नई दिल्ली/24 अक्टूबर 2026। राजधानी दिल्ली में लगातार हो रहे विरोध-प्रदर्शनों और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को दिल्ली पुलिस मुख्यालय पहुंचकर कानून-व्यवस्था की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। यह दौरा ऐसे समय हुआ है, जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी दलों का विरोध जारी है और कांग्रेस समेत INDIA ब्लॉक ने 1 नवंबर को रामलीला मैदान में रैली करने की घोषणा की है। इस बीच, केंद्र सरकार ने दिल्ली में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की 273 कंपनियों की तैनाती 31 अक्टूबर तक बढ़ा दी है।
अमित शाह की दिल्ली पुलिस मुख्यालय में बैठक, सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार दोपहर दिल्ली पुलिस मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। बैठक का प्रमुख उद्देश्य राजधानी में कानून-व्यवस्था की स्थिति और पुलिस की तैयारियों की समीक्षा करना था। हाल के विरोध-प्रदर्शनों, सार्वजनिक सुरक्षा और पुलिस के सामने मौजूद चुनौतियों को लेकर भी चर्चा होने की जानकारी सामने आई है।
दिल्ली में पिछले कुछ समय से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के विरोध में विभिन्न राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों के प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान प्रमुख सरकारी संस्थानों और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है।
हालांकि, बैठक में दिए गए सभी निर्देशों का आधिकारिक विस्तृत विवरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। इसलिए गश्त बढ़ाने, सीसीटीवी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के जरिए निगरानी करने जैसे विशिष्ट निर्देशों को गृह मंत्री के पुष्ट आदेश के रूप में प्रस्तुत करने से पहले आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
दिल्ली में 273 CAPF कंपनियां 31 अक्टूबर तक रहेंगी तैनात
राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 273 केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) कंपनियों की तैनाती 31 अक्टूबर तक बढ़ा दी है। यह फैसला दिल्ली पुलिस की मांग और संभावित अचानक विरोध-प्रदर्शनों से जुड़ी खुफिया सूचनाओं के मद्देनजर लिया गया है।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इन 273 कंपनियों में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), सीमा सुरक्षा बल (BSF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), सशस्त्र सीमा बल (SSB), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) शामिल हैं।
तैनाती का विवरण इस प्रकार है:
- CRPF: 125 कंपनियां
- RAF: 20 कंपनियां
- BSF: 46 कंपनियां
- ITBP: 39 कंपनियां
- SSB: 31 कंपनियां
- CISF: 12 कंपनियां
इनमें CRPF की 20 महिला इकाइयां भी शामिल बताई गई हैं। केंद्रीय बल दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर राजधानी के विभिन्न हिस्सों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करेंगे। <FileCite ref_id=”turn342050search3″ />
गौरतलब है कि यह तैनाती पहले भी बढ़ाई गई थी। अधिकारियों के अनुसार, संवेदनशील स्थानों पर अचानक प्रदर्शन होने की आशंका को देखते हुए अतिरिक्त बलों की उपलब्धता जरूरी मानी गई है। 31 अक्टूबर के बाद सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के आधार पर तैनाती को लेकर आगे निर्णय लिया जा सकता है।
SIR के विरोध और मतदाता सूची पर सियासी टकराव
दिल्ली में जारी प्रदर्शनों की एक प्रमुख वजह मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण है। विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। विपक्षी दलों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई है।
दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज हो रही है। ऐसे में राजधानी में होने वाले प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण है।
दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैयारी का उद्देश्य संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बनाए रखना और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध रखना है। साथ ही, लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।
1 नवंबर को रामलीला मैदान में INDIA ब्लॉक की रैली
कांग्रेस और INDIA ब्लॉक में शामिल विपक्षी दलों ने 1 नवंबर को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली आयोजित करने की घोषणा की है। यह कार्यक्रम मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से जुड़ा है। <FileCite ref_id=”turn342050search6″ />
कांग्रेस सांसद जेबी माथेर के मुताबिक, रैली का निर्णय गठबंधन के सहयोगी दलों से चर्चा के बाद लिया गया है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर विपक्षी दलों के बीच मतभेद नहीं हैं और विभिन्न राजनीतिक दल संयुक्त रूप से अपनी मांग उठाएंगे।
विपक्ष इस कार्यक्रम के जरिए चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और लोकतंत्र की रक्षा का मुद्दा उठाने की तैयारी में है। हालांकि, रैली में शामिल होने वाले सभी दलों और प्रतिभागियों की अंतिम संख्या की पुष्टि कार्यक्रम के करीब ही हो सकेगी।
रैली से पहले दिल्ली में सुरक्षा और यातायात पर रहेगी नजर
रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली से पहले राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। बड़ी राजनीतिक सभाओं के दौरान भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा महत्वपूर्ण विषय होते हैं। ऐसे आयोजनों में पुलिस को सुरक्षा के साथ-साथ आम नागरिकों की आवाजाही का भी ध्यान रखना पड़ता है।
दिल्ली पुलिस के सामने चुनौती यह होगी कि किसी भी प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था कायम रहे और आम लोगों को अनावश्यक परेशानी न हो। बाजारों, सार्वजनिक परिवहन और प्रमुख मार्गों पर संभावित भीड़ को देखते हुए यातायात संबंधी व्यवस्थाएं भी अहम रहेंगी।
कुल मिलाकर, अमित शाह का दिल्ली पुलिस मुख्यालय दौरा और CAPF की तैनाती बढ़ाने का फैसला राजधानी में मौजूदा सुरक्षा तैयारियों के महत्व को रेखांकित करता है। अब 1 नवंबर की प्रस्तावित रैली से पहले प्रशासन की तैयारियों और राजनीतिक गतिविधियों पर नजर रहेगी।










