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UP गेहूं खरीद में बड़ा फैसला: फार्मर रजिस्ट्री के बिना भी MSP पर बिक्री की अनुमति

On: April 20, 2026
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UP गेहूं खरीद में बड़ा फैसला
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लखनऊ, 20 अप्रैल 2026 (सोमवार)। उत्तर प्रदेश में गेहूं खरीद (Wheat Procurement) को लेकर लंबे समय से किसानों के बीच बनी असमंजस की स्थिति को आखिरकार राहत मिल गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक अहम निर्णय लेते हुए फार्मर रजिस्ट्री (Farmer Registry) की अनिवार्यता को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है।

अब वे किसान भी सरकारी क्रय केंद्रों (Procurement Centres) पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं बेच सकेंगे, जो अब तक किसी कारणवश रजिस्ट्री नहीं करा पाए थे। यह फैसला ऐसे समय आया है जब प्रदेश में गेहूं खरीद की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी पड़ रही थी।

क्यों लिया गया फैसला: जमीन पर हकीकत और प्रशासन की चिंता

असल में, प्रदेश सरकार केंद्र के निर्देशों के अनुसार हर किसान का डिजिटल डेटा तैयार करने के लिए फार्मर रजिस्ट्री अभियान चला रही है। इसके तहत 2,88,70,495 किसानों का पंजीकरण लक्ष्य रखा गया है।

लेकिन सोमवार शाम तक केवल 2,13,96,428 किसानों का ही रजिस्ट्रेशन हो पाया था। यानी बड़ी संख्या में किसान अभी भी इस प्रक्रिया से बाहर थे।

ग्राउंड रिपोर्ट्स में सामने आया कि कई किसान तकनीकी दिक्कतों, जानकारी के अभाव या दस्तावेज़ी समस्याओं के कारण रजिस्ट्री नहीं करा पाए—और इसी वजह से वे सरकारी खरीद से भी वंचित रह रहे थे।

यही स्थिति सरकार के लिए चिंता का कारण बनी।

MSP पर बिक्री का रास्ता साफ, बढ़ेगी खरीद की रफ्तार

मुख्यमंत्री के इस निर्णय के बाद अब सभी पात्र किसान बिना फार्मर रजिस्ट्री के भी गेहूं बेच सकेंगे। इससे दो बड़े असर देखने को मिल सकते हैं:

  • खरीद प्रक्रिया में तेजी आएगी
  • ज्यादा किसानों को MSP का लाभ मिलेगा

खाद्य एवं रसद विभाग के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार शाम तक
➡️ 41,964 किसानों से 2,36,479 टन गेहूं की खरीद की जा चुकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अब यह आंकड़ा तेजी से बढ़ सकता है क्योंकि बड़ी संख्या में किसान अब सीधे क्रय केंद्रों पर पहुंच सकेंगे।

फार्मर रजिस्ट्री पूरी करना अभी भी जरूरी

हालांकि, सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि फार्मर रजिस्ट्री की प्रक्रिया खत्म नहीं हुई है, बल्कि केवल गेहूं खरीद के लिए इसकी अनिवार्यता हटाई गई है।

  • रजिस्ट्री की अंतिम तिथि: 15 मई 2026
  • इसके बाद, यानी 23 मई के बाद, जिन किसानों ने पंजीकरण नहीं कराया होगा, वे
    • सरकारी योजनाओं
    • सब्सिडी (अनुदान)
    • अन्य लाभों से वंचित हो सकते हैं

इसलिए प्रशासन की ओर से किसानों से अपील की जा रही है कि वे समय रहते अपना पंजीकरण जरूर पूरा कर लें।

गर्मी में राहत के निर्देश: सिर्फ खरीद नहीं, सुविधा भी जरूरी

इस फैसले के साथ मुख्यमंत्री ने एक और अहम पहलू पर जोर दिया—किसानों की सुविधाएं।

भीषण गर्मी को देखते हुए उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर क्रय केंद्र पर:

  • पीने का साफ पानी
  • पंखे
  • छाया की व्यवस्था

सुनिश्चित की जाए, ताकि किसानों को घंटों इंतजार के दौरान परेशानी न उठानी पड़े।

निष्कर्ष: व्यावहारिक फैसला, किसानों के भरोसे को मजबूती

सरकार का यह निर्णय एक व्यावहारिक (Pragmatic) कदम माना जा रहा है। जहां एक ओर डिजिटल सिस्टम को लागू करने की कोशिश जारी है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत को ध्यान में रखते हुए किसानों को राहत दी गई है।

यह फैसला न सिर्फ खरीद प्रक्रिया को गति देगा, बल्कि यह संदेश भी देता है कि नीतियां सिर्फ नियमों तक सीमित नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर उनमें लचीलापन भी हो सकता है।

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