नई दिल्ली (Sun, 15 Mar 2026)। देश के विभिन्न राज्यों की राजनीति एक बार फिर चुनावी हलचल से गर्म होने जा रही है। विधानसभा उपचुनाव 2026 के तहत पांच राज्यों की कुल आठ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव कराने की घोषणा कर दी गई है। चुनाव आयोग ने रविवार को इसकी औपचारिक जानकारी दी और बताया कि मतदान दो चरणों में कराया जाएगा, जबकि सभी सीटों की मतगणना एक ही दिन की जाएगी।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इन सीटों पर उपचुनाव इसलिए कराए जा रहे हैं क्योंकि संबंधित क्षेत्रों के मौजूदा विधायकों का निधन हो गया था। लोकतांत्रिक प्रक्रिया को निरंतर बनाए रखने के लिए इन रिक्त सीटों पर जल्द चुनाव कराने का निर्णय लिया गया है।
चुनाव आयोग के मुताबिक, कुछ राज्यों में मतदान 9 अप्रैल 2026 को होगा, जबकि बाकी सीटों पर 23 अप्रैल 2026 को वोट डाले जाएंगे। इसके बाद सभी सीटों की मतगणना 4 मई 2026 को की जाएगी और उसी दिन परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।
विधानसभा उपचुनाव 2026: किन राज्यों की सीटों पर होगा मतदान
चुनाव आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, पहले चरण में गोवा, कर्नाटक, नागालैंड और त्रिपुरा की पांच विधानसभा सीटों पर मतदान कराया जाएगा। इन सीटों में गोवा की पोंडा, कर्नाटक की बागलकोट और दावणगेरे साउथ, नागालैंड की कोरिडांग तथा त्रिपुरा की धर्मनगर विधानसभा सीट शामिल हैं।
इन सभी सीटों पर 9 अप्रैल 2026 को मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। राजनीतिक दलों ने भी इन क्षेत्रों में अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं और स्थानीय स्तर पर चुनावी गतिविधियां बढ़ने लगी हैं।
गुजरात और महाराष्ट्र की सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग
दूसरे चरण में गुजरात और महाराष्ट्र की तीन सीटों पर मतदान कराया जाएगा। चुनाव आयोग के अनुसार गुजरात की उमरेठ विधानसभा सीट पर उपचुनाव होगा। वहीं महाराष्ट्र की राहुरी और बारामती विधानसभा सीट पर भी मतदाता 23 अप्रैल को वोट डालेंगे।
इन सीटों पर भी चुनावी सरगर्मी धीरे-धीरे बढ़ने लगी है और प्रमुख राजनीतिक दल उम्मीदवारों के चयन और प्रचार रणनीति पर काम कर रहे हैं।
4 मई को आएंगे सभी सीटों के नतीजे
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि विधानसभा उपचुनाव 2026 की सभी आठ सीटों की मतगणना 4 मई 2026 को की जाएगी। उसी दिन परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।
दिलचस्प बात यह है कि इसी तारीख को देश के कुछ अन्य राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों की मतगणना भी प्रस्तावित है। ऐसे में 4 मई को राजनीतिक नजरें एक साथ कई राज्यों के चुनावी नतीजों पर टिकी रहेंगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भले ही यह उपचुनाव सीमित सीटों के लिए हो, लेकिन इसके परिणाम आने वाले समय की राजनीतिक दिशा और दलों की जनस्वीकृति का संकेत भी दे सकते हैं।












