लखनऊ, 02 अप्रैल 2026। आकाशवाणी लखनऊ स्थापना दिवस के 89वें वर्ष ने सिर्फ एक संस्थान की यात्रा को नहीं, बल्कि उन अनगिनत आवाज़ों और व्यक्तित्वों को भी याद किया, जिन्होंने इसे जन-जन तक पहुंचाने का काम किया। इसी अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पद्म पुरस्कार विजेताओं और आकाशवाणी के वरिष्ठ लोक सेवा प्रसारकों को सम्मानित कर एक भावनात्मक और प्रेरक संदेश दिया।
कार्यक्रम का माहौल सिर्फ औपचारिक नहीं था—यह उन लोगों के प्रति आभार का सार्वजनिक स्वीकार था, जिनके योगदान अक्सर सुर्खियों से दूर रह जाते हैं। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि “इन विभूतियों का कार्य केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।”
उन्होंने खास तौर पर ‘नींव के पत्थरों’ का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी संस्थान की मजबूती उन्हीं अनदेखे हाथों पर टिकी होती है, जो चुपचाप अपना काम करते रहते हैं।
पद्म सम्मान प्राप्त विभूतियों को मिला विशेष आदर
इस अवसर पर मंच पर कई प्रतिष्ठित नामों को मुख्यमंत्री के हाथों सम्मानित किया गया। इनमें साहित्य, कला, चिकित्सा, खेल और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोग शामिल रहे।
सम्मानित होने वालों में प्रमुख रूप से साहित्यकार विद्या बिंदु सिंह, लोकगायिका मालिनी अवस्थी, दिव्यांग पर्वतारोही अरुणिमा सिन्हा और प्रगतिशील किसान रामशरण वर्मा जैसे नाम शामिल हैं। इसके अलावा चिकित्सा और शिक्षा जगत से जुड़े प्रो. सोनिया नित्यानंद, डॉ. सुनील प्रधान और डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भी सम्मानित किया गया।
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष पंडित हदय नारायण दीक्षित को मरणोपरांत सम्मान दिया गया, जिसे उनके पुत्रों अरुण दीक्षित और दिलीप दीक्षित ने ग्रहण किया। यह क्षण कार्यक्रम के सबसे भावुक पलों में से एक रहा, जब पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा।
‘नींव के पत्थरों’ को मिला मंच, वर्षों की सेवा को मिली पहचान
कार्यक्रम की एक खास बात यह रही कि आकाशवाणी के उन वरिष्ठ लोक सेवा प्रसारकों को भी सम्मानित किया गया, जिनकी मेहनत ने इस संस्थान को ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
सुशील राबर्ट बनर्जी, सतीश कुमार ग्रोवर, यज्ञदेव पंडित, विजय कुमार बनर्जी, रज्जन लाल, नवनीत मिश्र, भोलानाथ और केवल कुमार जैसे नामों को जब मंच पर बुलाया गया, तो यह साफ दिखा कि यह सम्मान सिर्फ व्यक्तियों का नहीं, बल्कि एक पूरी पीढ़ी की प्रतिबद्धता का है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ऐसे लोगों को पहचानना और उन्हें सम्मानित करना न सिर्फ जरूरी है, बल्कि यह समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनता है।
विरासत, जिम्मेदारी और भविष्य की दिशा
आकाशवाणी लखनऊ स्थापना दिवस का यह आयोजन एक याद दिलाने वाला अवसर भी था—कि मीडिया सिर्फ सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की चेतना को आकार देने वाली शक्ति है।
सीएम योगी ने अपने संबोधन में ‘विकसित भारत’ के संकल्प का जिक्र करते हुए कहा कि इन विभूतियों का योगदान उस दिशा में एक मजबूत आधार तैयार करता है। उन्होंने युवाओं से भी आह्वान किया कि वे इन प्रेरणादायक व्यक्तित्वों से सीख लेकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में काम करें।
समारोह के अंत में यह एहसास साफ था कि आकाशवाणी की यह 89 साल की यात्रा केवल इतिहास नहीं, बल्कि निरंतर चल रही एक जीवंत परंपरा है—जिसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अब नई पीढ़ी के कंधों पर है।








