नई दिल्ली/6 अक्टूबर 2026: भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के तहत केंद्र सरकार ने परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में एक अहम संस्थागत बदलाव को मंजूरी दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट एंड लॉजिस्टिक्स अथॉरिटी (ITLA) की स्थापना को हरी झंडी दे दी है। सरकार का मानना है कि एकीकृत व्यवस्था से अलग-अलग परिवहन माध्यमों के बीच बेहतर तालमेल बनेगा, बुनियादी ढांचे की क्षमता का अधिक प्रभावी इस्तेमाल होगा और देश में लॉजिस्टिक्स की लागत घटाने में मदद मिलेगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला लिया गया। प्रस्तावित प्राधिकरण वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन काम करेगा।
ITLA क्या करेगा और इसकी जरूरत क्यों पड़ी?
अभी सड़क, रेलवे, बंदरगाह, जहाजरानी, नागरिक उड्डयन, अंतर्देशीय जलमार्ग और शहरी परिवहन जैसे क्षेत्र अलग-अलग मंत्रालयों और एजेंसियों के दायरे में आते हैं। ऐसे में किसी बड़े परिवहन प्रोजेक्ट को जमीन पर उतारने के दौरान कई स्तरों पर समन्वय की जरूरत पड़ती है।
सरकार का उद्देश्य इसी बिखरी हुई व्यवस्था के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है। ITLA को परिवहन और लॉजिस्टिक्स की योजना, अनुसंधान, परियोजना मूल्यांकन, निगरानी, नीतिगत सहयोग और डेटा विश्लेषण के लिए शीर्ष संस्था के तौर पर विकसित किया जाएगा।
यह व्यवस्था खासतौर पर भारत के Vision 2047 के तहत बहुआयामी कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को एक दिशा देने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
500 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं पर रहेगी नजर
ITLA को स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) के रूप में गठित किया जाएगा। यह केंद्र सरकार की 500 करोड़ रुपये या उससे अधिक लागत वाली संबंधित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का तकनीकी मूल्यांकन करेगा।
इन परियोजनाओं का वित्तीय मूल्यांकन मौजूदा वित्तीय मूल्यांकन व्यवस्था के तहत ही जारी रहेगा। हालांकि, परियोजना के क्रियान्वयन की निगरानी ITLA करेगा और अलग-अलग एजेंसियों के बीच आने वाली अड़चनों को दूर करने के लिए समन्वित व्यवस्था उपलब्ध कराएगा।
इतना ही नहीं, परियोजना पूरी होने के बाद उसके प्रभाव का आकलन भी किया जाएगा। यानी फोकस केवल सड़क, रेल लाइन या अन्य बुनियादी ढांचा तैयार करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह देखने की कोशिश होगी कि उस निवेश से वास्तविक आर्थिक और परिवहन लाभ कितना मिला।
बनेगा राष्ट्रीय परिवहन मास्टर प्लान
ITLA की एक बड़ी जिम्मेदारी राष्ट्रीय परिवहन मास्टर प्लान तैयार करना होगी। इसकी योजना अवधि 10 वर्ष या उससे अधिक रखी जाएगी।
इस मास्टर प्लान में देश के परिवहन नेटवर्क के अलग-अलग हिस्सों को एक साथ देखा जाएगा। इसमें मुख्य रूप से:
- सड़क परिवहन
- रेलवे
- बंदरगाह और जहाजरानी
- नागरिक उड्डयन
- अंतर्देशीय जलमार्ग
- तटीय जहाजरानी
- शहरी परिवहन
- लॉजिस्टिक्स व्यवस्था
को शामिल किया जाएगा।
इसके अलावा ITLA परिवहन क्षेत्र से जुड़े मंत्रालयों की करीब पांच साल की अल्पकालिक क्षेत्रीय योजनाओं और वार्षिक योजनाओं का भी आकलन करेगा। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना होगा कि छोटी अवधि की योजनाएं राष्ट्रीय परिवहन मास्टर प्लान की व्यापक दिशा के अनुरूप आगे बढ़ें।
लॉजिस्टिक्स लागत घटाने में मिलेगी मदद
भारत की अर्थव्यवस्था में माल की आवाजाही की गति और लागत दोनों का सीधा असर कारोबार की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर पड़ता है। किसी उत्पाद को कारखाने से बाजार तक पहुंचाने में सड़क, रेल, बंदरगाह और अन्य परिवहन साधनों के बीच जितना बेहतर तालमेल होगा, उतनी ही आपूर्ति श्रृंखला अधिक कुशल बन सकती है।
ITLA के जरिए सरकार इसी एकीकृत दृष्टिकोण को संस्थागत रूप देना चाहती है। अलग-अलग परिवहन माध्यमों की योजनाओं को एक साथ देखने से अवसंरचना में दोहराव कम करने और कनेक्टिविटी की कमियों को पहचानने में मदद मिलने की उम्मीद है।
GSTN, FASTag और GPS डेटा को जोड़ा जाएगा
ITLA के तहत राष्ट्रीय परिवहन डेटा भंडार विकसित करने की भी योजना है। इसके लिए विभिन्न मौजूदा डिजिटल प्रणालियों से परिवहन और लॉजिस्टिक्स से संबंधित डेटा लिया जाएगा।
इन स्रोतों में GSTN, ई-वे बिल, FASTag, वाहन संबंधी डेटा, GPS आधारित प्रणालियां और शहरी यातायात प्रबंधन प्रणालियां शामिल होंगी। उपलब्ध आंकड़ों को एकीकृत करके योजना निर्माण, परियोजनाओं की निगरानी और उनके प्रभाव का आकलन किया जाएगा।
सरकार के लिए यह डेटा व्यवस्था इसलिए भी महत्वपूर्ण होगी क्योंकि इससे परिवहन व्यवस्था को केवल अनुमान के आधार पर नहीं, बल्कि वास्तविक यातायात और लॉजिस्टिक्स डेटा के आधार पर बेहतर ढंग से योजनाबद्ध करने में मदद मिल सकती है।













