लखनऊ/29 अगस्त 2026: बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (BBAU) के 11वें दीक्षा समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने युवाओं को बड़े सपने देखने और देश की क्षमता पर भरोसा रखने का संदेश दिया। BBAU दीक्षा समारोह में उन्होंने कहा कि भारत आज केवल दुनिया के बनाए नियमों का पालन करने वाला देश नहीं है, बल्कि कई क्षेत्रों में नए मानक और नियम तय करने की स्थिति में पहुंच चुका है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को अपनी पहचान और सभ्यता पर गर्व है तथा देश के भविष्य पर भरोसा है। उनके मुताबिक, यही बदलाव नए भारत की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। उन्होंने कहा, “मेक इन इंडिया” की सफलता के पीछे असल में “बिलीव इन इंडिया” की भावना काम कर रही है।
लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी प्रेक्षागृह में आयोजित समारोह में रक्षा मंत्री ने भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों, नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने सीमित संसाधनों के बावजूद कई ऐसे लक्ष्य हासिल किए हैं, जिन्हें कभी असंभव समझा जाता था।
BBAU दीक्षा समारोह में अंतरिक्ष कार्यक्रम का किया जिक्र
राजनाथ सिंह ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की यात्रा को याद करते हुए कहा कि एक समय देश के पास पर्याप्त संसाधन नहीं थे। रॉकेट के उपकरण साइकिल और बैलगाड़ी तक पर ले जाए जाते थे। लेकिन भारतीय वैज्ञानिकों ने यह साबित किया कि सफलता केवल संसाधनों की प्रचुरता पर निर्भर नहीं करती।
उन्होंने कहा कि भारत आज मंगल तक पहुंच चुका है। सूर्य के अध्ययन के लिए आदित्य एल-1 मिशन भेजा जा चुका है। देश मानव अंतरिक्ष उड़ान की तैयारी कर रहा है और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है।
रक्षा मंत्री ने युवाओं से इन उपलब्धियों को केवल सफलता की कहानी के रूप में नहीं, बल्कि आत्मविश्वास की मिसाल के तौर पर देखने का आह्वान किया। उनका संदेश था कि सीमित साधन किसी बड़े लक्ष्य की राह में अंतिम बाधा नहीं होते, यदि संकल्प मजबूत हो।
‘पहले नजरअंदाज, फिर मजाक, फिर विरोध और आखिर में तारीफ’
भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को लेकर शुरुआती दौर की अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं का जिक्र करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि कभी देश की उपलब्धियों पर दुनिया व्यंग्य करती थी। उन्होंने बताया कि जब भारत ने मार्स मिशन लॉन्च किया था, तब विदेशों में उसका मजाक उड़ाया गया था।
उन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित एक कार्टून का भी उल्लेख किया और कहा कि आज वही दुनिया भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की उपलब्धियों को देखकर हैरान है।
सफलता की यात्रा को समझाते हुए रक्षा मंत्री ने एक अंग्रेजी कहावत का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आम तौर पर सफलता के चार पड़ाव होते हैं—पहले लोग आपको नजरअंदाज करते हैं, फिर आप पर हंसते हैं, उसके बाद आपका विरोध करते हैं और अंत में वही लोग आपकी सफलता की तारीफ करते हैं।
यह बात उन्होंने युवाओं के संदर्भ में रखी। यानी अगर किसी बड़े लक्ष्य की राह में आलोचना या उपहास मिले तो उसे मंजिल का अंत नहीं, बल्कि यात्रा का एक पड़ाव समझना चाहिए।
ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में भारत की स्थिति का उल्लेख
राजनाथ सिंह ने भारत में बढ़ते नवाचार और पेटेंट पंजीकरण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश में पेटेंट पंजीकरण की संख्या में कई गुना वृद्धि हुई है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 में भारत ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में 81वें स्थान पर था, जबकि अब वह 38वें स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में भारत शीर्ष तीन देशों में शामिल हो सकता है।
रक्षा मंत्री ने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम का भी जिक्र करते हुए कहा कि देश दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। उनके मुताबिक, यह बदलाव भारत में युवाओं की सोच और जोखिम लेने की क्षमता में आए परिवर्तन को भी दिखाता है।
बड़े लक्ष्य के लिए ‘मन बड़ा’ रखने की जरूरत
दीक्षा समारोह में राजनाथ सिंह ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रसिद्ध पंक्ति “छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता” का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जीवन में बड़े लक्ष्य हासिल करने के लिए व्यक्ति का मन बड़ा होना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि व्यापक सोच और सकारात्मकता बड़े मन की पहचान है। मन का दायरा बढ़ने के साथ व्यक्ति के सुख और संतुष्टि का दायरा भी बढ़ता जाता है।
राजनाथ सिंह ने विद्यार्थियों से केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रहने, बल्कि समाज और देश के लिए व्यापक सोच विकसित करने की अपील की। दीक्षा समारोह में मौजूद युवाओं के लिए उनका यह संदेश महज प्रेरक संबोधन नहीं, बल्कि आगे की जिम्मेदारियों की ओर संकेत भी था।
राजनाथ सिंह ने बताए बाबा साहेब के तीन मंत्र
रक्षा मंत्री ने बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि समस्याओं का समाधान संवैधानिक तरीके से किया जाना चाहिए। उन्होंने डॉ. अंबेडकर के तीन मंत्रों—एजुकेट, एजीटेट और ऑर्गनाइज—का उल्लेख किया।
उन्होंने इनके अर्थ को शिक्षा हासिल करने, अन्याय को देखकर संवेदनशील और आंदोलित होने तथा लोगों को गलत के खिलाफ जागरूक और संगठित करने से जोड़ा।
BBAU में आयोजित दीक्षा समारोह का संदर्भ भी इन विचारों से जुड़ा रहा, क्योंकि विश्वविद्यालय का नाम ही बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के नाम पर है। ऐसे में विद्यार्थियों के बीच उनके विचारों का उल्लेख समारोह के संदेश को व्यापक सामाजिक संदर्भ देता है।
‘यह शिक्षण संस्था है’, राजनाथ सिंह ने तोड़ा प्रोटोकॉल
समारोह के मंच पर पहुंचते ही राजनाथ सिंह ने प्रोटोकॉल को लेकर हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी की। उन्होंने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से कहा कि यह शिक्षण संस्था है, इसलिए वह प्रोटोकॉल तोड़ते हुए सबसे पहले कुलपति का नाम लेंगे।
इसके बाद उन्होंने BBAU के कुलपति राजकुमार मित्तल का नाम लिया और फिर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक समेत अन्य विशिष्ट अतिथियों का उल्लेख किया।
दीक्षा समारोह में राजनाथ सिंह का पूरा संबोधन भारत की बदलती तस्वीर और युवाओं की भूमिका के इर्द-गिर्द रहा। अंतरिक्ष से लेकर स्टार्टअप और नवाचार तक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की कि भारत के बड़े लक्ष्यों की राह अब केवल कल्पना तक सीमित नहीं है—उन्हें हासिल करने की क्षमता देश के पास मौजूद है।









