लखनऊ/24 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश में तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान और न्याय व्यवस्था को एक-दूसरे से जोड़ने की दिशा में शनिवार को अहम पहल की गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बंथरा स्थित उत्तर प्रदेश राज्य फॉरेंसिक विज्ञान संस्थान में आयोजित टेकसंगम अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन क्वांटम फॉरेंसिक और विधिक अनुपालन पर आधारित LEXQ उत्कृष्टता केंद्र का उद्घाटन किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते इस्तेमाल पर जोर देते हुए स्पष्ट कहा कि तकनीक इंसान की मददगार होनी चाहिए, उसकी निर्णायक नहीं। उन्होंने 2030 तक उत्तर प्रदेश में पांच गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने का लक्ष्य भी दोहराया।
LEXQ उत्कृष्टता केंद्र से फॉरेंसिक विज्ञान और न्याय व्यवस्था को मिलेगी नई दिशा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आधुनिक समय में न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कानून और विज्ञान के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। अपराधों की जांच में वैज्ञानिक साक्ष्यों, डिजिटल तकनीक और फॉरेंसिक विशेषज्ञता की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में LEXQ उत्कृष्टता केंद्र शोध, प्रशिक्षण और तकनीकी नवाचार के लिए महत्वपूर्ण मंच बन सकता है।
कार्यक्रम की शुरुआत एक वृत्तचित्र के प्रदर्शन से हुई। इसके बाद मुख्यमंत्री ने तकनीक के जिम्मेदार इस्तेमाल पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपयोगी साधन है, लेकिन उसके आधार पर मानवीय विवेक और निर्णय लेने की क्षमता को कमजोर नहीं पड़ने देना चाहिए।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, यदि इंसान हर काम के लिए तकनीक पर निर्भर होने लगे और अपने विवेक का इस्तेमाल कम कर दे, तो यही तकनीक भविष्य में चुनौती भी बन सकती है। इसलिए AI का उपयोग मानवीय क्षमता बढ़ाने और बेहतर निर्णय लेने में सहायता के लिए होना चाहिए।
AI पर निर्भरता नहीं, मानवीय विवेक को मिले प्राथमिकता
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि तकनीक की उपयोगिता इस बात से तय होगी कि उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक और साइबर फॉरेंसिक जैसी उभरती प्रौद्योगिकियां जांच प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बना सकती हैं। हालांकि, इनका इस्तेमाल जिम्मेदारी और स्पष्ट जवाबदेही के साथ किया जाना चाहिए।
आज अपराधों के तरीके बदल रहे हैं। डिजिटल धोखाधड़ी, साइबर अपराध और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां आ रही हैं। ऐसे में तकनीकी विशेषज्ञता और वैज्ञानिक जांच व्यवस्था को मजबूत करना महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन विषयों पर चर्चा होना प्रदेश में तकनीकी विकास की बदलती तस्वीर को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि एक दशक पहले उत्तर प्रदेश में इस तरह के आयोजन की कल्पना करना भी कठिन था।
2030 तक पांच गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश में डिजिटल बुनियादी ढांचे के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक पांच गीगावाट डेटा सेंटर क्षमता विकसित करना है। इसके लिए पांच बड़े डेटा सेंटर समूहों का नेटवर्क तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
डेटा सेंटर आधुनिक डिजिटल अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। सरकारी सेवाओं, ऑनलाइन कारोबार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और बड़े पैमाने पर डेटा के संग्रह एवं प्रसंस्करण के लिए इनकी जरूरत बढ़ रही है।
सरकार की योजना के तहत इस क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने, नवाचार को बढ़ावा देने और उद्योगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, निर्धारित लक्ष्य को हासिल करने के लिए निवेश, बिजली आपूर्ति, नेटवर्क कनेक्टिविटी और तकनीकी संसाधनों का विकास महत्वपूर्ण होगा।
वैज्ञानिक साक्ष्य से मजबूत होगी न्याय व्यवस्था
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि न्याय की विश्वसनीयता के लिए कानून और विज्ञान का एक-दूसरे का पूरक होना जरूरी है। उन्होंने एक पुराने आपराधिक मामले का उदाहरण देते हुए बताया कि लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद आरोपी को सजा दिलाने में कई दशक लग गए।
मुख्यमंत्री के अनुसार, वर्ष 1980 में हुए अपराध के मामले में वर्ष 2017 में कार्रवाई शुरू हुई। आरोपी को दूसरे राज्य में स्थानांतरित किए जाने के बाद उसे वापस लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। अंततः लगभग 42 वर्ष बाद सजा हो सकी।
उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में पीड़ित और उसके परिवार का न्याय व्यवस्था पर भरोसा कमजोर पड़ सकता है। वैज्ञानिक साक्ष्य, बेहतर जांच और आधुनिक फॉरेंसिक तकनीक न्यायिक प्रक्रिया को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
इस संदर्भ में LEXQ उत्कृष्टता केंद्र को कानून, सुरक्षा और फॉरेंसिक विज्ञान के बीच सहयोग बढ़ाने वाली पहल के रूप में देखा जा रहा है।
LEXQ केंद्र में प्रशिक्षण, शोध और नवाचार पर होगा जोर
मुख्यमंत्री ने बताया कि LEXQ उत्कृष्टता केंद्र में अल्प अवधि के व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू करने, संयुक्त शोध को प्रोत्साहित करने और उद्योग आधारित नवाचार उद्यमों को सहयोग देने की संभावनाएं विकसित की जाएंगी। इसके साथ नीतिगत सलाह और विशेषज्ञता के आदान-प्रदान पर भी काम किया जाएगा।
केंद्र के माध्यम से क्वांटम तकनीक को कानून, सुरक्षा और फॉरेंसिक विज्ञान से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। राष्ट्रीय क्वांटम मिशन में उत्तर प्रदेश की भूमिका मजबूत करने के साथ उद्योगों, शिक्षण संस्थानों, फॉरेंसिक विज्ञान सेवाओं और राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालयों को ज्ञान नेटवर्क से जोड़ने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य केवल नई तकनीक पर शोध करना नहीं, बल्कि उसके व्यावहारिक उपयोग के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञ तैयार करना भी है। इससे भविष्य में जांच एजेंसियों और न्याय व्यवस्था को तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
ऑपरेशन त्रिनेत्र और 112 का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 के बाद प्रदेश में कानून-व्यवस्था और तकनीकी निगरानी के क्षेत्र में हुए बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जिलों में नियंत्रण केंद्रों, ऑपरेशन त्रिनेत्र और आपातकालीन सेवा 112 के माध्यम से पुलिस व्यवस्था को तकनीकी रूप से मजबूत करने का प्रयास किया गया है।
उनके मुताबिक, निगरानी व्यवस्था और त्वरित पुलिस प्रतिक्रिया से सार्वजनिक सुरक्षा को बेहतर बनाने में मदद मिली है। सुरक्षित माहौल निवेश और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के लिए भी महत्वपूर्ण है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की आर्थिक स्थिति में बदलाव आया है और प्रदेश अब देश की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
‘AI in Construction’ पुस्तक का विमोचन
टेकसंगम सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘AI in Construction’ पुस्तक का विमोचन भी किया। कार्यक्रम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम तकनीक, साइबर फॉरेंसिक और डेटा संरक्षण जैसे विषयों पर चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि उत्तर प्रदेश राज्य फॉरेंसिक विज्ञान संस्थान के विद्यार्थी अपनी वैज्ञानिक क्षमता, प्रयोगशालाओं और आधुनिक तकनीक के माध्यम से अपराधों की जांच में योगदान देंगे।
निष्कर्ष: LEXQ उत्कृष्टता केंद्र का उद्घाटन उत्तर प्रदेश में तकनीक और न्याय व्यवस्था के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। AI के जिम्मेदार इस्तेमाल, वैज्ञानिक साक्ष्यों की विश्वसनीयता और डेटा सेंटर जैसे डिजिटल बुनियादी ढांचे पर सरकार का जोर आने वाले वर्षों में प्रदेश की तकनीकी क्षमता को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, इन पहलों का वास्तविक प्रभाव प्रशिक्षण, शोध, निवेश और तकनीक के व्यावहारिक इस्तेमाल के परिणामों से तय होगा।










