Ayodhya (Sun, 19 Oct 2025): दीपोत्सव 2025 की झिलमिल रोशनी में अयोध्या का हर कोना भक्ति, आस्था और उत्साह से जगमगा उठा। राम की पैड़ी से लेकर सरयू घाट तक उमड़ी युवाओं की भीड़ ने न केवल दीपों से शहर सजाया, बल्कि अपने जोश और समर्पण से अयोध्या को जीवंत कर दिया।
स्वयंसेवकों और छात्रों ने मुख्यमंत्री Yogi Adityanath को “सनातन शक्ति के संरक्षक” की उपाधि देते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में अयोध्या का गौरव पुनर्जीवित हुआ है।
🌸 “योगी आदित्यनाथ हमारे आइकॉन हैं”
राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने कहा कि दीपोत्सव अब सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि “अयोध्या की पहचान” बन गया है।
विश्वविद्यालय के को-ऑर्डिनेटर्स ने बताया कि “योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में हम युवाओं को अयोध्या से आत्मीय जुड़ाव महसूस होता है। उनका व्यक्तित्व हमें प्रेरित करता है कि हम सनातन संस्कृति के संरक्षण में अपनी भूमिका निभाएं।”
सरयू किनारे जय श्रीराम के उद्घोष और दीपों की कतारों के बीच छात्रों का उत्साह पूरे वातावरण को आस्था से ओतप्रोत कर रहा था।
🪔 महिला प्रोफेसरों ने सजाई राम की पैड़ी पर स्वास्तिक आकृति
दीपोत्सव की सबसे मनोहारी झलक तब दिखी जब राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय की महिला प्रोफेसर डॉ. सरिता द्विवेदी (रंगोली प्रमुख) के निर्देशन में छात्राओं ने पारंपरिक चौक पूरन शैली में दीपों से स्वास्तिक आकृति बनाई।
यह स्वास्तिक प्रतीक न केवल श्रद्धा का, बल्कि स्त्री शक्ति और सांस्कृतिक सौंदर्य का प्रतीक बन गया। दर्शकों ने इस दृश्य पर तालियां बजाकर प्रोफेसर्स और छात्राओं का उत्साह बढ़ाया।
🌅 “योगी के सीएम बनने के बाद सनातन हुआ और मजबूत”
संस्कृत से एमए कर रहे छात्र करन पांडे, जो इस समय अयोध्या के गुरुकुल में अध्ययनरत हैं, ने कहा—
“इस बार का दीपोत्सव हर वर्ष से अधिक दिव्य है। अयोध्या अब साक्षात स्वर्ग जैसी लगती है। योगी आदित्यनाथ के सीएम बनने के बाद हमारा सनातन और मजबूत हुआ है। उन्होंने रामकथा पार्क में आकर हमारा उत्साह कई गुना बढ़ा दिया।”
करन के शब्दों में, यह सिर्फ एक उत्सव नहीं बल्कि “संस्कृति की पुनर्स्थापना का उत्सव” था।
🌟 अवध विश्वविद्यालय के छात्र बोले– “योगी ने बदल दी अयोध्या की तस्वीर”
सुल्तानपुर से आए छात्र आशुतोष सिंह ने बताया, “योगी आदित्यनाथ के आने के बाद अयोध्या पूरी तरह बदल गई है। दीपोत्सव अब केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी पहचान बन चुका है।”
उन्होंने कहा कि यह आयोजन युवाओं को अपनी संस्कृति पर गर्व महसूस कराता है।
राम की पैड़ी पर दीपों की कतारें, सरयू की लहरों पर झिलमिल प्रतिबिंब, और युवाओं का उत्साह — सबने मिलकर “नए युग की अयोध्या” का रूप गढ़ दिया।
🔆 वालंटियर्स ने दिखाई अनुशासन और सेवा भावना
दीपोत्सव की सफलता में स्वयंसेवकों की भूमिका सबसे खास रही।
सैकड़ों वालंटियर्स ने अद्भुत अनुशासन, समर्पण और सेवा की मिसाल पेश की। उन्होंने व्यवस्था संभालने से लेकर श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करने तक हर कार्य को पूरी निष्ठा से निभाया।
हर कोने से उठती “जय श्रीराम” की गूंज और दीपों की उजली आभा ने अयोध्या को भक्ति और ऊर्जा के संगम में बदल दिया।
✨ निष्कर्ष
दीपोत्सव 2025 ने यह संदेश दिया कि जब युवा, संत और शासन—तीनों एक भावना से जुड़ें, तो संस्कृति केवल परंपरा नहीं रहती, बल्कि जीवंत होती है।
अयोध्या का दीपोत्सव अब केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि Yogi Adityanath के नेतृत्व में “आस्था के नवजागरण” का प्रतीक बन गया है।












