लखनऊ/30 अक्टूबर 2026: लखनऊ में भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 का सियासी एजेंडा साफ कर दिया। करीब 37 मिनट के संबोधन में उन्होंने सरकार की उपलब्धियों से ज्यादा संगठन और कार्यकर्ताओं की ताकत पर जोर दिया। शाह ने कार्यकर्ताओं से कहा कि चुनाव सरकार और नेताओं के भरोसे नहीं, बल्कि जमीन पर मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं के दम पर जीते जाते हैं। उन्होंने नाराजगी और गिले-शिकवे भुलाकर तीसरी बार प्रदेश में भाजपा की सरकार बनाने के लिए अभी से जुटने का आह्वान किया।
अमित शाह का संदेश साफ था कि अब चुनावी तैयारी का समय आ गया है। कार्यकर्ताओं को जनता के बीच जाकर सरकार के कामकाज और योजनाओं की जानकारी देनी होगी। साथ ही विपक्ष के आरोपों का जवाब देने और बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी भी उठानी होगी।
नाराजगी छोड़िए, 2027 में कमल खिलाने के लिए जुट जाइए
अमित शाह ने अपने संबोधन में कार्यकर्ताओं को पार्टी की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए उन्हें संगठन का मालिक कहा। उन्होंने दो टूक अंदाज में कहा कि व्यक्तिगत नाराजगी, निराशा और आपसी गिले-शिकवे अब पीछे छोड़ने होंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से यहां तक कहा कि अपनी सारी नाराजगी और शिकायतें गोमती नदी में डाल दीजिए और भाजपा की जीत के लक्ष्य के साथ मैदान में उतर जाइए।
उनके संबोधन का केंद्र 2027 का विधानसभा चुनाव रहा। शाह ने स्पष्ट किया कि भाजपा को लगातार तीसरी बार सत्ता में पहुंचाने के लिए केवल सरकार की उपलब्धियां पर्याप्त नहीं होंगी। इसके लिए संगठन के प्रत्येक कार्यकर्ता को अपनी भूमिका निभानी होगी। बूथ पर सक्रियता, जनता से सीधा संवाद और पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने की जिम्मेदारी कार्यकर्ताओं को ही उठानी होगी।
कार्यकर्ताओं की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर भी बोले अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री ने संगठन में कार्यकर्ताओं की भूमिका और उनकी अपेक्षाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किसी कार्यकर्ता की इच्छा मंत्री बनने की हो सकती है, लेकिन उसे राज्यमंत्री का दायित्व मिला हो। कोई कैबिनेट मंत्री बनना चाहता हो, किसी की सांसद बनने की आकांक्षा रही हो और उसे जिला पंचायत सदस्य की जिम्मेदारी मिली हो।
शाह ने कहा कि इसके बावजूद भाजपा ने कार्यकर्ताओं को संगठन और सरकार में सबसे अधिक अवसर देने का काम किया है। उत्तर प्रदेश में तो कार्यकर्ताओं का समायोजन विशेष रूप से बड़े स्तर पर हुआ है। उन्होंने व्यक्तिगत पद और महत्वाकांक्षा से ऊपर पार्टी की जीत को रखने की नसीहत दी। उनका संकेत साफ था कि संगठन में हर व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन चुनाव के समय सभी का लक्ष्य एक होना चाहिए।
जातिवाद, परिवारवाद और भ्रष्टाचार को बताया राजनीति के तीन राहु
अमित शाह ने जातिवाद, परिवारवाद और भ्रष्टाचार को देश की राजनीति के लिए तीन राहु करार दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा में बड़े से बड़ा नेता भी सबसे पहले एक कार्यकर्ता है। पार्टी की असली ताकत उसका संगठन और कार्यकर्ताओं का परिश्रम है।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से मतदाताओं के बीच लगातार सक्रिय रहने और केंद्र तथा प्रदेश सरकार की नीतियों एवं उपलब्धियों को आम लोगों तक पहुंचाने की अपील की। शाह ने यह भी संदेश दिया कि विपक्ष के आरोपों का जवाब तथ्यों के आधार पर जनता के बीच दिया जाना चाहिए।
बूथ से लेकर सामाजिक समीकरणों तक भाजपा का मिशन-2027
भाजपा ने विधानसभा चुनाव 2027 को ध्यान में रखते हुए संगठनात्मक तैयारियों पर भी जोर देना शुरू कर दिया है। इसके तहत पांच प्रमुख मोर्चों पर काम करने की रणनीति तैयार की गई है।
- बूथ समितियों को सक्रिय करना: प्रत्येक बूथ पर संगठन की मौजूदगी और कार्यकर्ताओं की सक्रियता सुनिश्चित करना।
- आपसी संवाद और समन्वय: बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच नियमित संपर्क बनाए रखना।
- संगठन की समीक्षा: मंडल और जिला स्तर पर नियमित बैठकें आयोजित कर तैयारियों का आकलन करना।
- नए सामाजिक वर्गों तक पहुंच: युवाओं, महिलाओं, उद्यमियों और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं के बीच पार्टी का जनसंपर्क बढ़ाना।
- कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण: संगठनात्मक जिम्मेदारियों और सरकार की योजनाओं की जानकारी देकर कार्यकर्ताओं को चुनाव के लिए तैयार करना।
इसके अलावा सामाजिक समरसता और सर्वसमावेशी विकास को भी चुनावी रणनीति का हिस्सा बनाया गया है। पार्टी कार्यकर्ताओं को अलग-अलग सामाजिक वर्गों के बीच जाकर उनकी समस्याएं समझने और सरकार की योजनाओं की जानकारी देने पर जोर दिया गया।
41 से 312 सीटों तक का सफर याद दिलाकर कार्यकर्ताओं में भरा उत्साह
अमित शाह ने उत्तर प्रदेश में भाजपा के राजनीतिक विस्तार का जिक्र करते हुए अपने प्रदेश प्रभारी के कार्यकाल को याद किया। उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की ऐतिहासिक सफलता का उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उत्तर प्रदेश की 80 में से 71 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वहीं, सहयोगी अपना दल को दो सीटें मिली थीं। इस तरह एनडीए ने कुल 73 सीटों पर कब्जा जमाया था। भाजपा का मत प्रतिशत भी लगभग 42.6 फीसदी रहा था।
शाह ने 2017 के विधानसभा चुनाव का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भी राजनीतिक विरोधियों को भरोसा था कि भाजपा सत्ता तक नहीं पहुंच पाएगी। नोटबंदी के बाद विपक्ष को लग रहा था कि चुनावी समीकरण उसके पक्ष में रहेंगे, लेकिन कार्यकर्ताओं की मेहनत ने सारे राजनीतिक आकलन बदल दिए।
भाजपा ने 403 सदस्यीय विधानसभा में 312 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। अमित शाह ने इन सफलताओं का श्रेय संगठन की मजबूती और कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम को दिया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की राजनीतिक यात्रा कार्यकर्ताओं की मेहनत से आगे बढ़ी है और 2027 में भी इसी ताकत के साथ चुनावी मैदान में उतरना होगा।
2027 के लिए अमित शाह का संदेश: संगठन की जीत ही सर्वोपरि
लखनऊ में अमित शाह का करीब 37 मिनट का संबोधन भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए चुनावी तैयारी का स्पष्ट संदेश लेकर आया। उन्होंने पद, प्रतिष्ठा और व्यक्तिगत अपेक्षाओं से ऊपर संगठन को रखने की बात कही। साथ ही बूथ स्तर तक पार्टी को मजबूत बनाने और जनता के बीच लगातार सक्रिय रहने का आह्वान किया।
कुल मिलाकर, भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक से पार्टी ने मिशन-2027 की तैयारियों को गति देने का संकेत दिया है। अमित शाह ने कार्यकर्ताओं को यह याद दिलाया कि चुनावी राजनीति में संगठन की असली परीक्षा मैदान में होती है। ऐसे में आने वाले समय में भाजपा की रणनीति का केंद्र बूथ प्रबंधन, जनसंपर्क और कार्यकर्ताओं की सक्रियता रहने वाला है।









