नई दिल्ली (बुधवार, 9 सितंबर 2026)। उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रही हैं। फरवरी-मार्च 2027 में प्रस्तावित चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियों के साथ चुनाव आयोग ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस बार यूपी विधानसभा चुनाव को तीन से चार चरणों में कराने पर विचार किया जा रहा है। यदि ऐसा होता है तो यह पिछले तीन विधानसभा चुनावों में हुए सात चरणों के मुकाबले काफी छोटा चुनावी कार्यक्रम होगा।
उत्तर प्रदेश में वर्ष 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव सात-सात चरणों में कराए गए थे। ऐसे में इस बार मतदान के चरणों में संभावित कमी चुनाव कार्यक्रम को लेकर एक बड़ा बदलाव मानी जा रही है।
यूपी विधानसभा चुनाव 3 से 4 चरणों में कराने पर विचार
सूत्रों के अनुसार, चुनाव आयोग उत्तर प्रदेश में मतदान को तीन से चार चरणों में कराने के विकल्प पर विचार कर रहा है। हालांकि, अंतिम फैसला चुनाव की तैयारियों, सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक जरूरतों और राज्यों के साथ होने वाले विचार-विमर्श के बाद ही होगा।
उत्तर प्रदेश के अलावा जिन चार राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, उनमें पंजाब, उत्तराखंड और गोवा में एक ही चरण में मतदान कराने की तैयारी बताई जा रही है। इन तीनों राज्यों में पिछला विधानसभा चुनाव भी एक चरण में ही हुआ था।
वहीं मणिपुर में वर्ष 2022 और 2017 की तरह दो चरणों में मतदान कराया जा सकता है।
बिहार और बंगाल में दो चरणों का प्रयोग रहा सफल
चुनाव आयोग हाल के वर्षों में बड़े राज्यों में कम चरणों में चुनाव कराने की अपनी क्षमता को परख चुका है। बिहार में वर्ष 2015 में विधानसभा चुनाव पांच चरणों में और 2020 में तीन चरणों में हुए थे। इसके बाद 2025 में आयोग ने बिहार में मतदान केवल दो चरणों में कराया।
पश्चिम बंगाल में भी चरणों की संख्या में बड़ा बदलाव देखने को मिला। वहां 2016 में छह चरण और 2021 में आठ चरणों में मतदान हुआ था, जबकि 2026 में विधानसभा चुनाव दो चरणों में कराया गया।
इसी अनुभव को देखते हुए अब उत्तर प्रदेश में भी सात चरणों के बजाय तीन से चार चरणों में चुनाव कराने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में आयोग की ओर से संबंधित राज्यों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा किए जाने की संभावना है।
चुनाव अवधि छोटी रखने पर आयोग का जोर
चुनाव के दौरान सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर भ्रामक सूचनाओं तथा फर्जी नैरेटिव का प्रसार चुनाव प्रबंधन के लिए नई चुनौती बनता जा रहा है। ऐसे में चुनाव आयोग कम समय में मतदान प्रक्रिया पूरी कराने को लेकर भी गंभीरता से विचार करता रहा है।
बिहार और पश्चिम बंगाल में कम चरणों में चुनाव कराकर आयोग ने बड़े राज्यों में चुनाव प्रबंधन की अपनी क्षमता को भी परखा है। उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में चरणों की संख्या घटाना प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण निर्णय होगा।
सितंबर के अंतिम सप्ताह से शुरू होगा राज्यों का दौरा
चुनावी तैयारियों के अगले चरण में चुनाव आयोग की टीमें सितंबर के अंतिम सप्ताह से चुनावी राज्यों का दौरा शुरू कर सकती हैं। सूत्रों के मुताबिक, इसके लिए टीमों के गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
आयोग की टीमें सबसे पहले उन राज्यों का दौरा करेंगी, जहां विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इनमें उत्तर प्रदेश, गोवा और मणिपुर शामिल हैं।
वहीं पंजाब और उत्तराखंड में एसआईआर के तहत अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन अक्टूबर में किया जाना है। इसके बाद इन राज्यों में भी चुनावी तैयारियों को आगे बढ़ाया जाएगा।
किस राज्य की विधानसभा का कार्यकाल कब तक?
2027 में जिन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, उनकी मौजूदा विधानसभाओं का कार्यकाल अलग-अलग तारीखों तक है।
| राज्य | विधानसभा का कार्यकाल |
|---|---|
| मणिपुर | 13 मार्च 2027 |
| गोवा | 14 मार्च 2027 |
| पंजाब | 16 मार्च 2027 |
| उत्तराखंड | 28 मार्च 2027 |
| उत्तर प्रदेश | 22 मई 2027 |
उत्तर प्रदेश की विधानसभा का कार्यकाल सबसे बाद में समाप्त होगा। इसके बावजूद राज्य में चुनाव की तैयारियां काफी पहले शुरू हो जाती हैं, क्योंकि इतने बड़े राज्य में मतदाता सूची, सुरक्षा व्यवस्था, मतदान केंद्रों और प्रशासनिक तैयारियों के लिए व्यापक स्तर पर योजना बनानी पड़ती है।













