गोरखपुर/16 सितंबर 2026: गोरखपुर में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में बुधवार को एक और महत्वपूर्ण पहल जुड़ी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तारामंडल क्षेत्र स्थित IMA चैरिटेबल ब्लड सेंटर का लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में तकनीक और आधुनिक सुविधाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन रक्त का निर्माण नहीं किया जा सकता। जरूरतमंद मरीजों तक रक्त पहुंचाने के लिए स्वैच्छिक रक्तदाताओं को तैयार करना ही सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है।
मुख्यमंत्री ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) गोरखपुर की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि किसी संस्था की वास्तविक पहचान केवल उसकी विशेषज्ञता से नहीं, बल्कि इस बात से होती है कि वह अपनी विशेषज्ञता और संसाधनों का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक किस तरह पहुंचाती है।
IMA चैरिटेबल ब्लड सेंटर को बताया समाजसेवा की अहम कड़ी
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सामान्य तौर पर चिकित्सक सरकारी व्यवस्था या निजी क्षेत्र के माध्यम से चिकित्सा सेवाएं प्रदान करते हैं, लेकिन जब कोई संस्था निशुल्क ओपीडी, ब्लड बैंक और अन्य जनसेवा के कार्यों को आगे बढ़ाती है तो यह उसके अतिरिक्त सामाजिक दायित्व को दर्शाता है।
उन्होंने बताया कि गोरखपुर में IMA ने पहले निशुल्क ओपीडी की शुरुआत की और अब चैरिटी के आधार पर ब्लड सेंटर स्थापित किया है। यह पूर्वी उत्तर प्रदेश के जरूरतमंद मरीजों को आवश्यकता के समय रक्त उपलब्ध कराने में उपयोगी साबित हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने IMA गोरखपुर की पूरी टीम और उसके सदस्यों को इस पहल के लिए बधाई दी।
2017-18 में निशुल्क ओपीडी से शुरू हुई थी पहल
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2017-18 में गोरखपुर के सीतापुर नेत्र चिकित्सालय में निशुल्क ओपीडी की शुरुआत की गई थी। उस समय IMA की ओर से कार्यालय और अन्य गतिविधियों के लिए भूमि की मांग की गई थी।
बाद में गोरखपुर विकास प्राधिकरण के सहयोग से उपलब्ध कराए गए भूखंड का उपयोग करते हुए IMA ने चैरिटेबल ब्लड सेंटर की स्थापना की। योगी ने कहा कि संस्था ने उपलब्ध संसाधन का बेहतर उपयोग करते हुए उसे जनसेवा के बड़े माध्यम में बदला है।
‘रक्त बनाया नहीं जा सकता, रक्तदाता तैयार करना होगा’
मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा में नई तकनीक, अत्याधुनिक मशीनें और बेहतर उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं, लेकिन रक्त का निर्माण नहीं किया जा सकता। इसके लिए समाज के लोगों को स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आना होगा।
उन्होंने कहा कि चिकित्सकों की भूमिका केवल मरीज का उपचार करने तक सीमित नहीं है। वे लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करके किसी जरूरतमंद का जीवन बचाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
योगी ने बताया कि उन्हें वाराणसी, प्रयागराज और बरेली में IMA द्वारा संचालित ब्लड बैंकों को देखने का अवसर मिला है। उनकी इच्छा थी कि इसी तरह की व्यवस्था गोरखपुर में भी विकसित हो।
गोरखपुर में 1,400 से अधिक डॉक्टर IMA से जुड़े
मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर में IMA के साथ 1,400 से अधिक चिकित्सक जुड़े हुए हैं। इतनी बड़ी संख्या में चिकित्सकों का संगठन के माध्यम से समाजसेवा के कार्यों में भाग लेना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि चैरिटेबल ब्लड सेंटर इसी सेवा अभियान की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इससे जरूरतमंद मरीजों को रक्त उपलब्ध कराने के साथ समाज में स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने की अपील
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि रक्त की मांग के अनुपात में हमेशा पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पाती। इसलिए चिकित्सकों और सामाजिक संस्थाओं को लोगों को नियमित रूप से स्वैच्छिक रक्तदान के लिए प्रेरित करना चाहिए।
उन्होंने इसके लिए सोशल मीडिया और दूसरे जनसंचार माध्यमों के इस्तेमाल पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को रक्तदान के महत्व की जानकारी दी जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने पेशेवर रक्तदाताओं को लेकर भी चिकित्सकों को सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि विभिन्न बीमारियों से पीड़ित लोगों के रक्तदान को लेकर प्रभावी निगरानी जरूरी है, क्योंकि संक्रमित रक्त से भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्या पैदा हो सकती है।
करीब नौ साल में बदली गोरखपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था: योगी
मुख्यमंत्री ने गोरखपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था में पिछले वर्षों में आए बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि करीब नौ वर्ष पहले पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफेलाइटिस को लेकर परिवारों में भय का माहौल रहता था।
उनके अनुसार, उस समय बीआरडी मेडिकल कॉलेज क्षेत्र की प्रमुख चिकित्सा संस्था था, लेकिन संसाधनों और बेड की कमी के कारण मरीजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब बीआरडी मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं का विस्तार हुआ है और यह इंसेफेलाइटिस समेत कई गंभीर बीमारियों के उपचार का प्रमुख केंद्र बना है।
गोरखपुर में एम्स के साथ दो मेडिकल कॉलेज और चार विश्वविद्यालयों का भी उन्होंने उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आसपास के महराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, सिद्धार्थनगर, बस्ती, बलरामपुर, बहराइच, गोंडा, अयोध्या और अंबेडकरनगर समेत कई जिलों में भी मेडिकल कॉलेज शुरू हुए हैं।
यूपी में 85 मेडिकल कॉलेज संचालित होने का दावा
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 75 जिले हैं, जबकि 85 मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं। प्रदेश में दो एम्स भी संचालित हैं। उन्होंने इसे राज्य में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का परिणाम बताया।
उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने के लिए एमबीबीएस, पीजी, नर्सिंग और पैरामेडिकल शिक्षा के विस्तार पर भी काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रदेश में एमबीबीएस सीटों की संख्या पहले करीब 4,600 थी, जो अब 13,500 से अधिक हो गई है। स्नातकोत्तर सीटों में भी वृद्धि हुई है।
गोरखपुर में विशेषज्ञ इलाज की सुविधाओं का विस्तार
मुख्यमंत्री ने गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय का उदाहरण देते हुए कहा कि चैरिटी के आधार पर भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं विकसित की जा सकती हैं। उन्होंने बताया कि अस्पताल की शुरुआत 10 बेड से करने की चर्चा थी, लेकिन स्थानीय चिकित्सकों के सहयोग से इसे 100 बेड की क्षमता तक विकसित किया गया।
उन्होंने कहा कि गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय में पूर्वी उत्तर प्रदेश की पहली ICU और बाद में डायलिसिस सुविधा शुरू हुई। अब गोरखपुर में कई अस्पताल डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं।
योगी ने यह भी कहा कि सरकार जिला अस्पतालों में निशुल्क डायलिसिस जैसी सुविधाओं को विस्तार देने की दिशा में काम कर रही है।
इंसेफ्लाइटिस पर नियंत्रण का किया दावा
मुख्यमंत्री ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में इंसेफ्लाइटिस की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस बीमारी को लेकर कभी क्षेत्र में भय का वातावरण था, उस पर प्रभावी नियंत्रण पाया गया है।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि चिकित्सकों, सामाजिक संस्थाओं और आम लोगों की सहभागिता से संभव होता है। IMA चैरिटेबल ब्लड सेंटर को भी उन्होंने इसी सामूहिक प्रयास का हिस्सा बताया।
कार्यक्रम में IMA गोरखपुर के पदाधिकारियों और चिकित्सकों ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया। IMA अध्यक्ष डॉ. आरपी शुक्ला ने कहा कि मुख्यमंत्री के संदेश को चिकित्सक केवल कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखेंगे, बल्कि समाजसेवा के कार्यों में इसे आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे।









