नई दिल्ली/9 सितंबर 2026। केंद्र सरकार ने रेलवे नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने और बढ़ते यात्री व माल यातायात के दबाव को कम करने की दिशा में कई अहम कदम उठाए हैं। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कैबिनेट बैठक के बाद बताया कि देश के सात हाई-डेंसिटी रेलवे कॉरिडोर को फोर-ट्रैक करने की योजना पर काम आगे बढ़ रहा है। इसके साथ ही कैबिनेट ने रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना के तहत तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी है।
इन तीन परियोजनाओं पर अनुमानित 10,783 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इनके पूरा होने पर पांच राज्यों में करीब 656 किलोमीटर अतिरिक्त रेल लाइन क्षमता विकसित होगी। सरकार का मानना है कि इससे ट्रेनों की आवाजाही सुगम होगी, माल ढुलाई की क्षमता बढ़ेगी और रेलवे नेटवर्क पर भीड़भाड़ कम करने में मदद मिलेगी।
सात हाई-डेंसिटी कॉरिडोर होंगे फोर-ट्रैक
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में रेलवे के व्यापक आधुनिकीकरण की प्रक्रिया जारी है। इसी कड़ी में सात हाई-डेंसिटी कॉरिडोर को चार ट्रैक वाला बनाने की योजना तैयार की गई है।
इन कॉरिडोर का उद्देश्य रेलवे के उन व्यस्त मार्गों की क्षमता बढ़ाना है, जहां आने वाले वर्षों में यात्री और माल यातायात का दबाव और बढ़ने की संभावना है। अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध होने से ट्रेनों के संचालन को अधिक व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी।
सरकार के अनुसार, करीब 4,000 किलोमीटर के हिस्से के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR तैयार करने की प्रक्रिया फिलहाल चल रही है।
गोल्डन क्वाड्रिलेटरल के प्रमुख मार्ग भी योजना में शामिल
सात हाई-डेंसिटी कॉरिडोर में देश के प्रमुख रेल मार्ग शामिल हैं। दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई, चेन्नई-कोलकाता और कोलकाता-दिल्ली के चार मार्ग मिलकर गोल्डन क्वाड्रिलेटरल बनाते हैं।
इसके अलावा दिल्ली-चेन्नई और मुंबई-कोलकाता को इसके दोनों डायगोनल के रूप में शामिल किया गया है। दिल्ली-गुवाहाटी कॉरिडोर भी इस योजना का हिस्सा है। इस तरह इन सात महत्वपूर्ण मार्गों पर रेल क्षमता को चार ट्रैक तक बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
यह विस्तार केवल ट्रैक बढ़ाने तक सीमित नहीं है। व्यस्त रेल मार्गों पर अतिरिक्त लाइन का मतलब यह भी है कि यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों के संचालन के लिए ज्यादा गुंजाइश बनेगी। इससे रेलवे को परिचालन की योजना बनाने में अधिक लचीलापन मिल सकता है।
रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना को 10,783 करोड़ की मंजूरी
कैबिनेट समिति ने रेलवे मंत्रालय की तीन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनकी कुल अनुमानित लागत 10,783 करोड़ रुपये है। परियोजनाओं के पूरा होने के बाद रेलवे नेटवर्क में करीब 656 किलोमीटर अतिरिक्त ट्रैक क्षमता जुड़ेगी।
इनमें खड़गपुर-झारसुगुड़ा रेल खंड पर चौथी लाइन, कटनी-पेंड्रा रोड सेक्शन में चौथी लाइन और बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड सेक्शन में तीसरी लाइन का निर्माण शामिल है।
अतिरिक्त रेल लाइन बनने से इन मार्गों की मौजूदा क्षमता का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा। साथ ही, ट्रेनों की आवाजाही में सुधार और परिचालन में विश्वसनीयता बढ़ने की उम्मीद है।
पांच राज्यों के 14 जिलों को मिलेगा फायदा
इन तीनों परियोजनाओं का असर पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ तक रहेगा। सरकार के मुताबिक परियोजनाएं इन पांच राज्यों के 14 जिलों से होकर गुजरेंगी।
करीब 656 किलोमीटर रेल नेटवर्क क्षमता बढ़ने से लगभग 4,790 गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर होने की संभावना है। इन गांवों में करीब 56 लाख लोगों की आबादी बताई गई है।
ग्रामीण इलाकों के लिए रेल संपर्क में सुधार का महत्व केवल यात्रा तक सीमित नहीं रहता। बेहतर रेल नेटवर्क बाजार, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और स्थानीय कारोबार तक पहुंच को भी आसान बना सकता है।
पीएम गति शक्ति के तहत होगा परियोजनाओं का विकास
सरकार ने बताया कि इन परियोजनाओं की योजना पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत बनाई गई है। इस योजना का उद्देश्य अलग-अलग परिवहन माध्यमों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करते हुए मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स क्षमता को मजबूत करना है।
रेल नेटवर्क में क्षमता बढ़ने से लोगों के साथ-साथ सामान और सेवाओं की आवाजाही भी अधिक सुचारु होने की उम्मीद है। खासकर औद्योगिक और खनिज क्षेत्रों को इसका सीधा लाभ मिल सकता है।
पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक भी मजबूत होगी कनेक्टिविटी
नई रेल परियोजनाओं का फायदा कई प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों को भी मिलने की उम्मीद है। इनमें तारातारिणी मंदिर, श्री क्षेत्र जगन्नाथ मंदिर, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, विराटेश्वर मंदिर, अमरकंटक मंदिर, ज्वालेश्वर धाम, अचानकमार टाइगर रिजर्व, खुटाघाट बांध, मल्हार पुरातात्विक स्थल और रतनपुर महामाया मंदिर सहित कई महत्वपूर्ण स्थल शामिल हैं।
रेल संपर्क बेहतर होने से इन क्षेत्रों में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की आवाजाही आसान हो सकती है। इससे स्थानीय स्तर पर पर्यटन आधारित कारोबार और रोजगार को भी गति मिलने की संभावना रहती है।
कोयला और अन्य खनिजों की ढुलाई को मिलेगा सहारा
जिन रेल मार्गों पर क्षमता बढ़ाई जा रही है, वे औद्योगिक और माल परिवहन की दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण हैं। इन रास्तों से कोयला, सीमेंट, लोहा और इस्पात जैसी वस्तुओं की बड़ी मात्रा में ढुलाई होती है।
सरकार के अनुमान के अनुसार, अतिरिक्त रेल क्षमता से करीब 27 MTPA यानी 2.7 करोड़ टन सालाना अतिरिक्त माल यातायात को संभालने की संभावना बनेगी। ऐसे में रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना का एक अहम उद्देश्य माल ढुलाई के लिए पर्याप्त रेल क्षमता उपलब्ध कराना भी है।
पर्यावरण और लॉजिस्टिक्स लागत पर भी पड़ेगा असर
सरकार ने परियोजनाओं को पर्यावरण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बताया है। रेलवे को अपेक्षाकृत ऊर्जा दक्ष और पर्यावरण अनुकूल परिवहन माध्यम माना जाता है। रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ने से सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
इसका असर लॉजिस्टिक्स लागत और ईंधन खपत पर भी पड़ सकता है। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से देश के जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी और माल परिवहन को अधिक कुशल बनाने का रास्ता तैयार होगा।
कुल मिलाकर, सात हाई-डेंसिटी कॉरिडोर को फोर-ट्रैक करने की योजना और तीन नई रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाएं भारतीय रेल के उस विस्तार की ओर इशारा करती हैं, जिसमें बढ़ते यातायात के साथ बुनियादी ढांचे की क्षमता को भी समान गति से बढ़ाने पर जोर है। इसका असर यात्रियों की सुविधा से लेकर माल ढुलाई, औद्योगिक गतिविधियों, पर्यटन और पर्यावरण—कई स्तरों पर देखने को मिल सकता है।












