प्रयागराज (Mon, 20 Oct 2025) —उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की UPPCS Prelims 2025 परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। आयोग द्वारा जारी की गई प्रारंभिक उत्तरकुंजी में कई उत्तरों पर अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताई है। परीक्षार्थियों का कहना है कि कुछ उत्तर तथ्यात्मक रूप से गलत हैं और परिणाम जारी करने से पहले आयोग को अंतिम उत्तरकुंजी सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
“उत्तरकुंजी में कई तथ्य गलत हैं”—अभ्यर्थियों की शिकायत
आयोग ने 18 अक्टूबर को प्रारंभिक उत्तरकुंजी जारी की थी और 25 अक्टूबर तक आपत्तियां दर्ज कराने की समयसीमा तय की है। लेकिन जैसे ही कुंजी सामने आई, सोशल मीडिया और कोचिंग ग्रुप्स पर चर्चा छिड़ गई।
अभ्यर्थियों के अनुसार, आयोग द्वारा सही बताए गए कई उत्तरों में त्रुटियां हैं। उदाहरण के तौर पर, ‘मिशन लाइफ’ (Mission LiFE) को लेकर आयोग ने जून 2022 को सही बताया है, जबकि सरकारी वेबसाइट PIB और प्रधानमंत्री कार्यालय के अभिलेखों के अनुसार यह कार्यक्रम 20 अक्टूबर 2022 को गुजरात के केवड़िया से लॉन्च किया गया था।
इसी तरह, “काम के बदले अनाज कार्यक्रम” से जुड़े प्रश्न में भी आयोग का उत्तर गलत बताया जा रहा है। लोकसभा में ग्रामीण विकास मंत्री द्वारा दिए गए जवाब के अनुसार यह योजना 2001 में शुरू हुई थी। अभ्यर्थियों ने बताया कि उत्तर विकल्प का सही क्रम 2, 4, 3, 1 होना चाहिए, न कि 2, 4, 1, 3 जैसा आयोग ने बताया है।
संवैधानिक प्रश्न पर भी विवाद
संविधान से जुड़े एक प्रश्न में भी भ्रम की स्थिति है। प्रश्न था—अनुच्छेद 75(3) के अनुसार मंत्रिपरिषद किसके प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी है?
आयोग ने “व्यवस्थापिका (संसद)” उत्तर दिया है, जबकि अभ्यर्थियों के अनुसार सही उत्तर “लोकसभा” है, क्योंकि संसद में राष्ट्रपति, राज्यसभा और लोकसभा तीनों शामिल होते हैं, और सामूहिक उत्तरदायित्व केवल लोकसभा के प्रति होता है।
पारदर्शिता पर उठे सवाल
अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर आयोग खुद 150 प्रश्नों में से कई के सही उत्तर तय नहीं कर पा रहा, तो परीक्षार्थियों से पूर्ण सटीकता की उम्मीद कैसे की जा सकती है?
अभ्यर्थी राजन त्रिपाठी ने कहा, “आयोग आपत्तियां तो मांगता है, लेकिन अंतिम उत्तरकुंजी जारी नहीं करता। इससे परीक्षा की शुचिता और पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगता है।”
वहीं गौरव चौहान, प्रियांशु श्रीवास्तव, विकास सिंह और आनंद यादव सहित कई अभ्यर्थियों ने आयोग से मांग की है कि परिणाम जारी करने से पहले फाइनल आंसर की जारी की जाए। इससे उम्मीदवारों को यह स्पष्ट होगा कि वे किस प्रश्न की वजह से सफल या असफल हुए।
आयोग की विश्वसनीयता पर असर
परीक्षार्थियों और शिक्षण संस्थानों का मानना है कि UPPCS जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा की साख तभी बनी रह सकती है जब आयोग पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों पर समान रूप से ध्यान दे। पिछले कुछ वर्षों से परीक्षा प्रक्रिया में सुधार के बावजूद, उत्तरकुंजी को लेकर बार-बार विवाद उठना आयोग के लिए चुनौती बना हुआ है।
🔹 निष्कर्ष
UPPCS Prelims 2025 केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा विश्वास का प्रतीक है। अभ्यर्थियों की मांग है कि आयोग इस विश्वास को कायम रखे और अंतिम उत्तरकुंजी सार्वजनिक कर परीक्षा की निष्पक्षता को सुनिश्चित करे।










