राष्ट्रीय उत्तर प्रदेश राज्य अंतरराष्ट्रीय खेल मनोरंजन एजुकेशन बिजनेस राशिफल

---Advertisement---

नारी शक्ति वंदन विधेयक पर यूपी विधानमंडल में घमासान, विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास

On: April 30, 2026
Follow Us:
नारी शक्ति वंदन विधेयक पर यूपी विधानमंडल में घमासान
---Advertisement---

लखनऊ, 30 अप्रैल 2026। महिला सशक्तीकरण के मुद्दे पर बुलाए गए उत्तर प्रदेश विधानमंडल के विशेष सत्र में गुरुवार को तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली। नारी शक्ति वंदन विधेयक को लेकर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने आ गए, जिसके बाद सरकार ने विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करा दिया।

यह पूरा घटनाक्रम सिर्फ एक विधेयक तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने राज्य की राजनीति में वैचारिक टकराव और चुनावी संकेतों को भी खुलकर सामने ला दिया।

नारी शक्ति वंदन विधेयक पर निंदा प्रस्ताव क्यों?

विधानसभा में संसदीय कार्य मंत्री Suresh Kumar Khanna और विधान परिषद में नेता सदन Keshav Prasad Maurya ने निंदा प्रस्ताव पेश किया।
ध्वनिमत से यह प्रस्ताव दोनों सदनों में पारित हो गया, हालांकि विपक्ष ने इसका कड़ा विरोध दर्ज कराया।

सरकार का आरोप था कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य दलों ने नारी शक्ति वंदन विधेयक को लोकसभा में पारित होने से रोकने की कोशिश की, जिससे महिलाओं को मिलने वाले राजनीतिक अधिकारों में बाधा आई।

CM योगी का हमला: “मजहबी आरक्षण से भटकाया मुद्दा”

निंदा प्रस्ताव पर बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर सीधा हमला बोला।

उन्होंने कहा कि:

  • विपक्ष ने मजहबी आरक्षण का मुद्दा उठाकर असली विषय से ध्यान हटाने की कोशिश की
  • भाजपा हमेशा से अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्गों के आरक्षण के पक्ष में रही है
  • महिलाओं को राजनीतिक अधिकार देने में बाधा डालना “देश के साथ द्रोह” जैसा है

उनका बयान साफ तौर पर यह संकेत देता है कि सरकार इस मुद्दे को केवल नीति नहीं, बल्कि वैचारिक संघर्ष के रूप में भी देख रही है।

विपक्ष का पलटवार भी रहा तेज

विपक्ष ने भी सरकार के आरोपों को खारिज करते हुए अपना पक्ष मजबूती से रखा।
नेता प्रतिपक्ष Mata Prasad Pandey ने कहा कि:

  • पंचायतों में 33% आरक्षण लागू होने पर भाजपा ने पहले विरोध किया था
  • मंडल आयोग जैसे मुद्दों पर भी भाजपा का रुख अलग रहा है

इस दौरान सदन में कई बार शोर-शराबा और तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली, जो इस बहस की गंभीरता को दर्शाती है।

आंकड़ों के जरिए सरकार का पक्ष

संसदीय कार्य मंत्री Suresh Kumar Khanna ने चर्चा के दौरान कई अहम तथ्य रखे:

  • विशेष सत्र में कुल 33 सदस्यों ने भाग लिया, जिनमें 15 महिलाएं थीं
  • 1972 में लोकसभा सीटें 525 से बढ़ाकर 543 की गई थीं
  • 1976 में परिसीमन को फ्रीज कर दिया गया था
  • देश की आबादी 54 करोड़ से बढ़कर अब करीब 140 करोड़ हो चुकी है

उन्होंने तर्क दिया कि यदि विपक्ष बाधा न डालता, तो 2029 तक महिला आरक्षण पूरी तरह लागू हो जाता और लोकसभा सीटों की संख्या 825 तक पहुंच सकती थी।

6 घंटे चली कार्यवाही, फिर अनिश्चितकाल के लिए स्थगन

तीखी बहस और निंदा प्रस्ताव पारित होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष Satish Mahana ने शाम 5:25 बजे सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी।

  • विधानसभा की कार्यवाही करीब 6 घंटे 25 मिनट चली
  • विधान परिषद की कार्यवाही लगभग 5 घंटे चली

यह विशेष सत्र अपने आप में राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राजनीतिक संकेत: महिला मुद्दे पर बढ़ेगी सियासत

पूरे घटनाक्रम से यह साफ है कि नारी शक्ति वंदन विधेयक अब सिर्फ एक कानून नहीं, बल्कि आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनने जा रहा है।

जहां एक ओर सरकार इसे महिला सशक्तीकरण की ऐतिहासिक पहल बता रही है, वहीं विपक्ष इसे अपने नजरिए से देख रहा है।

आने वाले चुनावों में यह मुद्दा किस तरह असर डालेगा, यह तो वक्त बताएगा—लेकिन फिलहाल इतना तय है कि इस पर राजनीति अभी थमने वाली नहीं है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now