चेन्नई, 5 मई 2026: तमिलनाडु की राजनीति में आए बड़े बदलाव के बाद अब सत्ता के गलियारों में नई हलचल तेज हो गई है। टीवीके बैठक के जरिए पार्टी अपने अगले कदम तय करने में जुट गई है। अभिनेता से नेता बने सी. जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) ने विधानसभा चुनाव में शानदार जीत दर्ज करने के बाद अपने नवनिर्वाचित विधायकों के साथ चेन्नई में अहम रणनीतिक बैठक शुरू कर दी है।
पनैयूर स्थित पार्टी मुख्यालय के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं—जैसे किसी बड़े राजनीतिक मोड़ की आहट हो। भीतर, माहौल उत्साह और जिम्मेदारी के मिश्रण से भरा है।
टीवीके बैठक में रणनीति और ‘विकास मॉडल’ पर मंथन
टीवीके बैठक का मुख्य फोकस नई सरकार की प्राथमिकताएं तय करना है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व शुरुआती 100 दिनों के एजेंडे पर खास जोर दे रहा है—जिसमें रोजगार, बुनियादी ढांचा और भ्रष्टाचार पर सख्ती प्रमुख मुद्दे हैं।
विधायकों ने एक सुर में कहा कि यह जीत सिर्फ राजनीतिक सफलता नहीं, बल्कि जनता के भरोसे की परीक्षा भी है। “अब वादों को ज़मीन पर उतारने का समय है,” एक वरिष्ठ नेता ने बैठक के दौरान कहा।
अन्ना नगर और पोलुर से जीतने वाले विधायकों का संदेश
अन्ना नगर सीट से जीत दर्ज करने वाले वीके रामकुमार ने इसे “जनता की जीत” बताते हुए कहा कि यह परिणाम तमिलनाडु के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ है। उनके शब्दों में—“लोकतंत्र में अंतिम ताकत जनता के पास ही होती है, और इस बार जनता ने बदलाव चुना है।”
वहीं पोलुर से विधायक बने अभिषेक आर. ने थोड़ा संयमित अंदाज अपनाया। उन्होंने कहा कि फिलहाल पार्टी के भीतर चर्चा चल रही है कि किस दिशा में आगे बढ़ना है, ताकि उम्मीदों पर खरा उतरा जा सके।
पिछली सरकारों पर भ्रष्टाचार के आरोप
कांचीपुरम से विधायक आर.वी. रंजीत कुमार ने टीवीके बैठक के दौरान विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले वर्षों में राज्य में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ और करीब 5 लाख करोड़ रुपये का कर्ज तमिलनाडु पर लाद दिया गया।
उनकी टिप्पणी में एक तरह की नाराजगी झलकती है—“तरक्की कुछ गिने-चुने लोगों तक सीमित रही, जबकि आम आदमी बोझ तले दबता गया।”
‘थलापति विजय’ पर भरोसा और केंद्र से सहयोग की उम्मीद
पार्टी के भीतर सबसे ज्यादा भरोसा जिस चेहरे पर दिख रहा है, वह है विजय थलापति। रंजीत कुमार ने कहा कि विजय ने भ्रष्टाचार खत्म करने का जो वादा किया, उसी ने जनता को आकर्षित किया।
उन्होंने 1977 में एम. जी. रामचंद्रन के दौर की याद दिलाते हुए कहा कि “इतिहास खुद को दोहरा रहा है”—इस बार नेतृत्व विजय के हाथ में है।
साथ ही, केंद्र सरकार के साथ सहयोग को लेकर भी सकारात्मक संकेत दिए गए। नरेंद्र मोदी द्वारा टीवीके को दी गई बधाई का जिक्र करते हुए नेताओं ने कहा कि यह तालमेल राज्य के विकास को नई रफ्तार दे सकता है।
निष्कर्ष: उम्मीदों का पहाड़, अब परीक्षा की घड़ी
तमिलनाडु की जनता ने जिस भरोसे के साथ टीवीके को सत्ता सौंपी है, वह सिर्फ एक जीत नहीं—बल्कि एक जिम्मेदारी है। टीवीके बैठक में दिख रही ऊर्जा और बयानबाजी से साफ है कि पार्टी बड़े बदलाव का दावा कर रही है।
हालांकि, असली परीक्षा अब शुरू होती है—जब वादों को नीतियों में और नीतियों को जमीन पर उतारना होगा। राजनीति में जीत जितनी महत्वपूर्ण होती है, उससे कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है उस भरोसे को बनाए रखना।













