नई दिल्ली|20 अप्रैल 2026: वैश्विक भू-राजनीति और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के इस दौर में भारत अपनी साझेदारियों को नए आयाम देने में जुटा है। इसी कड़ी में सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दक्षिण कोरिया के साथ बढ़ते रिश्तों को “चिप से शिप” तक विस्तारित बताते हुए दोनों देशों के बीच हुए अहम समझौतों की सराहना की।
यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और South Korea के बीच तकनीक, रक्षा, व्यापार और समुद्री सहयोग जैसे क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण MoUs पर हस्ताक्षर हुए हैं—जो आने वाले वर्षों में रणनीतिक संतुलन को भी प्रभावित कर सकते हैं।
भारत-दक्षिण कोरिया समझौते: हाई-टेक से समुद्री ताकत तक विस्तार
प्रधानमंत्री मोदी ने साफ शब्दों में कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया के रिश्ते अब केवल व्यापारिक लेन-देन तक सीमित नहीं रहे। अब यह साझेदारी सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, ग्रीन टेक्नोलॉजी और शिपबिल्डिंग जैसे भविष्य-निर्धारक क्षेत्रों तक पहुंच चुकी है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यह सहयोग सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है—खासतौर पर Indo-Pacific region में स्थिरता और संतुलन बनाए रखने के संदर्भ में।
किन-किन क्षेत्रों में हुए बड़े समझौते
दोनों देशों के बीच हुए समझौतों की सूची काफी व्यापक है और यह साफ संकेत देती है कि साझेदारी बहु-आयामी दिशा में आगे बढ़ रही है:
- सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में सहयोग
- रक्षा और सुरक्षा साझेदारी को मजबूती
- ग्रीन एनर्जी और क्लाइमेट चेंज पर संयुक्त पहल
- शिपबिल्डिंग और समुद्री सुरक्षा में सहयोग
- स्टार्टअप और इनोवेशन इकोसिस्टम को बढ़ावा
इन समझौतों का मुख्य उद्देश्य सप्लाई चेन को मजबूत करना और निवेश के नए रास्ते खोलना है—जो वर्तमान वैश्विक अस्थिरता के दौर में बेहद अहम माना जा रहा है।
व्यापार और निवेश: नए अवसरों की दस्तक
भारत तेजी से एक वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभर रहा है, और दक्षिण कोरियाई कंपनियां इसमें सक्रिय दिलचस्पी दिखा रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों ने विदेशी निवेशकों के लिए नए दरवाजे खोले हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह साझेदारी सही दिशा में आगे बढ़ती है, तो दोनों देशों के बीच व्यापारिक आंकड़े आने वाले वर्षों में रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकते हैं।
रक्षा सहयोग: इंडो-पैसिफिक में बढ़ती अहमियत
रक्षा क्षेत्र में सहयोग को लेकर भी दोनों देशों ने स्पष्ट सहमति जताई है। इसमें संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा तकनीक का आदान-प्रदान और उपकरण निर्माण में साझेदारी शामिल है।
यह सहयोग खासतौर पर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भारत और दक्षिण कोरिया, दोनों ही इस क्षेत्र में एक संतुलित और नियम-आधारित व्यवस्था के पक्षधर हैं।
सांस्कृतिक रिश्तों को भी मिलेगी नई ऊर्जा
तकनीकी और आर्थिक सहयोग के साथ-साथ दोनों देशों ने लोगों के बीच संबंध (people-to-people ties) को मजबूत करने पर भी जोर दिया। शिक्षा, पर्यटन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए आपसी समझ को और गहरा करने की योजना है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया मिलकर एक “मुक्त, खुला और समावेशी” इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध हैं।
बदलती दुनिया में नई रणनीतिक साझेदारी
अगर समग्र रूप से देखा जाए, तो यह स्पष्ट है कि भारत-दक्षिण कोरिया के बीच बढ़ती यह साझेदारी सिर्फ आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं है। इसमें तकनीकी आत्मनिर्भरता, रक्षा मजबूती और वैश्विक संतुलन जैसे बड़े लक्ष्य भी शामिल हैं।
“चिप से शिप” तक का यह विस्तार दरअसल उस नई सोच का प्रतीक है, जहां सहयोग केवल व्यापार नहीं, बल्कि भविष्य की रणनीतिक साझेदारी का आधार बनता है।












