लखनऊ, 25 फरवरी 2026 (बुधवार)। CM Yogi का जापान दौरा उत्तर प्रदेश के लिए निवेश के नए द्वार खोलता दिख रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जापान दौरे के पहले ही दिन प्रदेश को 11 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले। टोक्यो में आयोजित यूपी निवेश रोड शो के दौरान इन्वेस्ट यूपी ने विभिन्न जापानी कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए।
टोक्यो पहुंचने पर यामानाशी प्रांत के वाइस गवर्नर जुनिचि इशिदरा, जापान में भारत की राजदूत नगमा एम मलिक और भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। अपने स्वागत पर मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा, “उगते सूरज की नवोन्मेषी भूमि को प्रभु श्रीराम की पावन धरा के ‘आदित्य’ का नमस्कार।” यह संदेश प्रतीकात्मक था—एक तरफ जापान की तकनीकी दक्षता, दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत।
CM Yogi का जापान दौरा: 11 हजार करोड़ के निवेश समझौते
टोक्यो में आयोजित उच्चस्तरीय बैठकों में मुख्यमंत्री ने कई प्रमुख औद्योगिक समूहों से मुलाकात की। इनमें मित्सुई एंड कंपनी लिमिटेड, कोनोइके ट्रांसपोर्ट कंपनी लिमिटेड, कुबोता कॉर्पोरेशन, मिंडा कॉर्पोरेशन, जापान एविएशन इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री (JAE), नागासे एंड कंपनी लिमिटेड और सीको एडवांस जैसी कंपनियां शामिल रहीं।
18 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ मुख्यमंत्री ने नवीकरणीय ऊर्जा, बायो-एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन, ऊर्जा भंडारण, आईसीटी, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, आईटी पार्क, डिजिटल सर्विसेज, स्टार्टअप इकोसिस्टम, सेमीकंडक्टर एवं एडवांस्ड कंपोनेंट निर्माण, डेटा सेंटर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में निवेश संभावनाओं पर चर्चा की।
कोनोइके ट्रांसपोर्ट के वरिष्ठ प्रबंध कार्यकारी अधिकारी शिगेकी तानाबे के साथ बैठक में लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउसिंग और मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष फोकस रहा। मुख्यमंत्री ने यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र में विकसित हो रहे मेडिकल डिवाइस पार्क को जापानी कंपनियों के लिए बड़ा अवसर बताया।
500 एकड़ में विकसित होगा जापानी औद्योगिक शहर
टोक्यो रोड शो में मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि नोएडा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के पास 500 एकड़ क्षेत्र में जापानी औद्योगिक शहर विकसित किया जाएगा। यह क्लस्टर मॉडल पर आधारित होगा, जहां जापानी कंपनियों को बेहतर लॉजिस्टिक्स, निर्यात सुविधाएं और विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराया जाएगा।
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब उत्तर प्रदेश ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से सीधा जुड़ा है। इससे निर्यातोन्मुख उद्योगों को लागत और समय—दोनों में लाभ मिलेगा।
रोजगार और औद्योगिक विस्तार पर जोर
मिंडा कॉर्पोरेशन के कार्यकारी निदेशक आकाश मिंडा ने इलेक्ट्रॉनिक्स बैकवर्ड इंटीग्रेशन, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रिक व्हीकल मोबिलिटी क्षेत्र में निवेश की घोषणा की। इससे अगले दो से तीन वर्षों में 3,000 से 4,000 रोजगार सृजित होने की संभावना है।
मारुति सुजुकी के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी राहुल भारती सहित कई उद्योगपतियों ने उत्तर प्रदेश में हुए “मेगा ट्रांसफॉर्मेशन” की सराहना की।
‘स्केल, स्किल, स्टेबिलिटी और स्पीड’ मॉडल पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश 25 करोड़ की आबादी के साथ देश का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार है। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि प्रदेश में “स्केल (बड़ा बाजार), स्किल (कुशल युवा शक्ति), स्टेबिलिटी (नीतिगत स्थिरता) और स्पीड (तेज निर्णय प्रक्रिया)”—चारों तत्व मौजूद हैं।
प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई इकाइयां संचालित हैं, जो तीन करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार दे रही हैं। राज्य के पास 75 हजार एकड़ का भूमि बैंक उपलब्ध है, जबकि बुंदेलखंड में 56 हजार एकड़ में नया औद्योगिक शहर विकसित किया जा रहा है।
कभी ‘बीमारू’ कहे जाने वाला उत्तर प्रदेश अब खुद को भारत की अर्थव्यवस्था का “ग्रोथ इंजन” बताने लगा है। CM Yogi का जापान दौरा इस बदलाव को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।








