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नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर CM योगी का विपक्ष पर तीखा प्रहार, बोले—‘द्रौपदी चीरहरण जैसा आचरण’

On: April 19, 2026
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नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर CM योगी का विपक्ष पर तीखा प्रहार
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लखनऊ, 19 अप्रैल 2026 (रविवार)। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। लोकसभा में 131वें संविधान संशोधन विधेयक के पारित न हो पाने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर सीधा और तीखा हमला बोला। भाजपा प्रदेश मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में उनका लहजा आक्रामक ही नहीं, बल्कि भावनात्मक भी नजर आया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को 33 से 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने का जो प्रयास Narendra Modi सरकार ने किया, उसे विपक्ष ने मिलकर बाधित कर दिया। उनके मुताबिक यह सिर्फ एक विधेयक का विरोध नहीं, बल्कि “आधी आबादी के अधिकारों के साथ अन्याय” है।

‘आधी आबादी के साथ खड़ा है NDA’—सीएम का दावा

सीएम योगी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) महिलाओं के सशक्तिकरण के पक्ष में मजबूती से खड़ा है। उन्होंने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राजद और डीएमके जैसे दलों को निशाने पर लेते हुए कहा कि इन दलों ने अपने “राजनीतिक स्वार्थ” के चलते एक ऐतिहासिक अवसर को गंवा दिया।

उन्होंने पुराने राजनीतिक घटनाक्रमों की ओर इशारा करते हुए कहा कि कुछ दलों के पास “अपने अतीत के पापों से प्रायश्चित” करने का मौका था, लेकिन उन्होंने उसे भी खो दिया। इस टिप्पणी में उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से सपा पर निशाना साधा।

द्रौपदी के चीरहरण से की तुलना, बयान बना चर्चा का केंद्र

मुख्यमंत्री का सबसे चर्चित बयान वह रहा, जिसमें उन्होंने विपक्ष के व्यवहार की तुलना महाभारत के प्रसंग से की।
उन्होंने कहा कि संसद में विपक्ष का आचरण “भरी सभा में द्रौपदी के चीरहरण” जैसा था—एक ऐसा रूपक जिसने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

यह बयान न सिर्फ राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भों में भी इसकी व्याख्या होने लगी है। योगी का कहना था कि इस तरह का व्यवहार महिलाओं के प्रति विपक्ष की “संकीर्ण सोच” को उजागर करता है।

आरक्षण पर धर्म आधारित राजनीति का आरोप

सीएम योगी ने समाजवादी पार्टी पर विशेष रूप से हमला करते हुए आरोप लगाया कि मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग आरक्षण की बात करना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।
उन्होंने B. R. Ambedkar के विचारों का हवाला देते हुए कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण की अवधारणा न तो संवैधानिक है और न ही सामाजिक न्याय के अनुरूप।

उनके अनुसार, नारी शक्ति वंदन अधिनियम एक “प्रोग्रेसिव सोच” के तहत लाया गया था, जिसका उद्देश्य सभी वर्गों की महिलाओं को समान अवसर देना था।

शाहबानो प्रकरण और तीन तलाक का जिक्र

मुख्यमंत्री ने विपक्ष की नीतियों पर सवाल उठाते हुए ऐतिहासिक संदर्भ भी जोड़े। उन्होंने Shah Bano Case का जिक्र करते हुए पूछा कि उस समय विपक्ष कहां था। साथ ही, तीन तलाक कानून का उल्लेख करते हुए भाजपा सरकार के कदमों को महिलाओं के हित में बताया।

उन्होंने विपक्ष से यह भी सवाल किया कि आखिर वे “नारी, गरीब, अन्नदाता और युवा” के मुद्दों पर बार-बार विरोध क्यों करते हैं।

जनता के बीच जाने की तैयारी, राजनीतिक तापमान बढ़ेगा

प्रेस वार्ता के अंत में सीएम योगी ने संकेत दिए कि भाजपा इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाएगी और विपक्ष के रुख को उजागर करेगी।
इस दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष Pankaj Chaudhary और संगठन महामंत्री Dharampal Singh भी मौजूद रहे।

निष्कर्ष

नारी शक्ति वंदन अधिनियम अब सिर्फ एक विधायी प्रस्ताव नहीं रहा, बल्कि यह राजनीतिक विमर्श का केंद्र बन चुका है। एक ओर सरकार इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, तो वहीं विपक्ष के विरोध ने इसे चुनावी मुद्दा बना दिया है। आने वाले दिनों में यह बहस और तेज होने के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं।

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