परिवारों को प्रपत्र-10 (डिजिटाइज्ड) जारी किए जा रहे हैं। प्रदेश के 72,961 ग्रामों में यह दस्तावेज उपलब्ध कराया जा चुका है, जो सर्वे योग्य ग्रामों का लगभग 80.59% है। पहली बार ग्रामीण परिवारों के पास अपने घर और जमीन का स्पष्ट, डिजिटल और विधिक रिकॉर्ड है।

यह रिकॉर्ड अब बैंक ऋण, सरकारी अनुदान, बीमा, और अन्य वित्तीय सेवाओं के लिए मान्य दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जा रहा है। इससे पहले, अस्पष्ट कागज़ात और मौखिक दावों के कारण ग्रामीण अक्सर औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से बाहर रह जाते थे।

घरौनी बनी आर्थिक सशक्तिकरण की कुंजी

राजस्व विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक 1,14,43,688 घरौनियां तैयार की जा चुकी हैं, जिनमें से 1,01,31,232 घरौनियों का वितरण किया जा चुका है। यह सिर्फ एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव का संकेत है।

घरौनी मिलने के बाद:

  • ग्रामीण बैंक से औपचारिक ऋण ले पा रहे हैं
  • स्वरोजगार और छोटे व्यवसाय शुरू कर रहे हैं
  • सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है

गांवों में अब यह दस्तावेज “सम्मान पत्र” की तरह देखा जा रहा है, जो मालिकाना हक का प्रमाण देता है।

भूमि विवादों में कमी, प्रशासनिक पारदर्शिता में वृद्धि

स्पष्ट डिजिटल रिकॉर्ड और सीमांकन के कारण गांवों में मकान व जमीन से जुड़े विवादों में उल्लेखनीय कमी आई है। फर्जी दावों, अवैध कब्जों और पारिवारिक विवादों पर प्रभावी रोक लगी है। इससे स्थानीय प्रशासन पर दबाव घटा है और न्यायालयों में लंबित मामलों में कमी आने की उम्मीद जगी है।

ग्रामीण स्तर पर शांति, भरोसा और पारदर्शिता बढ़ना इस योजना की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

वितरण प्रक्रिया जारी, नए परिवार जुड़ रहे

18 जनवरी 2025 के बाद 13,12,456 नई घरौनियां तैयार की गई हैं, जिनका वितरण चरणबद्ध तरीके से जारी है। सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र ग्रामीण परिवार इस योजना से वंचित न रहे।

ड्रोन तकनीक से सटीक सर्वे, डिजिटल रिकॉर्ड की मजबूती

प्रदेश के 1,10,344 अधिसूचित ग्रामों में से 90,530 ग्राम ऐसे हैं, जहां ड्रोन सर्वे तकनीकी रूप से संभव है। आधुनिक ड्रोन मैपिंग से सटीक सीमांकन कर डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किए जा रहे हैं। यह प्रक्रिया भविष्य में ग्रामीण भूमि प्रबंधन को अधिक पारदर्शी और विवाद-मुक्त बनाने की दिशा में अहम मानी जा रही है।

सुशासन की दिशा में ठोस कदम

घरौनी वितरण केवल एक योजना का क्रियान्वयन नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के लिए प्रशासनिक सोच में बदलाव का उदाहरण बन रहा है। स्पष्ट स्वामित्व, डिजिटल रिकॉर्ड, वित्तीय पहुंच और विवादों में कमी—इन सबका संयुक्त प्रभाव गांवों की सामाजिक-आर्थिक संरचना पर दिखने लगा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह प्रक्रिया इसी गति से आगे बढ़ती रही, तो उत्तर प्रदेश भूमि सुधार और ग्रामीण सशक्तिकरण के मॉडल के रूप में देश के अन्य राज्यों के लिए उदाहरण बन सकता है।

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