नई दिल्ली/20 सितंबर 2026: भारत तेजी से वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में अपनी जगह मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। इसी बीच केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने देश की चिप कंपनियों और उद्योग को संभावित साइबर हमलों, भू-राजनीतिक जोखिमों और दूसरी तरह की बाधाओं के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी है।
वैष्णव ने कहा कि भारत के चिप डिजाइन और निर्माण की क्षमता बढ़ने के साथ कुछ स्थापित कारोबारी हित इसे चुनौती के रूप में देख सकते हैं। ऐसे में देश को अपनी बढ़ती भूमिका को हल्के में नहीं लेना चाहिए और संभावित जोखिमों से निपटने के लिए पहले से तैयार रहना होगा।
सेमीकंडक्टर उद्योग को साइबर हमलों से सतर्क रहने की सलाह
एक साक्षात्कार में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत अब ऐसे देश के रूप में उभर रहा है, जो चिप डिजाइन के साथ-साथ सेमीकंडक्टर निर्माण की क्षमता भी विकसित कर रहा है। उनके मुताबिक, इस बदलाव के साथ संभावित भू-राजनीतिक जोखिमों पर लगातार नजर रखने की आवश्यकता होगी।
उन्होंने कहा कि भारत की बढ़ती क्षमता को कुछ स्थापित कंपनियां और कारोबारी हित अपने लिए चुनौती मान सकते हैं। ऐसे में भारतीय उद्योग को साइबर हमलों और अन्य संभावित खतरों को लेकर लगातार सजग रहना होगा।
वैष्णव ने उद्योग को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि उसे साइबर हमलों के साथ-साथ दूसरी तरह की बाधाओं के लिए भी तैयार रहना चाहिए। उनका कहना था कि भारत को सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला में आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश करने वाले संभावित खिलाड़ियों से पैदा होने वाले जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
भारत सेमीकंडक्टर हब बनने की दिशा में बढ़ा रहा कदम
भारत को कई देश भरोसेमंद साझेदार के रूप में देख रहे हैं। वैश्विक कंपनियां यहां अपने उत्पादों के विकास और निर्माण की संभावनाएं तलाश रही हैं। ऐसे माहौल में भारत की सेमीकंडक्टर रणनीति केवल चिप असेंबली और टेस्टिंग तक सीमित नहीं है।
सरकार अब चिप डिजाइन, उपकरण, सेमीकंडक्टर सामग्री, निर्माण संयंत्र, उन्नत पैकेजिंग, अनुसंधान एवं विकास और प्रतिभा विकास को जोड़कर एक व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने पर जोर दे रही है।
यही विस्तार भारत के लिए अवसर के साथ नई चुनौतियां भी लेकर आता है। आपूर्ति शृंखला जितनी जटिल होगी, उसकी सुरक्षा और निरंतरता उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।
सेमीकॉन 2.0 में 1.27 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान
सरकार ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र के विस्तार के लिए सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी दी है। इसके तहत 1,27,500 करोड़ रुपये के खर्च का प्रावधान किया गया है। योजना में चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर उपकरण एवं सामग्री, निर्माण संयंत्र, उन्नत पैकेजिंग, अनुसंधान एवं विकास तथा प्रतिभा विकास जैसे क्षेत्रों को समर्थन देने की व्यवस्था है।
यह पहल सेमीकॉन योजना के पहले चरण की प्रगति को आगे बढ़ाती है। पहले चरण में 1.64 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली 12 सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इनमें माइक्रोन, कायन्स और सीजी सेमी सहित पांच परियोजनाओं में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है।
चिप निर्माण में भारत का लक्ष्य क्या है?
भारत की रणनीति केवल सेमीकंडक्टर पैकेजिंग तक सीमित रहने की नहीं है। सरकार देश के भीतर एक व्यापक घरेलू आपूर्ति शृंखला विकसित करने के साथ वैश्विक कंपनियों को भारत में चिप तकनीक के विकास और निर्माण के लिए आकर्षित करना चाहती है।
सरकार के अनुसार, सेमीकॉन योजना के दूसरे चरण के तहत करीब एक लाख करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धताएं मिल चुकी हैं। हाल में आयोजित सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम में भी वैश्विक कंपनियों की रुचि और निवेश योजनाएं सामने आईं।
इनमें एप्लाइड मैटेरियल्स की 2035 तक भारत में पांच अरब अमेरिकी डॉलर की योजना, लैम रिसर्च का 10,000 करोड़ रुपये का प्रस्तावित निवेश, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स का धोलेरा में 363 एकड़ का वेंडर पार्क और फुजीफिल्म का 800 करोड़ रुपये का सेमीकंडक्टर सामग्री संयंत्र शामिल हैं।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र में बढ़ते निवेश से भारत की तकनीकी और विनिर्माण क्षमता को विस्तार मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में साइबर सुरक्षा, आपूर्ति शृंखला की मजबूती और भू-राजनीतिक जोखिमों से निपटना भी उतना ही अहम होगा। यही वजह है कि सरकार अब उद्योग को विकास के साथ-साथ सुरक्षा के मोर्चे पर भी तैयार रहने का संदेश दे रही है।











