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योगी सरकार में अपराधियों पर शिकंजा, 23,601 इनामी गिरफ्तार; 15,233 करोड़ की संपत्ति जब्त

On: October 3, 2026
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योगी सरकार में अपराधियों पर शिकंजा, 23601 इनामी गिरफ्तार, 15233 करोड़ की संपत्ति जब्त
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लखनऊ, 3 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश में संगठित अपराध और अपराध से अर्जित संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सरकार ने कई आंकड़े सामने रखे हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 20 मार्च 2017 से अब तक 23,601 इनामी अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। इसी अवधि में गैंगस्टर एक्ट के तहत 15,233 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की अवैध चल-अचल संपत्तियां जब्त किए जाने की जानकारी दी गई है।

साइबर अपराध के मोर्चे पर भी पुलिस की कार्रवाई का आंकड़ा सामने आया है। साइबर अपराध पोर्टल और हेल्पलाइन नंबर 1930 के माध्यम से अगस्त 2019 से जून 2026 तक 874 करोड़ 58 लाख रुपये से अधिक की धनराशि फ्रीज या होल्ड कराई गई। उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर साइबर अपराध से संबंधित अलग व्यवस्था और राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो की सूचनाएं उपलब्ध हैं।

अपराधियों पर कार्रवाई के साथ संपत्तियों पर भी शिकंजा

सरकार के अनुसार, 20 मार्च 2017 से अब तक पुलिस मुठभेड़ों में 303 अपराधी मारे गए, जबकि 12,202 घायल हुए। इसी अवधि में 23,601 इनामी अपराधियों की गिरफ्तारी की गई।

इसके अलावा गैंगस्टर एक्ट के तहत 87,835 अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। वहीं राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी एनएसए के तहत 995 अपराधियों पर कार्रवाई का दावा किया गया है।

गैंगस्टर एक्ट के तहत की गई कार्रवाई में अपराध से अर्जित संपत्तियों को जब्त करने पर भी जोर रहा। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 152 अरब 33 करोड़ रुपये से अधिक, यानी करीब 15,233 करोड़ रुपये मूल्य की अवैध चल-अचल संपत्तियां जब्त की गई हैं।

चिह्नित माफिया और गिरोहों पर कार्रवाई

प्रदेश स्तर पर चिह्नित 68 माफिया और उनके गिरोह के सदस्यों एवं सहयोगियों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। इनके विरुद्ध कुल 909 मुकदमे दर्ज किए गए, जबकि 651 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

इस तरह की कार्रवाई में केवल गिरफ्तारी तक सीमित रहने के बजाय अपराध से अर्जित संपत्ति को निशाना बनाना भी प्रमुख हिस्सा रहा है। उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर मोस्ट वांटेड अपराधियों और अपराध संबंधी आंकड़ों के लिए अलग-अलग पोर्टल और अनुभाग उपलब्ध हैं।

साइबर अपराध के खिलाफ यूपी में 75 जिलों में व्यवस्था

साइबर अपराध की बढ़ती चुनौती को देखते हुए प्रदेश के सभी 75 जिलों में साइबर क्राइम थाने संचालित किए जाने की जानकारी दी गई है। इसके साथ ही जिलों के पुलिस थानों में साइबर सेल और हेल्प डेस्क भी स्थापित किए गए हैं।

सरकार के अनुसार, साइबर अपराध पोर्टल और 1930 हेल्पलाइन के जरिए संदिग्ध या धोखाधड़ी से जुड़ी रकम को समय रहते फ्रीज या होल्ड कराने की व्यवस्था ने वित्तीय नुकसान को रोकने में मदद की है।

मार्च 2026 में साइबर अपराध से संबंधित रैंकिंग में उत्तर प्रदेश के देश में पहले स्थान पर रहने का भी दावा किया गया है। यह दावा राज्य की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों पर आधारित है।

कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर कार्रवाई का दावा

योगी सरकार के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था को लेकर अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई का दावा किया जाता रहा है। इस रणनीति में एक तरफ वांछित और इनामी अपराधियों की गिरफ्तारी, तो दूसरी तरफ गैंगस्टर एक्ट के तहत संपत्ति जब्ती जैसी कार्रवाई शामिल है।

उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर राज्य अपराध अभिलेख ब्यूरो के तहत अपराध, गैंगस्टर और माफिया से संबंधित अलग-अलग अनुभाग भी संचालित किए जा रहे हैं।

इन आंकड़ों से सरकार की उस रणनीति की तस्वीर सामने आती है जिसमें संगठित अपराध के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के साथ अपराध से अर्जित संपत्तियों पर आर्थिक प्रहार को भी अहम हिस्सा बनाया गया है। साइबर अपराध के बदलते स्वरूप को देखते हुए डिजिटल माध्यमों से रकम को फ्रीज कराने की व्यवस्था को भी इसी व्यापक अभियान का हिस्सा बताया गया है।

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