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सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य: वाराणसी में सीएम योगी का बड़ा संदेश, सुशासन के नायकों का दौर शुरू

On: April 4, 2026
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सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य- वाराणसी में सीएम योगी का बड़ा संदेश
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वाराणसी, 4 अप्रैल 2026। काशी की सांस्कृतिक धारा एक बार फिर इतिहास और वर्तमान के संगम की साक्षी बनी, जब ‘सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य’ का भव्य शुभारंभ हुआ। मंच पर सिर्फ एक नाटक नहीं, बल्कि भारत की स्मृति, परंपरा और वैचारिक धारा जीवंत हो उठी। इसी मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक सशक्त संदेश देते हुए कहा— “अब समय खलनायकों का नहीं, बल्कि सुशासन और न्याय के नायकों का है।”

भारतीय रेल इंजन कारखाना (बरेका) परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं की उपस्थिति ने इस आयोजन को राजनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और वैचारिक आयाम दे दिया।

सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य बना सांस्कृतिक पुनर्जागरण का मंच

सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य’ के जरिए इतिहास के उस अध्याय को मंच पर उतारा गया, जिसे भारतीय समाज लंबे समय से अपने गौरव के प्रतीक के रूप में देखता आया है। योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि युवा पीढ़ी अब अपने असली नायकों को पहचान रही है—ऐसे नायक जो न्याय, धर्म और सुशासन के प्रतीक रहे।

उन्होंने काशी की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि यह केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारतीय आत्मा का केंद्र है। यहाँ से जो संदेश जाता है, वह पूरे देश को प्रभावित करता है।

काशी और उज्जैन: आध्यात्मिक ध्रुवों की साझा विरासत

मुख्यमंत्री योगी ने काशी को बाबा विश्वनाथ की नगरी और उज्जैन को महाकाल की धरती बताते हुए समय और धर्म के गहरे संबंध को समझाया। उन्होंने कहा—जो समय के साथ नहीं चलता, उसे महाकाल स्वयं दंडित करते हैं।

राजा भर्तृहरि और सम्राट विक्रमादित्य की जोड़ी का उल्लेख करते हुए योगी ने इसे भगवान राम-लक्ष्मण और श्रीकृष्ण-बलराम जैसी आदर्श जोड़ी बताया। उन्होंने यह भी बताया कि भर्तृहरि की साधना स्थली काशी के निकट स्थित चुनार किला रही है—जो आज भी इतिहास की गूंज समेटे हुए है।

मोहन यादव का संदेश: विरासत और विकास साथ-साथ

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि सम्राट विक्रमादित्य सिर्फ इतिहास का नाम नहीं, बल्कि न्याय और पराक्रम का जीवंत प्रतीक हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे आयोजन समाज को मनोरंजन के साथ-साथ शिक्षित भी करते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश मिलकर सांस्कृतिक विरासत को सहेजते हुए विकास के नए मानक स्थापित कर रहे हैं। पर्यटन और संस्कृति के क्षेत्र में दोनों राज्यों की साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है।

वैदिक घड़ी: परंपरा और विज्ञान का संगम

इस मौके पर डॉ. मोहन यादव ने योगी आदित्यनाथ को ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ की प्रतिकृति भेंट की। करीब 700 किलोग्राम वजनी यह घड़ी भारतीय पंचांग और सूर्य की गति पर आधारित पारंपरिक कालगणना प्रणाली को आधुनिक रूप में प्रस्तुत करती है।

उज्जैन में इसकी स्थापना के बाद अब इसे देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में स्थापित किया जा रहा है। वाराणसी स्थित श्रीकाशी विश्वनाथ धाम में भी इसे स्थापित किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि इस घड़ी का लोकार्पण वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया था। इसके साथ ही एक मोबाइल एप भी तैयार किया गया है, जिसे 40 भाषाओं में उपयोग किया जा सकता है—यह दर्शाता है कि कैसे परंपरा और तकनीक का संगम आज नए भारत की पहचान बन रहा है।

समापन: नाटक से आगे बढ़कर एक वैचारिक संदेश

सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य’ केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह उस विचारधारा का मंच बन गया, जो भारत को उसके ऐतिहासिक नायकों और मूल्यों से जोड़ने की कोशिश कर रही है। काशी की धरती से उठी यह आवाज साफ संकेत देती है कि आने वाला समय केवल विकास का नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण का भी होगा।

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