लखनऊ/ 09 जून 2026: उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को राजधानी लखनऊ में महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट गंगा का शुभारंभ किया। इस परियोजना का उद्देश्य गांवों तक हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड इंटरनेट, डिजिटल शिक्षा, टेलीमेडिसिन, ई-गवर्नेंस और स्मार्ट कृषि जैसी आधुनिक सुविधाएं पहुंचाना है।
सरकार का मानना है कि यह पहल ग्रामीण उत्तर प्रदेश को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आने वाले वर्षों में यह परियोजना प्रदेश के लाखों लोगों के जीवन और रोजगार के अवसरों में बदलाव ला सकती है।
प्रोजेक्ट गंगा से 20 लाख परिवारों को मिलेगा सीधा लाभ
प्रोजेक्ट गंगा के पहले चरण की शुरुआत 21 जिलों से की गई है। सरकार का लक्ष्य इस चरण के माध्यम से करीब 20 लाख परिवारों को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ना है। इसके साथ ही आठ से 10 हजार डिजिटल सेवा प्रदाताओं के जरिए एक लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करने की योजना बनाई गई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्तमान समय में इंटरनेट कनेक्टिविटी भी बिजली, सड़क और पानी की तरह बुनियादी जरूरत बन चुकी है। उनका कहना था कि जिस क्षेत्र में इंटरनेट की पहुंच और गति बेहतर होगी, वहां विकास की संभावनाएं भी उतनी ही तेज़ी से बढ़ेंगी।
डिजिटल इंडिया विजन को मजबूती देगा प्रोजेक्ट गंगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रोजेक्ट गंगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान को गांवों तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। फिलहाल 21 जिलों में शुरू हुई यह योजना भविष्य में उत्तर प्रदेश की सभी 57 हजार ग्राम पंचायतों और लगभग आठ हजार न्याय पंचायतों तक विस्तारित की जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस परियोजना का मकसद केवल इंटरनेट उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि युवाओं को डिजिटल अर्थव्यवस्था का सक्रिय भागीदार बनाना भी है। इसके जरिए स्वरोजगार और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा।
युवाओं को मिलेगा डिजिटल उद्यमी बनने का अवसर
परियोजना में निजी क्षेत्र की भागीदारी भी शामिल की गई है। मुख्यमंत्री ने हिंदुजा समूह के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि चयनित युवाओं को डिजिटल सेवा प्रदाता (डीएसपी) के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। ये युवा अपने-अपने क्षेत्रों में ब्रॉडबैंड नेटवर्क स्थापित कर डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराएंगे।
स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के चेयरमैन मनोज कुमार सिंह के अनुसार, यह मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल उद्यमिता का नया अध्याय साबित हो सकता है। स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित युवा इंटरनेट सेवाओं के साथ-साथ विभिन्न डिजिटल सुविधाएं भी उपलब्ध कराएंगे।
डिजिटल शिक्षा से लेकर टेलीमेडिसिन तक मिलेंगी कई सुविधाएं
प्रोजेक्ट गंगा के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल शिक्षा, टेलीमेडिसिन, ऑनलाइन कौशल प्रशिक्षण, ई-गवर्नेंस सेवाएं, साइबर सुरक्षा जागरूकता, सार्वजनिक वाई-फाई, स्मार्ट कृषि समाधान और आईटी आधारित रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।
वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि तकनीक तक आसान पहुंच सामाजिक और आर्थिक बदलाव की सबसे बड़ी ताकत है। वहीं आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने इसे प्रदेश के डिजिटल भविष्य की मजबूत नींव बताया।
डिजिटल सेवा प्रदाता बनने के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू
परियोजना के तहत डिजिटल सेवा प्रदाता बनने के इच्छुक युवा ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। अधिकारियों के अनुसार, न्याय पंचायत स्तर पर डीएसपी नियुक्त किए जाएंगे। चयनित उम्मीदवारों में 50 प्रतिशत महिलाओं को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है।
हिंदुजा समूह की सहयोगी कंपनी वनओटीटी एंटरटेनमेंट लिमिटेड चयनित युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान करेगी। एक डिजिटल सेवा प्रदाता को लगभग 5.53 लाख रुपये का निवेश करना होगा। इसमें पांच लाख रुपये मुख्यमंत्री युवा योजना के माध्यम से उपलब्ध कराए जाएंगे, जबकि युवाओं को करीब 50 हजार रुपये की मार्जिन मनी स्वयं लगानी होगी।
इंटरनेट सेवा से हर महीने हो सकती है अच्छी कमाई
अधिकारियों के अनुसार, यदि किसी डिजिटल सेवा प्रदाता के पास 250 से 300 इंटरनेट कनेक्शन हो जाते हैं, तो उसकी मासिक आय 20 हजार रुपये से अधिक हो सकती है। कनेक्शनों की संख्या बढ़ने पर यह आय एक लाख रुपये प्रतिमाह तक पहुंच सकती है।
ग्रामीण उपभोक्ताओं को 299 रुपये से 400 रुपये प्रति माह के बीच हाई-स्पीड इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराने की योजना है। सरकार को उम्मीद है कि प्रोजेक्ट गंगा डिजिटल सुविधाओं को गांवों तक पहुंचाकर उत्तर प्रदेश के ग्रामीण विकास को नई गति देगा।








