नई दिल्ली/28 सितंबर 2026: भारतीय शेयर बाजार में पिछले करीब दो वर्षों से जारी उतार-चढ़ाव और कंसोलिडेशन के बीच निवेशकों के लिए एक अहम संकेत सामने आया है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOFSL) की ताजा इंडिया स्ट्रेटेजी रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय इक्विटी बाजार का जोखिम-लाभ अनुपात पहले की तुलना में बेहतर हुआ है। इसके पीछे शेयरों के वैल्यूएशन में सुधार, कंपनियों की कमाई में संभावित तेजी और घरेलू निवेश से मिलने वाला मजबूत सपोर्ट प्रमुख वजहें हैं।
हालांकि, रिपोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि वैश्विक बॉन्ड यील्ड, जियोपॉलिटिकल तनाव, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली जैसे जोखिम अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।
शेयर बाजार में निवेश के लिए वैल्यूएशन में आया सुधार
MOFSL के अनुसार सितंबर 2024 के उच्चतम स्तर की तुलना में भारतीय शेयर बाजार के कई हिस्सों के वैल्यूएशन में उल्लेखनीय कमी आई है। 12 महीने के फॉरवर्ड P/E के आधार पर लार्ज-कैप और मिड-कैप वैल्यूएशन में क्रमशः 29% और 27% की गिरावट आई है। वहीं स्मॉल-कैप वैल्यूएशन में करीब 4% की कमी हुई है।
Nifty-50 फिलहाल अपने सितंबर 2024 के उच्चतम स्तर से करीब 12% नीचे है। खास बात यह है कि इंडेक्स अपने लंबे समय के औसत वैल्यूएशन से भी करीब 16% नीचे कारोबार कर रहा है।
हालांकि मिड-कैप और स्मॉल-कैप में तस्वीर अलग है। ये दोनों अपने दीर्घकालिक औसत से क्रमशः करीब 4% और 27% ऊपर बने हुए हैं। ऐसे में पूरे बाजार के बजाय अलग-अलग सेक्टर और कंपनियों के स्तर पर अवसर तलाशने की जरूरत अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।
किन सेक्टरों ने किया बेहतर प्रदर्शन?
पिछले दो वर्षों के दौरान बाजार में सेक्टर रोटेशन देखने को मिला है। कुछ क्षेत्रों ने जहां दबाव के बावजूद बेहतर प्रदर्शन किया, वहीं कई प्रमुख सेक्टरों में गिरावट दर्ज की गई।
MOFSL के आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि में:
- डिफेंस: +19%
- मेटल्स: +14%
- PSU बैंक: +10%
- टेक्नोलॉजी: -18%
- कंज्यूमर: -17%
- मीडिया: -15%
- रियल एस्टेट: -12%
इससे संकेत मिलता है कि बाजार में निवेश का रुख एक समान नहीं रहा है और अलग-अलग सेक्टरों में प्रदर्शन के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला है।
विदेशी बिकवाली के बावजूद घरेलू निवेश मजबूत
भारतीय शेयर बाजार को सबसे बड़ा सहारा घरेलू निवेशकों से मिलता दिखाई दे रहा है। MOFSL के अनुसार पिछले 24 महीनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII का आउटफ्लो करीब 56 अरब डॉलर रहा, जबकि इसी अवधि में घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII ने करीब 177 अरब डॉलर का निवेश किया।
SIP के जरिए हर महीने बढ़ता निवेश भी घरेलू बाजार में लिक्विडिटी को सहारा दे रहा है। यानी विदेशी पूंजी के दबाव के बावजूद घरेलू निवेशकों की भागीदारी बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बनी हुई है।
प्राइमरी मार्केट में भी गतिविधियां तेज रही हैं। अप्रैल 2023 से सितंबर 2026 के बीच IPO, FPO, OFS और QIP के माध्यम से करीब ₹10.1 लाख करोड़ जुटाए गए। यह आंकड़ा बताता है कि कंपनियों के नए इक्विटी इश्यू में निवेशकों की भागीदारी लगातार बनी रही है।
कमाई बढ़ने की उम्मीद से बाजार को मिल रहा सहारा
MOFSL ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को भी शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण आधार बताया है। रिपोर्ट में FY27 की पहली तिमाही में 7.8% GDP ग्रोथ, मजबूत GST संग्रह, अच्छी क्रेडिट ग्रोथ और ऑटोमोबाइल बिक्री में मजबूती जैसे संकेतकों का उल्लेख किया गया है।
इसके अलावा FY25 के निचले स्तरों के बाद कॉरपोरेट कमाई में सुधार भी दिखाई दिया है। MOFSL का अनुमान है कि FY26 से FY28E के दौरान उसके कवरेज यूनिवर्स और Nifty दोनों का नेट प्रॉफिट CAGR करीब 16% रह सकता है।
ब्रॉडर मार्केट में कमाई की तस्वीर और मजबूत रहने का अनुमान है। इसी अवधि में Nifty-50, Nifty Midcap-150 और Nifty Smallcap-250 की कमाई क्रमशः 16%, 17% और 27% CAGR की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक Nifty-500 में शामिल करीब 70% कंपनियों के अगले दो वर्षों में 15% से अधिक कमाई CAGR दर्ज करने की उम्मीद है। पिछले दो वर्षों में ऐसी कंपनियों का अनुपात करीब 48% था।
शेयर बाजार में निवेश के साथ इन जोखिमों पर भी नजर
MOFSL का आकलन पूरी तरह एकतरफा नहीं है। रिपोर्ट में वैश्विक स्तर पर कई ऐसे जोखिमों की ओर भी ध्यान दिलाया गया है, जो भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा सकते हैं।
इनमें वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, ब्याज दरों में दोबारा वृद्धि की संभावना, भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और FII की संभावित बिकवाली प्रमुख हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक भारत में ब्याज दरों में बढ़ोतरी का चक्र अपेक्षाकृत हल्का रह सकता है। लेकिन यदि वैश्विक बॉन्ड यील्ड लगातार बढ़ती है, तो इससे बाजार में अस्थिरता बढ़ने की आशंका बनी रहेगी।
बाजार में अब Bottom-Up निवेश रणनीति पर जोर
MOFSL के समग्र आकलन में बेहतर वैल्यूएशन, कमाई में संभावित वृद्धि, मजबूत घरेलू लिक्विडिटी और आर्थिक फंडामेंटल्स भारतीय इक्विटी बाजार के जोखिम-लाभ समीकरण को पहले की तुलना में बेहतर बनाते हैं।
हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि बाजार में सभी शेयर या सभी सेक्टर एक समान अवसर दे रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार अलग-अलग कंपनियों और सेक्टरों में कमाई की संभावनाओं में अंतर रहने की उम्मीद है। ऐसे माहौल में बाजार का प्रदर्शन अधिक Bottom-Up यानी कंपनी और उसके कमाई के आधार पर तय होने की संभावना है।
इसलिए निवेशकों के लिए केवल बाजार की दिशा देखने के बजाय कंपनियों की कमाई, वैल्यूएशन, सेक्टर की स्थिति और वैश्विक जोखिमों को भी साथ में देखना महत्वपूर्ण होगा। MOFSL की रिपोर्ट बाजार के मौजूदा स्तरों को लेकर सकारात्मक जोखिम-लाभ संकेत जरूर देती है, लेकिन निवेश का फैसला व्यक्ति की जोखिम क्षमता और वित्तीय स्थिति के अनुरूप होना चाहिए।













