लखनऊ|29 अप्रैल 2026: उत्तर प्रदेश की राजनीति में गुरुवार का दिन हलचल भरा रहने वाला है। महिला आरक्षण के मुद्दे पर 30 अप्रैल को बुलाए गए यूपी विधानमंडल के विशेष सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के आसार हैं। एक तरफ सरकार निंदा प्रस्ताव लाने की तैयारी में है, तो दूसरी ओर समाजवादी पार्टी ने भी पलटवार करते हुए अतिनिंदा प्रस्ताव पारित कर सियासी तापमान बढ़ा दिया है।
महिला आरक्षण पर आमने-सामने सरकार और विपक्ष
राज्य सरकार का आरोप है कि लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक को पारित नहीं होने देने में विपक्षी दलों—खासतौर पर Samajwadi Party और Indian National Congress—की भूमिका रही है। इसी के विरोध में सरकार विधानमंडल में निंदा प्रस्ताव पेश करेगी।
वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री Suresh Khanna विधानसभा में यह प्रस्ताव रखेंगे, जिसके बाद सभी दलों के नेता अपनी-अपनी बात रखेंगे।
देर रात तक चलेगी चर्चा, हंगामे के संकेत
सूत्रों के मुताबिक, यह एक दिवसीय सत्र देर रात तक चल सकता है। महिला आरक्षण के साथ-साथ महिला सुरक्षा, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक भागीदारी जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
सत्र के दौरान महिला विधायकों को विशेष रूप से अपनी बात रखने का अवसर दिया जाएगा। हालांकि, जिस तरह से राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई है, उससे सदन में हंगामे की पूरी संभावना जताई जा रही है।
सीएम योगी आदित्यनाथ का संबोधन रहेगा अहम
सत्र के दौरान मुख्यमंत्री Yogi Adityanath का संबोधन खासा अहम माना जा रहा है। इससे पहले नेता विपक्ष Mata Prasad Pandey सहित अन्य दलों के नेता भी अपनी बात रखेंगे।
ध्यान देने वाली बात यह है कि इस विशेष सत्र में प्रश्नकाल नहीं रखा गया है, जिससे पूरा फोकस महिला आरक्षण और उससे जुड़े मुद्दों पर रहेगा।
कार्य परामर्शदात्री समिति में बनी सहमति
सत्र की कार्यवाही को लेकर बुधवार को विधान भवन में बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री Keshav Prasad Maurya ने की।
बैठक में सभी दलों ने सदन की गरिमा बनाए रखते हुए जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा करने पर सहमति जताई। हालांकि, जमीनी सियासत की तीखी धारा सदन में किस रूप में दिखेगी, यह देखने वाली बात होगी।
पटल पर रखे जाएंगे कई अहम अध्यादेश
विशेष सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण अध्यादेश भी सदन के पटल पर रखे जाएंगे, जिनमें शामिल हैं:
- उप्र लोक सेवा (अधिकरण) संशोधन अध्यादेश, 2026
- उप्र राजस्व संहिता संशोधन अध्यादेश, 2026
- उप्र वानिकी और औद्योगिकी विश्वविद्यालय अध्यादेश, 2026
- उप्र निजी विश्वविद्यालय संशोधन अध्यादेश, 2026
इन प्रस्तावों पर चर्चा से राज्य की प्रशासनिक और शैक्षणिक नीतियों की दिशा भी तय होगी।
निष्कर्ष: महिला आरक्षण पर सियासत चरम पर
महिला आरक्षण का मुद्दा अब केवल विधायी बहस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई का केंद्र बन चुका है।
गुरुवार को होने वाला यह विशेष सत्र न सिर्फ नीतिगत फैसलों के लिए महत्वपूर्ण होगा, बल्कि यह भी तय करेगा कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में महिला सशक्तीकरण (women empowerment) का मुद्दा किस दिशा में आगे बढ़ेगा।









