नई दिल्ली/4 नवंबर 2026: भारत की ऊर्जा जरूरतें तेजी से बढ़ रही हैं। एक ओर देश में सौर और पवन ऊर्जा का विस्तार हो रहा है, तो दूसरी ओर बिजली की मांग और ऊर्जा भंडारण की जरूरत भी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में केंद्र सरकार ने ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में 17,314 करोड़ रुपये की दो महत्वपूर्ण योजनाओं को मंजूरी दी गई। इनमें 92 गीगावाट-घंटे (GWh) की ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने के लिए 14,500 करोड़ रुपये का व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) और महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए 2,814 करोड़ रुपये की योजना शामिल है।
इन फैसलों का उद्देश्य केवल बिजली उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि ऊर्जा को सुरक्षित रखने, जरूरत के समय उपलब्ध कराने और आधुनिक तकनीक के लिए जरूरी खनिजों की घरेलू आपूर्ति मजबूत करना भी है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी।
सरकार की ये पहलें भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य की दिशा में अहम मानी जा रही हैं।
14,500 करोड़ रुपये की ऊर्जा भंडारण योजना का क्या है लक्ष्य?
कैबिनेट ने ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए 14,500 करोड़ रुपये के व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत 92 GWh ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
नवीकरणीय ऊर्जा का उत्पादन मौसम और प्राकृतिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है। सौर ऊर्जा दिन में अधिक उपलब्ध होती है, जबकि बिजली की मांग कई बार शाम और रात में बढ़ जाती है। ऐसे में ऊर्जा भंडारण प्रणालियां अतिरिक्त बिजली को सुरक्षित रखकर जरूरत के समय इस्तेमाल करने में मदद करती हैं।
योजना के तहत तीन तरह की भंडारण प्रौद्योगिकियों पर ध्यान दिया जाएगा:
- बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS): 30 GWh क्षमता।
- पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएं: 60 GWh क्षमता।
- उभरती ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकियां: 2 GW क्षमता।
सरकार का उद्देश्य इन परियोजनाओं को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाना है, ताकि निवेश आकर्षित हो और देश में ऊर्जा भंडारण का बुनियादी ढांचा तेजी से विकसित किया जा सके।
व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (VGF) क्या है? आसान भाषा में समझें
ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं में शुरुआती निवेश काफी अधिक होता है। कई बार परियोजनाएं तकनीकी रूप से उपयोगी होने के बावजूद लागत के कारण निजी निवेशकों के लिए आकर्षक नहीं रह जातीं।
ऐसी स्थिति में सरकार व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण यानी Viability Gap Funding (VGF) के जरिए आर्थिक सहायता देती है। इसका उद्देश्य परियोजना की लागत और उसकी व्यावसायिक व्यवहार्यता के बीच के अंतर को कम करना है।
इससे निजी कंपनियों को निवेश के लिए प्रोत्साहन मिल सकता है और ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं का विकास तेजी से हो सकता है।
भारत के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि सौर और पवन ऊर्जा की उपलब्धता में उतार-चढ़ाव रहता है। बिजली को सुरक्षित रखने की क्षमता बढ़ने से ग्रिड पर दबाव कम करने और बिजली आपूर्ति को अधिक स्थिर बनाने में मदद मिल सकती है।
महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण योजना को भी मिली मंजूरी
ऊर्जा सुरक्षा के लिए केवल बिजली का उत्पादन और भंडारण पर्याप्त नहीं है। आधुनिक ऊर्जा तकनीकों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले खनिजों की उपलब्धता भी उतनी ही जरूरी है।
इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 2,814 करोड़ रुपये की महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण योजना को मंजूरी दी है।
इस योजना के तहत लिथियम और निकेल जैसे खनिजों के प्रसंस्करण की घरेलू क्षमता विकसित की जाएगी। इन खनिजों का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों, ऊर्जा भंडारण प्रणालियों और अन्य आधुनिक तकनीकों में होता है।
योजना के तहत पांच वर्षों में चार प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य है। इनमें दो लिथियम और दो निकेल के संयंत्र शामिल होंगे।
सरकार पात्र निवेश पर 30 प्रतिशत तक पूंजीगत सहायता देगी। इससे कंपनियों को नए संयंत्र स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।
भारत को क्या फायदा होगा?
- महत्वपूर्ण खनिजों के प्रसंस्करण में घरेलू क्षमता बढ़ेगी।
- इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी उद्योग को मजबूती मिल सकती है।
- विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
- रणनीतिक क्षेत्रों के लिए जरूरी संसाधनों की आपूर्ति बेहतर हो सकती है।
- देश में नई औद्योगिक परियोजनाओं और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है।
हालांकि, इस योजना का वास्तविक असर संयंत्रों के समय पर निर्माण, उत्पादन क्षमता और घरेलू बाजार में प्रसंस्कृत खनिजों की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।
VISTAR योजना: देश के सरकारी आंकड़ों की व्यवस्था भी होगी आधुनिक
कैबिनेट बैठक में ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े फैसलों के अलावा देश के आधिकारिक सांख्यिकी तंत्र को आधुनिक बनाने के लिए भी एक महत्वपूर्ण योजना को मंजूरी दी गई।
इस योजना का नाम ‘विकसित भारत इनिशिएटिव फॉर स्टैटिस्टिकल ट्रांसफॉर्मेशन, एनालिटिक्स एंड रिसर्च’ यानी VISTAR है। इसके लिए 4,371.1 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है। योजना को पांच वर्षों तक, 2030-31 तक लागू किया जाएगा।
इसका उद्देश्य देश की आधिकारिक सांख्यिकी व्यवस्था को अधिक आधुनिक, गतिशील और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाना है।
सरकार के अनुसार, इस योजना के तहत आंकड़ों को समय पर उपलब्ध कराने, उनकी विस्तृत जानकारी बढ़ाने और विभिन्न सरकारी डेटाबेस के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने पर जोर दिया जाएगा।
VISTAR योजना के प्रमुख उद्देश्य
- सरकारी आंकड़ों को अधिक समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराना।
- डेटा की विस्तृत जानकारी और गुणवत्ता में सुधार करना।
- अलग-अलग डेटाबेस के बीच बेहतर तालमेल और इंटरऑपरेबिलिटी विकसित करना।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल के लिए तैयार डेटाबेस विकसित करना।
- सांख्यिकी, विश्लेषण और शोध की क्षमता को मजबूत करना।
आज सरकारी योजनाओं के निर्माण से लेकर आर्थिक नीतियों और विकास परियोजनाओं तक, सटीक आंकड़ों की भूमिका बेहद अहम है। ऐसे में VISTAR योजना से भारत की आधिकारिक सांख्यिकी व्यवस्था को डिजिटल और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने की उम्मीद है।
17,314 करोड़ की योजनाओं के साथ VISTAR पर भी बड़ा निवेश
कैबिनेट के फैसलों में ऊर्जा सुरक्षा और सांख्यिकी व्यवस्था के आधुनिकीकरण, दोनों को महत्व दिया गया है।
| योजना | स्वीकृत राशि | प्रमुख उद्देश्य |
|---|---|---|
| ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण योजना | 14,500 करोड़ रुपये | 92 GWh ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करना |
| महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण योजना | 2,814 करोड़ रुपये | लिथियम और निकेल प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाना |
| VISTAR योजना | 4,371.1 करोड़ रुपये | आधिकारिक सांख्यिकी तंत्र का आधुनिकीकरण |
पहली दो योजनाओं का कुल वित्तीय प्रावधान 17,314 करोड़ रुपये है। VISTAR योजना इसके अतिरिक्त है।
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। ऊर्जा भंडारण और महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण की योजनाएं सीधे ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक आत्मनिर्भरता से जुड़ी हैं, जबकि VISTAR का उद्देश्य सरकारी आंकड़ों की व्यवस्था को बेहतर बनाना है।
भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए क्यों अहम हैं ये फैसले?
भारत में स्वच्छ ऊर्जा की मांग बढ़ने के साथ बिजली उत्पादन, भंडारण और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाना जरूरी होता जा रहा है। सौर और पवन ऊर्जा का विस्तार तभी अधिक प्रभावी हो सकता है, जब जरूरत के समय बिजली उपलब्ध कराने की पर्याप्त व्यवस्था हो।
ऊर्जा भंडारण प्रणालियां इस चुनौती का समाधान करने में मदद कर सकती हैं। वहीं महत्वपूर्ण खनिजों के घरेलू प्रसंस्करण से बैटरी और इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत हो सकती है।
VISTAR जैसी योजना से सरकारी आंकड़ों की गुणवत्ता और उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है, जिससे नीतिगत निर्णयों और विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिल सकती है।
निष्कर्ष
केंद्रीय मंत्रिमंडल के ये फैसले भारत की ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक विकास और तकनीकी क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं। 14,500 करोड़ रुपये की ऊर्जा भंडारण योजना बिजली ग्रिड को अधिक सक्षम बनाने में मदद कर सकती है, जबकि 2,814 करोड़ रुपये की महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण योजना विदेशी निर्भरता कम करने की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर देती है।
इसके साथ ही VISTAR योजना देश के आधिकारिक सांख्यिकी तंत्र को आधुनिक बनाने का लक्ष्य रखती है।
हालांकि, योजनाओं की मंजूरी अपने आप में अंतिम उपलब्धि नहीं है। असली परीक्षा इनके प्रभावी क्रियान्वयन, निर्धारित समयसीमा में परियोजनाओं के पूरा होने और आम लोगों तथा उद्योगों तक इनके लाभ पहुंचने की होगी।
संपादकीय तथ्य-जांच नोट: मूल खबर में ऊर्जा भंडारण की तीन प्रौद्योगिकियों के आंकड़ों में इकाई का अंतर है। बैटरी और पंप्ड स्टोरेज की क्षमता GWh में दी गई है, जबकि उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए 2 GW लिखा है। इसे प्रकाशित करने से पहले आधिकारिक कैबिनेट विज्ञप्ति से सत्यापित करना उचित होगा।













