गोरखपुर/16 सितंबर 2026: पूर्वी उत्तर प्रदेश में कभी बच्चों की मौत और बीमारी का बड़ा कारण रही इंसेफेलाइटिस को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को बड़ा दावा किया। गोरखपुर में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के चैरिटेबल ब्लड सेंटर के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब साढ़े नौ साल पहले जिस इंसेफेलाइटिस से बच्चों के परिवार चिंतित रहते थे, अब वह चिंता खत्म हो चुकी है। उन्होंने कहा कि “माफिया और मच्छर की तरह इंसेफेलाइटिस भी समाप्त हो गया है।”
मुख्यमंत्री ने इसी मंच से प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाओं में विस्तार की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार सभी जिला अस्पतालों में 10-10 बेड की डायलिसिस यूनिट शुरू कर रही है। यानी डायलिसिस जैसी जरूरी चिकित्सा सुविधा के लिए मरीजों को बड़े शहरों का रुख न करना पड़े, इसके लिए जिला स्तर पर ही सुविधा विस्तार पर जोर दिया जा रहा है।
इंसेफेलाइटिस पर नियंत्रण, गोरखपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था में बदलाव
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि लगभग साढ़े नौ वर्ष पहले गोरखपुर का बीआरडी मेडिकल कॉलेज ही पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रमुख स्वास्थ्य सुविधा का केंद्र था। उस समय अस्पताल में एक बेड पर चार-चार मरीजों के भर्ती होने की स्थिति का उन्होंने उल्लेख किया।
योगी ने कहा कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज की तीसरी मंजिल पर इंसेफेलाइटिस वार्ड था, जहां पंखे, शौचालय और दूसरी जरूरी सुविधाओं का भी अभाव था। उनके मुताबिक, आज वही बीआरडी मेडिकल कॉलेज सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं के साथ इंसेफेलाइटिस समेत विभिन्न बीमारियों के इलाज का प्रमुख केंद्र बन चुका है।
गोरखपुर में एम्स की स्थापना और आसपास के जिलों में मेडिकल कॉलेजों के विस्तार को भी उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र में आए बदलाव का हिस्सा बताया। मुख्यमंत्री के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 75 जिलों के मुकाबले मेडिकल कॉलेजों की संख्या 85 हो चुकी है और दो एम्स भी संचालित हैं। उन्होंने कहा कि एमबीबीएस की सीटें 4,600 से बढ़कर 13,500 से अधिक हो गई हैं, जबकि पीजी सीटों की संख्या दोगुनी हुई है।
अब जिला स्तर पर मिलेगी डायलिसिस की सुविधा
मुख्यमंत्री ने डायलिसिस सुविधा के विस्तार को भी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच से जोड़ा। उन्होंने कहा कि एक समय डायलिसिस के लिए लोगों को गोरखपुर से लखनऊ या बीएचयू तक जाना पड़ता था, लेकिन अब गोरखपुर में ही यह सुविधा उपलब्ध है।
योगी ने बताया कि सरकार ने प्रदेश के जिला अस्पतालों में भी निशुल्क डायलिसिस की व्यवस्था शुरू करने का काम प्रारंभ कर दिया है। सभी जिला अस्पतालों में 10 बेड की डायलिसिस यूनिट स्थापित करने की योजना इसी दिशा में एक कदम है।
यह बदलाव खास तौर पर उन मरीजों के लिए महत्वपूर्ण है जिन्हें लंबे समय तक नियमित डायलिसिस की जरूरत होती है। जिला स्तर पर सुविधा मिलने से दूर-दराज के मरीजों और उनके परिवारों के लिए बार-बार बड़े शहरों की यात्रा का बोझ कम हो सकता है।
कभी डॉक्टर भी माफिया के निशाने पर होते थे: योगी
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कानून-व्यवस्था के पुराने दौर का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक समय उत्तर प्रदेश के कई जिलों की पहचान दुर्दांत माफिया से जुड़ी हुई थी और डॉक्टर भी इसका शिकार होते थे।
योगी के मुताबिक, गोरखपुर में डॉक्टरों के अपहरण, रंगदारी, धमकी भरे फोन और चिकित्सकों के चेंबर में घुसकर मारपीट जैसी घटनाएं होती थीं। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं के खिलाफ चिकित्सकों के साथ उन्हें सड़कों पर आंदोलन करना पड़ता था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब गोरखपुर समेत पूरे प्रदेश में डॉक्टर, व्यापारी और आम नागरिक खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उनके अनुसार, प्रदेश की पहचान अब माफिया से नहीं बल्कि ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज’ जैसे स्वास्थ्य विस्तार के लक्ष्य से बन रही है।
खून बनाया नहीं जा सकता, रक्तदान ही सहारा
चैरिटेबल ब्लड सेंटर के उद्घाटन के दौरान मुख्यमंत्री ने रक्तदान की जरूरत पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, अस्पताल, दवाएं और चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए जा सकते हैं, लेकिन खून का निर्माण नहीं किया जा सकता। ऐसे में रक्तदान किसी जरूरतमंद को जीवन देने वाली सामाजिक संवेदना का उदाहरण है।
योगी ने कहा कि रक्त की मांग के अनुरूप आपूर्ति हमेशा पर्याप्त नहीं हो पाती। उन्होंने चिकित्सकों से स्वैच्छिक रक्तदान को बढ़ावा देने के लिए सोशल मीडिया सहित उपलब्ध माध्यमों का इस्तेमाल करने की अपील की। समय-समय पर रक्तदान के लिए जागरूकता अभियान और अपील चलाने पर भी उन्होंने जोर दिया।
पेशेवर रक्तदाताओं पर अंकुश की जरूरत
मुख्यमंत्री ने पेशेवर रक्तदान को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि विभिन्न बीमारियों से पीड़ित पेशेवर रक्तदाताओं पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो संक्रमण का गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।
उन्होंने चिकित्सकों से ऐसी गतिविधियों की जानकारी शासन-प्रशासन तक पहुंचाने और लोगों को जागरूक करने में सहयोग की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षित रक्त व्यवस्था के लिए जागरूकता और निगरानी दोनों जरूरी हैं।
IMA के चैरिटेबल ब्लड सेंटर की सराहना
मुख्यमंत्री ने IMA गोरखपुर के सामाजिक कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि चिकित्सा संगठन की भूमिका केवल निजी प्रैक्टिस तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उनके मुताबिक, गोरखपुर में निशुल्क ओपीडी के बाद चैरिटेबल ब्लड सेंटर की शुरुआत सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण है।
योगी ने बताया कि वर्ष 2017-18 में गोरखपुर के सीतापुर आई हॉस्पिटल में IMA ने निशुल्क ओपीडी शुरू की थी। बाद में IMA की ओर से कार्यालय के लिए भूमि की मांग किए जाने पर गोरखपुर विकास प्राधिकरण के माध्यम से भूखंड उपलब्ध कराने में मदद की गई। इसी भूखंड पर अब चैरिटेबल ब्लड सेंटर विकसित किया गया है, जो पूर्वी उत्तर प्रदेश के जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त उपलब्ध कराने में मदद करेगा।
गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय का भी किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने गुरु गोरखनाथ चिकित्सालय का उदाहरण देते हुए कहा कि चैरिटी के माध्यम से भी आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं को सफलतापूर्वक संचालित किया जा सकता है। उन्होंने अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के सानिध्य में अस्पताल की शुरुआत का उल्लेख किया।
योगी के अनुसार, शुरुआत में 10 बेड के अस्पताल की चर्चा थी, लेकिन गोरखपुर के चिकित्सकों के सहयोग से इसे शुरुआत में ही 100 बेड का बनाया गया। अस्पताल में आगे चलकर ब्लड सेपरेटर, एफेरेसिस और डायलिसिस जैसी सुविधाएं विकसित हुईं।
गोरखपुर में स्वास्थ्य सुविधाओं के इस विस्तार को मुख्यमंत्री ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में बदलते चिकित्सा ढांचे की तस्वीर के रूप में पेश किया। इंसेफेलाइटिस से निपटने से लेकर जिला अस्पतालों में डायलिसिस यूनिट तक, सरकार का जोर अब स्वास्थ्य सेवाओं को बड़े शहरों से बाहर निकालकर जिला स्तर तक पहुंचाने पर है।










