लखनऊ|19 जुलाई 2026: उत्तर प्रदेश में पंचायती राज व्यवस्था से जुड़ा एक अहम प्रशासनिक फैसला सामने आया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य के 826 ब्लॉक प्रमुखों को प्रशासक नियुक्त करने का आदेश जारी कर दिया है। प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार है, जब जिला पंचायत अध्यक्षों, ब्लॉक प्रमुखों और ग्राम प्रधानों को उनके कार्यकाल समाप्त होने के बाद एक साथ प्रशासक की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
पंचायती राज विभाग के अनुसार, ब्लॉक प्रमुखों की पहली बैठक 20 जुलाई 2021 को आयोजित हुई थी। इसी आधार पर उनका पांच वर्षीय कार्यकाल 19 जुलाई 2026 को समाप्त हो गया। प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने के लिए सरकार ने उन्हें फिलहाल प्रशासक के रूप में कार्य करने की अनुमति दी है।
826 ब्लॉक प्रमुख प्रशासक बनने के बाद क्या होंगे अधिकार?
सरकार के आदेश के अनुसार, 826 ब्लॉक प्रमुख प्रशासक के रूप में केवल नियमित और आवश्यक प्रशासनिक कार्यों का ही निष्पादन करेंगे। उन्हें किसी भी प्रकार के बड़े या नीतिगत फैसले लेने का अधिकार नहीं होगा।
यदि किसी विषय पर नीतिगत निर्णय की आवश्यकता होगी, तो संबंधित प्रस्ताव जिला अधिकारी (DM) के माध्यम से शासन को भेजा जाएगा। अंतिम निर्णय और स्वीकृति राज्य सरकार स्तर पर ही दी जाएगी।
रूटीन काम जारी रहेंगे, नीतिगत फैसलों पर रहेगी रोक
सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रशासक के रूप में नियुक्त ब्लॉक प्रमुख विकास कार्यों और प्रशासनिक गतिविधियों की निरंतरता बनाए रख सकेंगे, लेकिन नई योजनाओं या नीतिगत मामलों में स्वतंत्र निर्णय नहीं ले पाएंगे।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कार्यकाल समाप्त होने और नई प्रक्रिया पूरी होने के बीच विकास कार्य प्रभावित न हों, वहीं कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का भी पूरी तरह पालन किया जा सके।
जल्द जारी होगी विस्तृत गाइडलाइन
पंचायती राज विभाग ब्लॉक प्रमुखों के अधिकार और दायित्व स्पष्ट करने के लिए जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश (गाइडलाइन) जारी करेगा। इसमें बताया जाएगा कि प्रशासक के रूप में वे कौन-कौन से कार्य स्वयं कर सकते हैं और किन मामलों में उन्हें जिला अधिकारी की अनुमति या शासन की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा।
सरकार का मानना है कि स्पष्ट गाइडलाइन से प्रशासनिक प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी और किसी प्रकार की कानूनी या तकनीकी जटिलता से भी बचा जा सकेगा।
प्रदेश में पहली बार लागू हुई यह व्यवस्था
उत्तर प्रदेश में यह पहली बार है जब सरकार ने पंचायत व्यवस्था के तीनों प्रमुख निर्वाचित पदों—ग्राम प्रधान, ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष—को कार्यकाल समाप्त होने के बाद एक साथ प्रशासक की जिम्मेदारी सौंपी है। इस फैसले को स्थानीय निकायों में प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।








