वाराणसी, 24 अक्टूबर 2026। बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में शनिवार को आसमान पर भारतीय वायुसेना की ताकत, तकनीक और शौर्य का अद्भुत संगम देखने को मिला। नमो घाट पर आयोजित एयर शो में राफेल, सुखोई-30 एमकेआई और स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस समेत कई विमानों ने हैरतअंगेज करतब दिखाए। पौराणिक नामों पर आधारित ‘काशी’, ‘केदार’, ‘हनुमान’, ‘त्रिनेत्र’ और ‘महादेव’ जैसे फॉर्मेशन ने कार्यक्रम को खास बना दिया। हवा में ईंधन भरने की प्रक्रिया के प्रदर्शन ने दर्शकों का ध्यान खींचा, वहीं गरुड़ कमांडो के अनुशासित प्रदर्शन और सूर्यकिरण टीम की एरोबैटिक प्रस्तुति ने रोमांच को चरम पर पहुंचा दिया।
सुबह से ही नमो घाट पर लोगों की भीड़ जुटने लगी थी। प्रवेश द्वार के बाहर लंबी कतारें लगी थीं और अंदर दर्शक अपनी जगह लेकर आसमान की ओर टकटकी लगाए इंतजार कर रहे थे। सुबह 11 बजे तक घाट का बड़ा हिस्सा भर चुका था। जैसे ही एयर शो शुरू होने की घोषणा हुई, लोगों ने हर-हर महादेव के जयकारे लगाकर वायुसेना के जांबाजों का उत्साह बढ़ाया।
गरुड़ कमांडो के प्रदर्शन से हुआ एयर शो का आगाज
एयर शो की शुरुआत हेलीकॉप्टरों के प्रदर्शन से हुई। कार्यक्रम के दौरान हेलीकॉप्टर से रस्सी के सहारे नीचे उतरते गरुड़ कमांडो ने अनुशासन, साहस और टीमवर्क का प्रदर्शन किया। इस दृश्य ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया।
इसके बाद ‘काशी’ फॉर्मेशन में तीन विमानों ने उड़ान भरी। कुछ ही देर में राफेल लड़ाकू विमानों ने ‘केदार’ फॉर्मेशन बनाकर आसमान में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। तेज गति से उड़ान, ऊर्ध्वाधर करतब और तीखे मोड़ों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम के अगले चरण में ‘सारनाथ’ फॉर्मेशन के तहत विमानों ने 360 डिग्री टर्न और एरियल सैल्यूट का प्रदर्शन किया। इस प्रस्तुति में काशी की सांस्कृतिक विरासत और भारतीय वायुसेना की आधुनिक शक्ति को एक साथ जोड़ने का प्रयास नजर आया।
सुखोई-30 के ‘हनुमान’ फॉर्मेशन ने बढ़ाया रोमांच
दोपहर करीब 12 बजे सुखोई-30 एमकेआई ने ‘हनुमान’ फॉर्मेशन के तहत आसमान में प्रवेश किया। विमानों के बीच सटीक तालमेल, लूप और अन्य जटिल हवाई करतबों ने दर्शकों का ध्यान खींचा।
प्रस्तुति के दौरान मां गंगा को नमन करने की थीम भी दिखाई गई। हनुमान चालीसा की चौपाइयों और भक्ति संगीत के बीच विमानन कौशल का प्रदर्शन काशी के माहौल के अनुरूप नजर आया। धार्मिक आस्था और सैन्य क्षमता के इस मेल पर दर्शकों ने तालियों और जयकारों से प्रतिक्रिया दी।
‘सारंग’ और स्वदेशी तेजस ने दिखाया दम
दोपहर 12:08 से 12:25 बजे के बीच भारतीय वायुसेना की सारंग हेलीकॉप्टर एरोबैटिक टीम ने आसमान में रंगीन धुएं के साथ तिरंगे की छटा बिखेरी। स्वदेशी ध्रुव हेलीकॉप्टरों की टीम ने भी बेहतरीन तालमेल और सामूहिक उड़ान कौशल का प्रदर्शन किया।
इसके बाद करीब 12:41 बजे स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस ने एयर शो में हिस्सा लिया। तेजस के करतबों के दौरान दर्शकों में खास उत्साह दिखाई दिया। विमान ने तेज मोड़, रोल और अन्य एरोबैटिक मूवमेंट के जरिए अपनी उड़ान क्षमता का प्रदर्शन किया। संगीत की धुन के बीच तेजस की प्रस्तुति ने काशीवासियों को रोमांचित कर दिया।
‘ओंकार’ से ‘त्रिदेव’ तक दिखा भारतीय सैन्य शक्ति का संगम
एयर शो का दूसरा चरण दोपहर करीब 1:07 बजे शुरू हुआ। तीन हेलीकॉप्टरों ने ‘ओंकार’ फॉर्मेशन बनाया और तिरंगे के साथ प्रस्तुति दी। इसके बाद ‘त्रिदेव’ फॉर्मेशन के जरिए थल, नौ और वायुसेना के बीच समन्वय की थीम को प्रदर्शित किया गया।
‘अलकनंदा’ फॉर्मेशन के तहत चिनूक हेलीकॉप्टर ने आसमान में ‘94’ की आकृति बनाई। इस तरह के विशेष फॉर्मेशन ने दर्शकों के लिए एयर शो को केवल हवाई करतबों तक सीमित न रखकर एक यादगार दृश्य अनुभव बना दिया।
‘महादेव’ फॉर्मेशन में हवा में ईंधन भरने का प्रदर्शन
कार्यक्रम के सबसे आकर्षक दृश्यों में हवा में ईंधन भरने की प्रक्रिया का प्रदर्शन शामिल रहा। दोपहर करीब 1:17 बजे सी-295 और डोर्नियर-228 विमानों ने ‘भैरव’ फॉर्मेशन बनाया। इसके बाद सी-130 हरक्यूलिस और मिग-29 ने क्रमशः ‘कैलाश’ और ‘त्रिलोचन’ फॉर्मेशन के जरिए अपनी क्षमताएं दिखाईं।
इसी चरण में आईएल-78 एयर टैंकर और मिराज-2000 के जरिए हवा में ईंधन भरने की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया, जिसे ‘महादेव’ फॉर्मेशन से जोड़ा गया। हवा में उड़ते विमानों के बीच ईंधन भरना सैन्य विमानन की जटिल क्षमताओं में से एक है। इस तकनीक से लंबी दूरी के अभियानों में लड़ाकू विमानों की परिचालन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है।
राफेल और सुखोई की प्रस्तुति में दिखा हवाई युद्ध कौशल
दोपहर करीब 1:28 बजे राफेल और सुखोई विमानों ने ‘प्रचंड’ फॉर्मेशन के जरिए आसमान में तालमेल का प्रदर्शन किया। इसके बाद तीन राफेल विमानों ने ‘नीलकंठ’ और ‘शिव’ फॉर्मेशन के तहत हवाई युद्ध जैसी परिस्थितियों में इस्तेमाल होने वाले कौशल का प्रदर्शन किया।
डॉगफाइट शैली की इस प्रस्तुति में विमानों की दिशा बदलने, एक-दूसरे के साथ तालमेल बनाने और हवा में तेजी से पोजिशन बदलने की क्षमता दिखाई गई। दर्शकों के लिए यह हिस्सा एयर शो के सबसे रोमांचक दृश्यों में शामिल रहा।
सूर्यकिरण टीम ने तिरंगे की छटा के साथ किया समापन
एयर शो के अंतिम चरण में दोपहर करीब 1:42 बजे सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम के नौ विमानों ने आसमान में सामूहिक करतब दिखाए। टीम ने ‘वी-विजय’ फॉर्मेशन समेत विभिन्न हवाई संरचनाओं के जरिए अपनी सटीक उड़ान और तालमेल का प्रदर्शन किया।
रंगीन धुएं से आसमान में तिरंगे की छटा उभरी तो नमो घाट पर मौजूद दर्शकों ने जोरदार जयकारे लगाए। सूर्यकिरण टीम की प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
काशी की आस्था और वायुसेना के शौर्य का यादगार संगम
वाराणसी के नमो घाट पर आयोजित एयर शो में पौराणिक नामों से जुड़े फॉर्मेशन, आधुनिक लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टरों की टीम और हवा में ईंधन भरने जैसी तकनीकी क्षमताओं ने दर्शकों को एक साथ कई अनुभव दिए। कार्यक्रम ने काशी की सांस्कृतिक पहचान और भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता को एक मंच पर प्रस्तुत किया।
सुबह से दोपहर तक आसमान में गूंजते विमानों और घाट पर उठते हर-हर महादेव के जयकारों ने इस आयोजन को यादगार बना दिया।










