नई दिल्ली/3 नवंबर 2026। दिल्ली-एनसीआर में दिवाली पर ग्रीन पटाखे चलाने की सशर्त अनुमति के बीच बाजारों में पटाखों की खुलेआम बिक्री को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। प्रतिबंध के बावजूद दिल्ली की दुकानों पर विभिन्न प्रकार के पटाखे उपलब्ध होने संबंधी मीडिया रिपोर्टों पर संज्ञान लेते हुए शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को अपने आदेश का प्रभावी ढंग से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने अखबार में प्रकाशित तस्वीरों का हवाला देते हुए कहा कि आदेश के बावजूद दुकानों पर हर तरह के पटाखे बेचे जा रहे हैं।
मंगलवार को न्यायमूर्ति एमएम सुंद्रेश और न्यायमूर्ति पीबी वराले की पीठ ने एक अंग्रेजी दैनिक में प्रकाशित खबर और तस्वीरों पर ध्यान दिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट में मौजूद अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से पीठ ने कहा कि वह इस मामले को देखें और आदेश के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाएं।
अखबार में छपी तस्वीर का उल्लेख करते हुए पीठ ने कहा कि रिपोर्ट में दिखाया गया है कि पिछले दिन के आदेश के बावजूद दुकानों पर सब कुछ उपलब्ध है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस स्थिति पर गंभीरता से ध्यान देने को कहा।
दिल्ली में पटाखों की खुली बिक्री पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, ग्रीन पटाखों के लिए तय हैं नियम
सुप्रीम कोर्ट ने 29 अक्टूबर को दिए अपने आदेश में दिल्ली-एनसीआर में दिवाली के दौरान सीमित समय के लिए ग्रीन पटाखे चलाने की अनुमति दी थी। आदेश की प्रति सोमवार को उपलब्ध हुई। अदालत ने स्पष्ट किया था कि यह छूट केवल दो दिन और निर्धारित समय के लिए ही लागू रहेगी।
कोर्ट के आदेश के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में 7 और 8 नवंबर को सुबह 6 से 7 बजे तथा रात 8 से 10 बजे तक ही स्वीकृत ग्रीन पटाखे चलाए जा सकेंगे। इसके अलावा अस्पतालों, नर्सिंग होम, स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों, स्कूलों और अधिसूचित शांत क्षेत्रों के 300 मीटर के दायरे में पटाखे जलाने पर पूरी तरह रोक रहेगी।
9 नवंबर से पटाखों पर पहले लगाया गया पूर्ण प्रतिबंध फिर प्रभावी हो जाएगा। यानी दिवाली के अवसर पर पटाखे चलाने की अनुमति स्थायी राहत नहीं, बल्कि निर्धारित शर्तों के साथ दी गई सीमित छूट है।
पूर्ण प्रतिबंध पर भी कोर्ट ने रखी अपनी बात
सुप्रीम कोर्ट ने अपने पिछले आदेश में माना था कि पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना समस्या का आदर्श समाधान हो सकता है। हालांकि, अदालत के पास फिलहाल यह तय करने के लिए पर्याप्त आंकड़े नहीं हैं कि पटाखों पर पूरी तरह रोक लगाना पर्यावरण प्रदूषण की समस्या से निपटने का सबसे बेहतर विकल्प होगा या नहीं।
अदालत ने पटाखों पर रोक लगाने के पूर्व आदेशों और अधिकारियों की ओर से किए गए उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन में कमी को लेकर भी चिंता जताई थी। कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि पटाखे जलाने से निश्चित रूप से प्रदूषण होता है।
ग्रीन पटाखों के निर्माण और बिक्री के लिए भी तय की गई शर्तें
सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों के निर्माण और बिक्री को लेकर भी कई शर्तें निर्धारित की थीं। आदेश के अनुसार, केवल सीएसआईआर-नीरी (CSIR-NEERI) और पीईएसओ (PESO) से प्रमाणित निर्माता ही 2 से 6 नवंबर तक स्वीकृत ग्रीन पटाखों का निर्माण कर सकेंगे।
पटाखों के प्रत्येक डिब्बे पर उत्पाद और बैच के अनुसार क्यूआर कोड लगाना अनिवार्य होगा। इस कोड को स्कैन करने पर निर्माता के पंजीकरण, लाइसेंस, फॉर्मूलेशन और परीक्षण प्रमाणपत्र से जुड़ी जानकारी उपलब्ध होनी चाहिए। इससे पटाखों की वैधता और प्रमाणन की जांच करना आसान होगा।
अदालत ने पटाखों की ऑनलाइन बिक्री, बेरियम वाले पटाखों तथा लड़ियों के निर्माण और बिक्री पर रोक बरकरार रखी है। जिला प्रशासन और पुलिस को बिक्री के लिए निर्धारित स्थान तय करने, गश्ती दल गठित करने और अवैध पटाखों की आवाजाही रोकने के निर्देश भी दिए गए थे।
प्रदूषण की निगरानी और अस्पतालों से भी मांगी गई रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली के दौरान प्रदूषण की स्थिति पर नजर रखने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) को दिवाली से पहले, दिवाली के दौरान और बाद में वायु गुणवत्ता की निगरानी कर रिपोर्ट तैयार करने को कहा था।
इसके साथ ही दिल्ली-एनसीआर के अस्पतालों से प्रदूषण के कारण मरीजों की संख्या में होने वाली वृद्धि के आंकड़े भी मांगे गए थे। संबंधित राज्यों को 14 दिसंबर तक आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट अदालत में दाखिल करनी होगी।
पटाखों की बिक्री पर कोर्ट की ताजा टिप्पणी से साफ है कि केवल आदेश जारी करना पर्याप्त नहीं है। बाजारों में नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी जिम्मेदारी संबंधित प्रशासन और पुलिस की भी है। दिवाली के दौरान प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए अदालत ने जो सीमित छूट दी है, उसका वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।












