Lucknow (Wed, 29 Oct 2025): उत्तर प्रदेश सरकार ने परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए अब एक नई मॉनिटरिंग व्यवस्था लागू की है। अब जो छात्र लगातार स्कूल से गैरहाजिर रहेंगे, उनके घर शिक्षक और प्रधानाचार्य स्वयं फोन करेंगे, उनकी स्थिति जानेंगे और उन्हें नियमित रूप से स्कूल आने के लिए प्रेरित करेंगे।
यह कदम UP Basic Education Department की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता और नामांकन दर दोनों को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।
हर बच्चे का नामांकन सुनिश्चित करने के निर्देश
बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के बीएसए (Basic Shiksha Adhikari) को निर्देशित किया है कि कोई भी बच्चा स्कूल प्रणाली से बाहर न रह जाए।
खासतौर पर कक्षा 5 से 6, 8 से 9, और 10 से 11 में जाने वाले बच्चों पर विशेष नजर रखी जाएगी, क्योंकि इन चरणों में अधिकतर छात्र या तो स्कूल बदलते हैं या पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं।
शिक्षकों को ऐसे बच्चों की पहचान कर, यह सुनिश्चित करना होगा कि उन्होंने किसी अन्य विद्यालय में प्रवेश लिया है या नहीं। यदि नहीं, तो उनका नामांकन तत्काल कराया जाए।
लखनऊ से होगी साप्ताहिक मॉनिटरिंग
अपर मुख्य सचिव (बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा) पार्थ सारथी सेन शर्मा ने हाल ही में हुई राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद सभी जिलों को विस्तृत कार्ययोजना भेजी है।
निर्देशों के अनुसार, अब सुस्त जिलों की प्रगति रिपोर्ट सीधे लखनऊ से हर सप्ताह मॉनिटर की जाएगी। जो अधिकारी या जिले निर्देशों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
KGBV भर्ती और विद्यालय सुधार की समयसीमा तय
निर्देशों में यह भी कहा गया है कि कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) में रिक्त पदों की भर्ती एक माह के भीतर पूरी की जाए। साथ ही विद्यालयों में फर्नीचर, खेल सामग्री और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की निविदाएं 15 नवंबर तक हर हाल में पूरी कर ली जाएं।
इसके अलावा,
- सभी विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, ICT लैब और डिजिटल लाइब्रेरी पूरी तरह क्रियाशील बनाई जाएं।
- निर्माण कार्य, कंपोजिट ग्रांट, पाठ्यपुस्तक भुगतान, और पीएम श्री योजना की प्रगति रिपोर्ट समय पर भेजी जाए।
बोर्ड परीक्षा और विशेष योजनाओं पर भी सख्ती
माध्यमिक शिक्षा विभाग को भी 2026 की बोर्ड परीक्षा के लिए छात्र पंजीकरण और केंद्र निर्धारण में पारदर्शिता बरतने के निर्देश मिले हैं।
साथ ही किचन गार्डन, मनोदर्पण पोर्टल, और दिव्यांग छात्रों के डाटा अपलोड की स्थिति सुधारने पर जोर दिया गया है।
शिक्षा की गुणवत्ता पर राज्य सरकार का फोकस
सरकार का स्पष्ट संदेश है —
“हर बच्चा स्कूल में हो, हर कक्षा में सीखने का माहौल हो।”
नई नीति के तहत शिक्षकों की भूमिका केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अब वे समुदाय और परिवारों से सीधा संवाद स्थापित करेंगे ताकि नामांकन और उपस्थिति दोनों में सुधार हो सके।








