लखनऊ/6 अक्टूबर 2026: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 के बाद हुए बदलावों और तकनीकी क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों का उल्लेख करते हुए पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उस दौर में विकास की प्राथमिकताएं अलग थीं और प्रदेश की क्षमता का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाया। मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि “परिवारवाद ही विकास था, सैफई महोत्सव ही सांस्कृतिक उत्थान और माफियाकरण ही औद्योगिकीकरण का मॉडल बन गया था।”
परिवारवाद से तकनीकी विकास तक बदली प्राथमिकता
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में घोषणाएं तो होती थीं, लेकिन परियोजनाओं को जमीन पर उतारने में कठिनाइयां आती थीं। उनके मुताबिक, जब सरकार की चिंता प्रदेश से अधिक परिवार और निवेशक से अधिक अपराधियों को लेकर हो, तो नई तकनीकों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना मुश्किल होता है। ये टिप्पणियां मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों के संदर्भ में अपने सोशल मीडिया पोस्ट में की हैं।
योगी ने कहा कि उनकी सरकार ने विकास की प्राथमिकताओं में बदलाव किया है। उनके अनुसार, परिवार के विकास की जगह प्रदेश का विकास, अपराधियों के संरक्षण की जगह निवेशकों की सुरक्षा और पारंपरिक राजनीतिक प्राथमिकताओं की जगह तकनीक को महत्व दिया गया है।
उत्तर प्रदेश में मोबाइल से माइक्रोचिप तक की यात्रा
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश के तकनीकी और औद्योगिक विस्तार से जुड़े कई आंकड़े भी साझा किए। उनके मुताबिक, पिछले साढ़े नौ वर्षों में देश में बनने वाले मोबाइल फोन में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 60 प्रतिशत और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट के उत्पादन में करीब 55 प्रतिशत है।
उन्होंने बताया कि जेवर में 3,706 करोड़ रुपये की लागत से एचसीएल-फॉक्सकॉन की चिप इकाई स्थापित की जा रही है। इसके अलावा प्रदेश में 644 मेगावाट क्षमता के डेटा सेंटर के प्रस्ताव आ चुके हैं। वहीं राज्य में 24 हजार से अधिक स्टार्टअप और आठ यूनिकॉर्न होने की बात भी मुख्यमंत्री ने कही।
सेमीकंडक्टर परियोजना को लेकर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जेवर क्षेत्र में प्रस्तावित एचसीएल-फॉक्सकॉन परियोजना में डिस्प्ले ड्राइवर चिप्स से संबंधित उत्पादन क्षमता विकसित की जानी है।
यानी मुख्यमंत्री जिस बदलाव को रेखांकित कर रहे हैं, उसका क्रम मोबाइल फोन से इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट और अब सेमीकंडक्टर तक पहुंचने के रूप में सामने रखा गया है।
डेटा सेंटर से एआई सिटी तक की तैयारी
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के विस्तार के साथ डेटा सेंटर की जरूरत बढ़ी है। डेटा के बढ़ते इस्तेमाल के बीच उत्तर प्रदेश अब डेटा सेंटर से आगे एआई सिटी और डिजिटल अर्थव्यवस्था की दिशा में आधार तैयार कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने एआई-प्रज्ञा पहल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से 10 लाख युवाओं को नई और उभरती तकनीकों से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। उनका कहना है कि इससे तकनीकी क्षेत्र में युवाओं के लिए नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।
मुख्यमंत्री के इस बयान का मूल संदेश यही है कि उत्तर प्रदेश को केवल तकनीक के उपभोक्ता बाजार के रूप में नहीं, बल्कि तकनीक के उत्पादन और उससे जुड़े नए उद्योगों के केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। मंगलवार की पोस्ट में उन्होंने इसी बदलाव को 2017 के बाद की विकास यात्रा के रूप में प्रस्तुत किया।









