लखनऊ, 20 फरवरी 2026 (शुक्रवार): उत्तर प्रदेश की आर्थिक तस्वीर में आए बदलाव को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट पर चर्चा के दौरान बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश ने बॉटम-3 राज्यों की श्रेणी से निकलकर देश के टॉप-3 राज्यों में अपनी जगह बनाई है। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह परिवर्तन किसी संयोग का परिणाम नहीं, बल्कि स्पष्ट नीति, शुद्ध नीयत और मजबूत वित्तीय अनुशासन का प्रतिफल है।
सदन में बजट पर चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ₹9,12,696 करोड़ के बजट को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी मुख्यमंत्री को लगातार दसवीं बार बजट प्रस्तुत करने का अवसर मिला है। विपक्ष द्वारा वित्तीय स्वीकृतियों को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी स्वीकृतियां समयबद्ध तरीके से जारी की जाती हैं और व्यय प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखी गई है।
राजकोषीय अनुशासन के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने विपक्ष को आईना दिखाते हुए कहा कि वर्ष 2016-17 में प्रदेश का राजकोषीय घाटा सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का 4.39 प्रतिशत था, जो वर्ष 2025-26 में घटकर 2.97 प्रतिशत रह गया है। उन्होंने बताया कि राज्य की ऋणग्रस्तता भी लगभग 30 प्रतिशत से घटकर 26 प्रतिशत के आसपास आ चुकी है और वित्तीय वर्ष 2026-27 तक इसे 23 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय में हुए सुधार का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, वर्ष 2016-17 में जहां प्रति व्यक्ति आय लगभग ₹43,000 थी, वहीं वर्ष 2024-25 के अंत तक यह बढ़कर ₹1,20,000 से अधिक हो चुकी है। उन्होंने कहा कि यह आंकड़े उत्तर प्रदेश की आर्थिक मजबूती और विकास की तेज रफ्तार को दर्शाते हैं।
जीएसडीपी के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2016-17 में प्रदेश की अर्थव्यवस्था का आकार लगभग ₹13 लाख करोड़ था, जो अब बढ़कर ₹36 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में इसे ₹40 लाख करोड़ के पार ले जाने का लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य प्रदेश को ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि प्रदेश में कैपिटल एक्सपेंडिचर को प्राथमिकता दी गई है। वर्ष 2016-17 में पूंजीगत व्यय लगभग ₹71,000 करोड़ था, जो अब बढ़कर ₹1,77,000 करोड़ से अधिक हो चुका है। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे में किया गया निवेश केवल सड़क या भवन निर्माण तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे रोजगार सृजन, औद्योगिक विस्तार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इंफ्रास्ट्रक्चर में लगाया गया एक रुपये का निवेश पांच से छह गुना तक प्रतिफल देने की क्षमता रखता है।
सत्र के संचालन को लेकर मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि दो सप्ताह तक चले बजट सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण से लेकर विभिन्न नियमों के अंतर्गत उठाए गए विषयों और बजट पर विस्तृत चर्चा तक, सभी मुद्दों पर सार्थक विमर्श हुआ। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पाण्डेय और वरिष्ठ सदस्य शिवपाल सिंह यादव सहित सभी सदस्यों के सुझावों की सराहना की और कहा कि संवाद ही लोकतंत्र में समाधान का सबसे प्रभावी माध्यम है।








