लखनऊ (Wed, 22 Oct 2025): दीपावली की रोशनी के साथ हर साल लौट आने वाला धुएं का साया इस बार उत्तर प्रदेश के सभी शहरों पर समान रूप से नहीं पड़ा। राज्य के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, एनसीआर के गाजियाबाद और नोएडा में Air Quality Index (AQI) “बहुत खराब” श्रेणी में दर्ज किया गया, जबकि लखनऊ, प्रयागराज और बरेली जैसे शहरों में हवा अपेक्षाकृत बेहतर रही।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन आर.पी. सिंह ने बताया कि इस बार ग्रीन दीपावली के संदेश का असर स्पष्ट रूप से देखने को मिला है। उन्होंने कहा, “सरकार की अपील और लोगों की जागरूकता के कारण एनसीआर को छोड़कर ज्यादातर जिलों में वायु गुणवत्ता नियंत्रण में रही है।”
एनसीआर में हालात गंभीर, बाकी यूपी ने ली राहत की सांस
दीपावली के दिन गाजियाबाद का AQI 316 और नोएडा का 325 तक पहुंच गया, जो “बहुत खराब” श्रेणी में आता है। वहीं, मेरठ में 260 दर्ज किया गया — यह पिछले साल के मुकाबले बड़ा उछाल है।
वर्ष 2024 में मेरठ का AQI 202, गाजियाबाद का 273 और नोएडा का 257 था। लगातार तीन सालों से यह रुझान दिखा रहा है कि एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है।
लखनऊ और प्रयागराज में नियंत्रण, वाराणसी और आगरा की स्थिति स्थिर
राजधानी लखनऊ में इस साल दीपावली के दिन औसत AQI 144 रहा, जबकि पिछले वर्ष यह 182 था। हालांकि, दीपावली के बाद यह बढ़कर 250 तक पहुंच गया, जो बीते साल के 306 से कम है — यानी स्थिति में सुधार हुआ है।
प्रयागराज और वाराणसी में हवा अपेक्षाकृत साफ रही। वाराणसी में इस बार AQI 118 दर्ज किया गया, जो पिछले साल के 80 और 2023 के 108 से थोड़ा अधिक है, लेकिन अब भी “मध्यम” श्रेणी में आता है।
आगरा में भी स्थिति लगभग स्थिर रही — इस साल 149, पिछले साल 148, और वर्ष 2023 में 73 दर्ज किया गया था।
गोरखपुर और कानपुर में मिला मिला-जुला असर
पूर्वी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में इस बार AQI 127 दर्ज हुआ, जबकि पिछले साल यह 224 था — यानी प्रदूषण में कमी आई है।
दूसरी ओर, औद्योगिक शहर कानपुर में इस बार 194 AQI दर्ज हुआ, जो 2024 के 131 से बढ़ा है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, इस बढ़ोतरी के पीछे औद्योगिक धूल और देर रात तक आतिशबाजी मुख्य कारण हैं।
बरेली में सबसे स्वच्छ हवा
पूरे उत्तर प्रदेश में बरेली ने इस बार राहत दी है। यहां का AQI केवल 89 रहा — यह “संतोषजनक” श्रेणी में आता है। पिछले दो वर्षों से भी यह शहर लगातार स्वच्छ हवा के मामले में शीर्ष पर बना हुआ है:
- 2024: 90 AQI
- 2023: 91 AQI
यह आंकड़ा बताता है कि पश्चिमी यूपी का यह शहर प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त कर रहा है।
मौसम ने दिया साथ, ‘ग्रीन दीपावली’ का असर
विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार मौसम ने भी प्रदूषण नियंत्रण में अहम भूमिका निभाई। आमतौर पर ठंड के मौसम में धुआं ऊपर नहीं उठ पाता और स्मॉग बनता है, लेकिन इस बार तापमान अपेक्षाकृत गर्म रहा, जिससे प्रदूषक कणों का फैलाव आसान हुआ।
आर.पी. सिंह ने कहा,
“हम यह नहीं कह सकते कि प्रदूषण पूरी तरह खत्म हुआ है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि समाज जागरूक हुआ है। ग्रीन पटाखों का इस्तेमाल और सीमित आतिशबाजी ने बड़ा फर्क डाला है।”








