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शिक्षामित्र मानदेय वृद्धि: सीएम योगी का बड़ा फैसला, 10 हजार से बढ़ाकर 18 हजार किया, शिक्षा व्यवस्था को दी नई दिशा

On: May 5, 2026
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शिक्षामित्र मानदेय वृद्धि, सीएम योगी का बड़ा फैसला, 10 हजार से बढ़ाकर 18 हजार किया
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गोरखपुर (05 मई 2026)। उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में एक अहम बदलाव की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षामित्रों के मानदेय में उल्लेखनीय वृद्धि की है। गोरखपुर स्थित योगिराज बाबा गम्भीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित शिक्षामित्र सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने मानदेय को 10,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपये प्रतिमाह करने की घोषणा की।

यह फैसला प्रदेश के करीब 1.43 लाख शिक्षामित्रों के लिए सीधे राहत लेकर आया है। कार्यक्रम में प्रतीकात्मक रूप से कुछ शिक्षामित्रों को बढ़े हुए मानदेय का लाभ भी प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह वृद्धि अप्रैल माह से प्रभावी हो चुकी है, जिससे शिक्षामित्रों को तत्काल आर्थिक लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।

📊 मानदेय के साथ सामाजिक सुरक्षा का विस्तार

मुख्यमंत्री ने केवल मानदेय बढ़ाने तक ही सीमित न रहते हुए शिक्षामित्रों के लिए व्यापक सामाजिक सुरक्षा का खाका भी प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि अब शिक्षामित्रों को 5 लाख रुपये तक की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

इसके अलावा, उन्होंने बेसिक शिक्षा परिषद को निर्देश दिया कि शिक्षामित्रों के खातों को विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा जाए। इससे दुर्घटना जैसी स्थिति में उन्हें 5 से 10 लाख रुपये तक का बीमा कवर मिल सकेगा। यह कदम न केवल आर्थिक सुरक्षा बढ़ाएगा, बल्कि शिक्षामित्रों के मनोबल को भी मजबूत करेगा।

🗣️ संवाद और सकारात्मक सोच पर जोर

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक महत्वपूर्ण संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि समस्याओं का समाधान टकराव से नहीं, बल्कि संवाद से निकलता है।

उनके शब्दों में, “सकारात्मक सोच ही बेहतर परिणाम देती है। हमें शिक्षा के क्षेत्र में इसी सोच के साथ आगे बढ़ना होगा।”

यह बयान सिर्फ एक औपचारिक अपील नहीं, बल्कि शिक्षामित्रों के लिए एक दिशा-निर्देश जैसा था, जिसमें उन्होंने उन्हें बच्चों के भविष्य निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।

🎯 ड्रॉपआउट दर शून्य करने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री ने शिक्षामित्रों को शिक्षा प्रणाली की रीढ़ बताते हुए कहा कि प्राथमिक शिक्षा को मजबूत किए बिना सशक्त समाज की कल्पना अधूरी है। उन्होंने विशेष रूप से ड्रॉपआउट दर को शून्य तक लाने का लक्ष्य रखा और शिक्षामित्रों से इसमें सक्रिय भागीदारी की अपेक्षा जताई।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि एक शिक्षित समाज ही राष्ट्र को मजबूत आधार देता है, इसलिए हर शिक्षक और शिक्षामित्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

🧑‍🏫 शिक्षामित्रों के लिए नीति में बदलाव का संकेत

मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों की नीतियों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उनकी त्रुटियों के कारण शिक्षामित्रों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा था। हालांकि, 2017 के बाद सरकार ने न केवल उनकी सेवाएं सुरक्षित रखीं बल्कि मानदेय को क्रमिक रूप से बढ़ाया।

कार्यक्रम में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने भी संबोधन देते हुए इस फैसले को ऐतिहासिक बताया और कहा कि इससे शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा।

🔍 विश्लेषण: क्यों महत्वपूर्ण है शिक्षामित्र मानदेय वृद्धि

शिक्षामित्र मानदेय वृद्धि सिर्फ आर्थिक निर्णय नहीं, बल्कि यह प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है। लंबे समय से शिक्षामित्र कम मानदेय और असुरक्षा की भावना से जूझ रहे थे। ऐसे में यह फैसला उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ-साथ शिक्षा की गुणवत्ता पर भी सकारात्मक असर डाल सकता है।

गोरखपुर से उठी यह पहल आने वाले समय में पूरे प्रदेश की शिक्षा प्रणाली के लिए एक नई दिशा तय कर सकती है।

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